नई दिल्ली।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने निर्वाचन प्रक्रिया सवालिया निशान खड़े करते हुए चुनाव आयोग पर तीखे प्रहार किये कहा चुनाव आयोग अब तक का सबसे अधिक “समझौतावादी” निकाय बन गया है और हालिया विधानसभा चुनावों में उसने निष्पक्ष पर्यवेक्षक के बजाय “खिलाड़ी” की भूमिका निभाई।
मीडिया से बातचीत में रमेश ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख कमजोर हो रही है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन के दौरान कई राज्यों में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे वोट देने का अधिकार प्रभावित हुआ है। उन्होंने मांग उठाई कि मतदान के अधिकार को केवल संवैधानिक अधिकार न रखकर मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष अब पीछे हटने वाला नहीं है और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए उनके प्रयास लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने बताया कि राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दूसरा नोटिस दिया जा चुका है, जिसमें नौ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले दिया गया नोटिस सभापतियों द्वारा खारिज किया जा चुका है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर आक्रामक रुख बनाए हुए है।
रमेश ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब केवल राजनीतिक दलों से ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से भी लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक आयोग की निष्पक्षता बहाल नहीं होती, तब तक विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा।
इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए तंज कसा कि “चुनाव आयोग को अपनी धुन पर नचाने के बाद” वे लद्दाख दौरे पर गए हैं। उन्होंने चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को भी रैकेट करार देते हुए उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।


