– पुराने नियमों के आधार पर नहीं मिलेगा अधिकार
नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को पुरानी रिक्तियों के समय लागू नियमों के आधार पर पदोन्नति का दावा करने का विशेष अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पदोन्नति की प्रक्रिया जिस समय संचालित की जाएगी, उसी समय लागू नियमों के अनुसार ही प्रमोशन दिया जाएगा। कर्मचारी केवल वर्तमान कानूनी प्रावधानों के तहत विचार किए जाने का अधिकार रखता है, न कि पुराने नियमों के आधार पर पदोन्नति पाने का।
अदालत ने कहा कि “विचार किए जाने का अधिकार” और “पदोन्नति पाने का अधिकार” दोनों अलग-अलग बातें हैं। किसी कर्मचारी को केवल यह अधिकार है कि उसके मामले पर मौजूदा नियमों के अनुसार विचार किया जाए, लेकिन उसे किसी विशेष नियम के तहत पदोन्नति दिए जाने का दावा नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को पिछली तारीख से लागू नियमों के आधार पर पदोन्नति का अधिकार नहीं दिया जा सकता। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, पदोन्नति पर विचार का अधिकार पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से नहीं बल्कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था के तहत ही निर्धारित होगा।
इस फैसले का प्रभाव केंद्र और राज्य सरकारों के लाखों कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जहां पदोन्नति से जुड़े विवाद लंबे समय से विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में प्रमोशन संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि सरकारी सेवा में पदोन्नति का आधार वही नियम होंगे, जो पदोन्नति प्रक्रिया के समय प्रभावी और लागू हों।


