नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों को जल्द ही टोल प्लाजा के बैरियर पर रुकने की झंझट से राहत मिल सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिया है कि सरकार एआई आधारित बैरियर-फ्री टोलिंग प्रणाली लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है और इसे फरवरी-मार्च 2027 तक लागू किए जाने की उम्मीद है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में संबोधित करते हुए गडकरी ने बताया कि नई व्यवस्था में वाहन नंबर प्लेट पहचान तकनीक और फास्टैग को एकीकृत किया जाएगा। इसके जरिए वाहन चलते हुए ही टोल भुगतान कर सकेंगे और टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे टोल बूथों पर लगने वाले जाम और प्रतीक्षा समय को कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य देश के राजमार्गों को अधिक डिजिटल, निर्बाध और बाधा-मुक्त बनाना है। नई व्यवस्था से टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ने और राजस्व में भी इजाफा होने की उम्मीद है। सरकार के अनुमान के मुताबिक इससे सालाना टोल राजस्व में करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
भारत में फास्टैग व्यवस्था पहले ही बड़े स्तर पर लागू हो चुकी है। वर्ष 2021 में इसे अनिवार्य किए जाने के बाद देश में अधिकांश वाहन फास्टैग का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब सरकार इसी व्यवस्था को अगली तकनीक से जोड़कर टोल भुगतान को और आसान बनाने की तैयारी में है।
इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री ने ‘वनटैग’ सुविधा भी शुरू की है। इसके तहत वाहन मालिक को बैंक बदलने के लिए पुराना फास्टैग हटाकर नया टैग लेने की जरूरत नहीं होगी। फास्टैग को दूसरे बैंक खाते से जोड़ने की प्रक्रिया आसान हो सकेगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राजमार्गों पर सफर का तरीका काफी बदलने की उम्मीद है। वाहन चालकों को टोल बैरियर पर रुकने के बजाय बिना रुके सफर जारी रखने की सुविधा मिलेगी और डिजिटल माध्यम से टोल की राशि स्वतः वसूली जा सकेगी।


