नई दिल्ली
अयोध्या राम मंदिर निर्माण से जुड़ी भूमि खरीद के कथित घोटाले का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार द्वारा जांच अधिकारी को लिखे गए पत्र का स्वागत करते हुए कहा कि यदि विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है तो कम से कम वीएचपी की ओर से उठाए गए सवालों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर भूमि खरीद प्रकरण को लेकर वे लंबे समय से जांच की मांग करते रहे हैं। अब जब विश्व हिंदू परिषद की ओर से भी पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की बात कही गई है तो सरकार और संबंधित एजेंसियों को बिना किसी पक्षपात के पूरे मामले की जांच करानी चाहिए।
हालांकि उन्होंने वीएचपी की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पत्र में केवल चुनिंदा लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे विनय कटियार समेत कई अन्य नामों का उल्लेख नहीं किया गया। उनके अनुसार नामों का यह चयन निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है और पूरे मामले की व्यापक जांच होनी चाहिए।
आप सांसद ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारियों पर भूमि खरीद में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं के अपने पुराने आरोप दोहराए। उन्होंने दावा किया कि कम कीमत वाली जमीनों को दस्तावेजों में अधिक मूल्य दिखाकर खरीदा गया और इस संबंध में वह पहले ही केंद्रीय जांच एजेंसियों को विस्तृत शिकायत सौंप चुके हैं।
संजय सिंह ने ट्रस्ट पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश-विदेश से आने वाले कई श्रद्धालुओं से दान लिया गया, लेकिन उन्हें आधिकारिक रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच शुरू होती है तो कई लोग स्वयं आगे आकर बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने को तैयार हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। वहीं, इस पूरे प्रकरण में ट्रस्ट की ओर से पहले भी आरोपों को निराधार बताया जाता रहा है। फिलहाल वीएचपी के पत्र के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।


