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Tuesday, June 23, 2026

संघर्ष के दौर मे मनोवल तोड़ने वालों को छोड़ते चलिए, मंजिल अकेले मिलती 

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शरद कटियार

जीवन में जब कोई व्यक्ति बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ता है, तब उसकी मेहनत भी साधारण नहीं रहती। वह अपने समय, सुख, आराम और कई बार अपने निजी रिश्तों तक को दांव पर लगाकर आगे बढ़ने का प्रयास करता है। जितनी बड़ी मंजिल होती है, संघर्ष भी उतना ही गहरा और कठिन होता है। सफलता की चमक लोगों को दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे छिपी अनगिनत रातें, असफलताएं, चिंताएं और त्याग बहुत कम लोगों को नजर आते हैं।

 

विडंबना यह है कि संघर्ष के सबसे कठिन दौर में विरोध हमेशा बाहर से नहीं आता। कई बार वे लोग भी मनोबल गिराने का प्रयास करते हैं जिन्हें हम अपना मानते हैं। कुछ लोग आपकी असफलताओं पर सलाहकार बन जाते हैं और सफलताओं पर आलोचक। उन्हें आपकी मेहनत से अधिक आपकी सीमाएं दिखाई देती हैं। वे आपकी उड़ान में सहयोग देने के बजाय आपके पंखों का वजन बढ़ाने का काम करते हैं।

 

ऐसे लोगों से नाराज होने या उन्हें गलत साबित करने में अपनी ऊर्जा खर्च करना बुद्धिमानी नहीं है। जीवन का सबसे बड़ा उत्तर तर्क नहीं, बल्कि उपलब्धि होती है। जो लोग आपके संघर्ष को नहीं समझते, वे आपकी सफलता का अर्थ भी नहीं समझ पाएंगे। इसलिए हर उस व्यक्ति को साथ लेकर चलने की जिद छोड़ देनी चाहिए जो बार-बार आपका मनोबल तोड़ता हो। कुछ लोग जीवन में साथ चलने के लिए नहीं, बल्कि एक सीख देने के लिए आते हैं।

 

समय का अपना न्याय होता है। जब मेहनत ईमानदार हो और उद्देश्य स्पष्ट हो, तब रास्ते भले कठिन हों, मंजिल दूर नहीं रहती। इतिहास गवाह है कि हर बड़ी सफलता के पीछे अकेलेपन का एक लंबा अध्याय लिखा गया है। जो लोग उस दौर में साथ नहीं खड़े होते, वे अक्सर सफलता के बाद सबसे आगे दिखाई देते हैं। लेकिन तब तक संघर्ष करने वाला व्यक्ति समझ चुका होता है कि उसकी असली ताकत दूसरों की स्वीकृति नहीं, बल्कि स्वयं पर उसका विश्वास है।

 

जीवन में नए आगाज़ हमेशा पुराने अध्यायों को पीछे छोड़कर ही शुरू होते हैं। हर नई सुबह के लिए एक रात का समाप्त होना आवश्यक है। इसलिए जो लोग आपकी ऊर्जा को कमजोर करते हैं, आपकी उम्मीदों को चोट पहुंचाते हैं और हर कदम पर निराशा का वातावरण बनाते हैं, उन्हें सम्मानपूर्वक पीछे छोड़ देना ही बेहतर होता है। यह त्याग नहीं, आत्मरक्षा है। यह अहंकार नहीं, बल्कि अपने सपनों के प्रति जिम्मेदारी है।

 

दुनिया का स्वभाव भी बड़ा रोचक है। जब आप संघर्ष कर रहे होते हैं तो बहुत कम लोग आपके साथ खड़े दिखाई देते हैं, लेकिन जैसे ही आपकी मेहनत परिणाम देने लगती है, वही दुनिया आपके नए आगाज़ की सलामी देने के लिए उतावली हो जाती है। इसलिए अपने कदमों की गति दूसरों की राय से नहीं, अपने लक्ष्य की दिशा से तय कीजिए।

 

याद रखिए, मंजिल तक पहुंचने वाले लोग रास्ते में हर किसी को मनाने में समय नहीं गंवाते। वे बस चलते रहते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है कि एक दिन उनकी सफलता ही उनकी सबसे प्रभावशाली पहचान बनेगी, और तब शब्दों से नहीं, उपलब्धियों से इतिहास लिखा जाएगा।

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