– लखनऊ की अदालत ने विकास कुमार को दोषी कर सुनाई सजा
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में न्यायालय ने SC/ST एक्ट का फर्जी मामला दर्ज कराने के आरोप में एक आरोपी को पांच साल की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि कानून का दुरुपयोग गंभीर अपराध है और दोषियों को कठोर दंड मिलना आवश्यक है, ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे।
मामला वर्ष 2019 का है, जब विकास कुमार ने PGI थाने में SC/ST एक्ट के तहत एक मुकदमा दर्ज कराया था। जांच में पुलिस को पता चला कि विकास ने जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया था, उससे उसने जमीन के एवज में 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसे वह चुका नहीं पाया। कर्ज दबाव से बचने के लिए विकास ने झूठी FIR दर्ज कर दी थी।
अभियोजन के अनुसार
पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की,कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेज़ और कर्ज संबंधित कागज़ों से फर्जीवाड़ा साबित हुआ
अदालत ने माना कि आरोपी ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए गंभीर आरोप लगाकर दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने की नीयत से यह साजिश रची थी।
विशेष न्यायाधीश SC/ST एक्ट की अदालत ने विकास कुमार को
5 साल कठोर कारावास,
20,000 रुपये जुर्माना
की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि भविष्य में ऐसे फर्जी मुकदमों पर रोक लगेगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि SC/ST एक्ट एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य संरक्षण देना है, न कि झूठे आरोपों में किसी को फँसाना। मामले में सजा होने के बाद पुलिस ने इसे कानून के दुरुपयोग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना है।






