लखनऊ।हुक्का बार संचालन को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने बड़ी और सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि हुक्का बार चलाना किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार नहीं है और राज्य सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में इस पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तंबाकू और निकोटिन को लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि सरकार जनहित में ऐसे कारोबारों पर नियंत्रण या रोक लगा सकती है। अदालत ने व्यवसाय के अधिकार को आधार बनाकर दी गई याचिकाकर्ता की दलील को भी खारिज कर दिया।
दरअसल याचिकाकर्ता ने प्रशासनिक कार्रवाई और लाइसेंस से जुड़े विवाद को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में तर्क दिया गया था कि हुक्का बार संचालन व्यापार और व्यवसाय के अधिकार के दायरे में आता है। लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि कोविड काल के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए हुक्का बार पर रोक लगाई थी। अदालत ने संकेत दिए कि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सरकार के अधिकार व्यापक हैं और ऐसे निर्णय जनहित में लिए जा सकते हैं।
इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में हुक्का बार कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे मामलों में सरकार की स्थिति को और मजबूत करेगी।
मामले की अगली सुनवाई अब 14 जुलाई को होगी, जिस पर सभी पक्षों की नजर टिकी हुई है।


