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Tuesday, June 30, 2026

PoK में बगावत, सप्लाई बहाल करो, वरना पकड़ लेंगे दूसरा रास्ता, 38 सूत्रीय मांगें पूरी करने की चेतावनी दी

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इस्लामाबाद: पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में चल रहे सरकार विरोधी आंदोलन के बीच हालात दिन ब दिन बिगड़ते बिगड़ते बद्दतर होता जा रहा है। पाकिस्तान सरकार (Government of Pakistan) इतनी ओछी हरकत पर उतर आई है कि प्रदर्शन को दबाने की कोशिश में आंदोलन के बीच खाद्य सामग्री, ईंधन और दवाओं की सप्लाइ पर रोक लगा दी। बीते 9 जून से प्रदर्शन हो रहा है। PoK में भारी विरोध-प्रदर्शन और बगावत अपने चरम पर पहुंच गई है।

PoK में लोगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंदोलन के दौरान एक लोकल लीडर ने चेतावनी दी है कि अगर इस्लामाबाद खाने की सप्लाई रोकता रहा, तो लोग दूसरी राह पकड़ सकते हैं। ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना और शहबाज सरकार को अल्टीमेटम देते हुए अपनी 38 सूत्रीय मांगें पूरी करने की चेतावनी दी है।

पाकिस्तान की स्थिति लगातार खराब हो रही है, लोगों का गुस्सा मुख्य रूप से भारी मंहगाई, बेतहाशा बिजली बिल, और आटे की कीमतों को लेकर है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हिंसक कार्रवाई में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हिरासत में लेकर गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी प्रशासन को कड़ा रुख अपनाते हुए अल्टीमेटम दिया था. मांगे पूरी न होने की स्थिति में रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक एक लाख से अधिक लोगों के विशाल मार्च की चेतावनी दी गई है। प्रदर्शन के बढ़ते हुए दबाव की वजह से यहां पर सरकार ने खाने की सप्लाई को रोक दिया है। इस संघर्ष में अब महिलाओं और स्कूली बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया है।

प्रोटेस्ट कर रहे लोगों ने ये भी ऐलान किया कि PoJK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। PoK के लोग कह रहे है कि शायद पाकिस्तान भूल गया है कि हमें इनकी जरूरत नहीं है बल्कि हमारी जरूरत उन्हें है। आपको बताते चले कि 5 जून से इंटरनेट सर्विस बंद हैं। इस कदम से उन लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है। कई हफ्तों से अशांति बढ़ती जा रही है।

पाकिस्तान की सीनेट में अपोजिशन लीडर महमूद अचकजई और पूर्व प्राइम मिनिस्टर शाहिद खाकन अब्बासी को PoK में प्रोटेस्टर्स से मिलने की इजाजत नहीं मिली। सेना और रेंजर्स की कार्रवाई में कई कार्यकर्ताओं की मौत और सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबरें हैं। पिछले कुछ हफ्तों में, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों के दौरान हिंसक घटनाओं की भी खबरें आई हैं।

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