नई दिल्ली। भारत में जल्द ही प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोटों के चलन की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) देश में पॉलीमर आधारित करेंसी नोटों को प्रचलन में लाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। यदि यह योजना लागू होती है तो भारतीय मुद्रा प्रणाली में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, पॉलीमर नोटों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और उनकी लंबी उम्र को देखते हुए रिजर्व बैंक इस दिशा में अध्ययन कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और सिंगापुर सहित कई देशों में पॉलीमर नोट पहले से प्रचलन में हैं और उन्हें पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक चलते हैं। ये पानी, नमी और धूल से कम प्रभावित होते हैं तथा इनमें सुरक्षा फीचर भी अधिक प्रभावी तरीके से जोड़े जा सकते हैं। इससे नकली नोटों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक आरबीआई विभिन्न मूल्य वर्ग के नोटों में पॉलीमर तकनीक के उपयोग की व्यवहारिकता, लागत और सुरक्षा मानकों का आकलन कर रहा है। हालांकि अभी तक रिजर्व बैंक की ओर से देशभर में पॉलीमर नोट लागू करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
यदि पॉलीमर नोटों को मंजूरी मिलती है तो इससे नोटों की छपाई और रखरखाव की लागत में भी दीर्घकालिक कमी आ सकती है। साथ ही बार-बार नोट बदलने की आवश्यकता कम होगी, जिससे बैंकिंग प्रणाली पर दबाव भी घट सकता है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में पॉलीमर नोटों को लागू करना एक बड़ी प्रक्रिया होगी, जिसके लिए व्यापक परीक्षण, तकनीकी तैयारी और जनजागरूकता की आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए किसी भी अंतिम निर्णय से पहले आरबीआई चरणबद्ध तरीके से परीक्षण कर सकता है।


