शाहजहांपुर।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शाहजीपुर महानगर द्वारा होटल द ग्रांड आर्क में एक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए संघ के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के सह क्षेत्र प्रचारक प्रमुख तपन ने कहा कि संघ की स्थापना का उद्देश्य केवल संगठन बनाना नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण और समाज को राष्ट्रभक्ति की एक सशक्त श्रृंखला में जोड़ना है। उन्होंने कहा कि “भारत का अस्तित्व महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है कि भारत अपनी मूल पहचान के साथ बना रहे।”
अपने विचार रखते हुए उन्होंने “हिंदुत्व” को भारत की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए कहा कि सत्य और ईश्वर एक हैं, जिन्हें विद्वान अलग-अलग रूपों में स्वीकार करते हैं। इसी भावना के साथ “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की परिकल्पना पूरे समाज के कल्याण का संदेश देती है।
तपन ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन की पहचान कर अपनी दिव्यता को प्रकट करना चाहिए। भक्ति, ज्ञान और ध्यान के माध्यम से स्वयं को समझते हुए समाज के व्यापक हित में कार्य करना ही सच्ची साधना है।
उन्होंने बताया कि डॉ केशव राव बलिराम हेडगेवार ने 100 वर्ष पूर्व संघ की स्थापना इस संकल्प के साथ की थी कि समाज को संगठित कर राष्ट्रहित में समर्पित, निःस्वार्थ कार्यकर्ताओं का निर्माण किया जाए। आज वही छोटा सा पौधा वटवृक्ष बनकर देश और समाज की सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन सहित विभिन्न राष्ट्रीय आंदोलनों में संघ की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है और आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहा है।
“पंच परिवर्तन” पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए संस्कारयुक्त शिक्षा, संयुक्त परिवार की पुनर्स्थापना, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों का पालन और सामाजिक समरसता अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं स्वयंसेवकों में इन मूल्यों का विकास करती हैं, जो आगे समाज में जागरूकता फैलाते हैं।
कार्यक्रम में विभाग संघचालक रवि मिश्रा, महानगर संघचालक रमेश चंद्र सक्सेना, विभाग प्रचारक रवि प्रकाश, महानगर कार्यवाह नवनीत सहित कई गणमान्य नागरिक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
गोष्ठी के माध्यम से समाज को संगठित कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया, साथ ही “पंच परिवर्तन” को अपनाकर विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।


