नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता पर संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं। एक ओर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौता करने के लिए कड़ी चेतावनी देते हुए अंतिम मौका बताया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नाकेबंदी से नाराज ईरान ने वार्ता से पीछे हटने के संकेत दिए हैं। ऐसे में इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत से पहले ही कई पेच फंस गए हैं।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान द्वारा जहाजों पर गोलीबारी कर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल तय कार्यक्रम के अनुसार पाकिस्तान रवाना होगा, लेकिन यदि ईरान ने अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं तो उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। ट्रंप के इस सख्त रुख ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए फिलहाल अपना प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन और “जनता पर सामूहिक सजा” करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि अंतिम समय में ईरान बातचीत के लिए राजी भी हो सकता है, लेकिन स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, संभावित वार्ता में ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं, जबकि अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में टीम के पहुंचने की संभावना है। हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे वार्ता के स्वरूप को लेकर भी संशय बना हुआ है।
इसी बीच पाकिस्तान में सुरक्षा को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के कई जेट इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं और वार्ता से पहले सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। अमेरिका ने अपने प्रतिनिधियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने सैनिकों को सौंपने का निर्णय लिया है।
उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हालात लगातार बदल रहे हैं। ईरान ने पहले इसे खोलने का संकेत दिया था, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहने पर फिर से इसे बंद कर दिया गया। इस दौरान कुछ जहाजों को भी रोके जाने और गोलीबारी की घटनाओं की खबरें सामने आई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।


