चंडीगढ़। दो महिला साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बार-बार मिल रही पैरोल और फर्लो को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सामने आए आधिकारिक आंकड़ों ने जेल व्यवस्था और पैरोल नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
25 अगस्त 2017 को दोषी ठहराए जाने के बाद 27 जून 2026 तक राम रहीम की सजा के 3,228 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान वह 16 बार पैरोल और फर्लो पर जेल से बाहर आ चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने अब तक कुल 435 दिन 12 घंटे जेल से बाहर बिताए हैं, जो उनकी कुल सजा का लगभग 13.5 प्रतिशत है। इनमें से 301.5 दिन केवल पैरोल के रहे, जो सजा की अवधि में भी नहीं जुड़ते।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वर्ष 2022 से अब तक राम रहीम हर साल औसतन 91 दिन, यानी लगभग साल का एक चौथाई हिस्सा, जेल से बाहर रहे हैं। वर्ष 2026 में भी उन्हें 26 मई से 24 जून तक 30 दिन की पैरोल मिली और इस साल अब तक वे करीब 70 दिन जेल से बाहर रह चुके हैं।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद गंभीर अपराधों में दोषी कैदियों को बार-बार पैरोल दिए जाने की प्रक्रिया पर नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि लगातार मिल रही पैरोल से न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं, जबकि प्रशासन का पक्ष है कि पैरोल संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत ही मंजूर की जाती है।
।


