– रामनगर की रामलीला में पीढ़ियों से निभाई जा रही परंपरा
– 16 अक्टूबर से शुरू होगी ऐतिहासिक रामलीला
– 20 अक्टूबर को होगा समापन
रामनगर। रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला 16 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगी। आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राजघराने की ओर से आयोजित होने वाली इस रामलीला की व्यवस्थाओं को लेकर रानी मृणालिनी सिंह ने बैठक कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। इस रामलीला की खास पहचान केवल धार्मिक मंचन ही नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी पात्रों की भूमिकाएं निभाते चले आ रहे परिवार भी हैं।
रामनगर की रामलीला वर्षों से राजघराने के संरक्षण में आयोजित होती रही है। पहले स्वर्गीय राजा रत्नाकर सिंह इसका आयोजन कराते थे। उनके निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी रानी मृणालिनी सिंह इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों की भागीदारी से होने वाले इस आयोजन में कई परिवार लंबे समय से विभिन्न पात्रों का मंचन करते आ रहे हैं।
रामनगर की रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले केसरीपुर निवासी स्वर्गीय चंद्रिका प्रसाद उर्फ चंचरीक त्रिपाठी ने वर्षों तक अपने दमदार अभिनय से दर्शकों पर प्रभाव छोड़ा। उनके निधन के बाद उनके पुत्र राकेश त्रिपाठी ने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। वह पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार रावण की भूमिका निभा रहे हैं। पिता के बाद पुत्र द्वारा उसी पात्र का मंचन करना रामलीला की पारिवारिक परंपरा का उल्लेखनीय उदाहरण है।
रामलीला में इसी परिवार से जुड़े पूरन तिवारी भी लंबे समय से महिला पात्रों का अभिनय करते आ रहे हैं। वह सुलोचना और शूर्पणखा की भूमिकाओं को अपने रोचक अभिनय से जीवंत बनाते हैं। वर्षों से एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा महत्वपूर्ण पात्रों का मंचन किए जाने से रामनगर की रामलीला की परंपरा को विशिष्ट पहचान मिली है।
पक्का तालाब मैदान में होगा रावण वध
आयोजन के दौरान रावण वध तक के कार्यक्रम पक्का तालाब मैदान में होंगे, जबकि राम राज्याभिषेक का मंचन धनुष यज्ञ मैदान में किया जाएगा। पांच दिनों तक चलने वाली रामलीला को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह है। आयोजक तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। रामनगर की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और पारिवारिक विरासत को भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रही है।


