– संगठनात्मक नियुक्तियों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
– उनके करीबी क्षेत्र और प्रदेश में हुए आसीन
– नवंबर में उनका भी राज्यसभा में जाना तय
– प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी देते हैं विशेष तरजीह
शरद कटियार
यूथ इंडिया, लखनऊ
भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई की नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होने के बाद संगठन के भीतर विभिन्न नेताओं के प्रभाव और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन्हीं चर्चाओं के केंद्र में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह के पुत्र एवं पूर्व सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।
नई टीम में शंकर लाल लोधी को प्रदेश महामंत्री, पूर्णलाल लोधी को ब्रज क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष तथा किरण निषाद को प्रदेश मंत्री जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा साफ हो गईं है कि इन नियुक्तियों में राजवीर सिंह राजू भैया की भूमिका प्रभावशाली रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विभिन्न वर्गों के बीच संगठनात्मक संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है। इसी रणनीति के तहत नई कार्यकारिणी में सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दिए जाने की भी चर्चा है।
स्वर्गीय कल्याण सिंह का उत्तर प्रदेश की राजनीति और भाजपा संगठन में विशेष स्थान रहा है। राम मंदिर आंदोलन से लेकर प्रदेश की राजनीति तक उनकी भूमिका को पार्टी आज भी महत्वपूर्ण विरासत के रूप में प्रस्तुत करती है। ऐसे में उनके परिवार से जुड़े नेताओं की राजनीतिक सक्रियता को भी संगठन के भीतर अहम माना जाता है।
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि भविष्य में राजवीर सिंह राजू भैया को पार्टी किसी बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि, इस संबंध में भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का फोकस सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक विस्तार पर है। इसी क्रम में नई प्रदेश कार्यकारिणी में विभिन्न सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों के नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई कार्यकारिणी के गठन के बाद यह स्पष्ट है कि भाजपा संगठन चुनावी रणनीति के अनुरूप सामाजिक समीकरणों को साधने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का राजनीतिक प्रभाव किस रूप में सामने आता है, इस पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।


