(मनोज कुमार अग्रवाल-विनायक फीचर्स)
भारतीय समाज में यौन शुचिता का परंपरागत विचार खंडित हो रहा है। किशोरावस्था से यौवन की ओर कदम बढ़ाती लड़कियां कई बार अभिभावकों की खुली छूट या मॉडर्न बिंदास जीवनशैली जीने के भ्रम में गलत रास्ते पर चली जाती हैं और परिवार, मां-बाप से अधिक प्रेमियों पर भरोसा कर दैहिक संबंध बना लेती हैं। यहीं से रईसजादी बीवी पाने का मन बना चुके शोहदे इनके अंतरंग पलों के फोटो और वीडियो कैप्चर कर स्टोर कर लेते हैं और जब जवानी के नशे में हुई गलतियों से बाहर निकलकर अरेंज मैरिज की राह पर चल किसी केतन के साथ सगाई करती हैं तो इनके एक्स आशिक इनके फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बरगलाते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा और घर-परिवार की इज्जत नीलाम होने के भय से ऐसी लड़कियां एक्स के इशारे और सहयोग से मंगेतर को ही पहाड़ी से धकेलकर मारने का अक्षम्य अपराध कर जाती हैं। इस मामले की तह तक पड़ताल कर सारे षड्यंत्र को बुनने वाले चेतन बाबूलाल का नार्को टेस्ट होना चाहिए। सिया गोयल एक बेवकूफ, नादान मोहरा है।
पुणे में घटित केतन विशाल अग्रवाल हत्याकांड ने एक बार फिर भारतीय समाज की उन परतों को उधेड़ दिया है जिसे जानकर भी मानने से इनकार किया जा रहा है, क्योंकि हमें आदर्शवादी समाज का दिखावा बनाए रखना है। असीम संभावनाओं से भरे 26 साल के केतन अग्रवाल की हत्या उनकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर कर दी। पुणे के पास लोहागढ़ के किले में ट्रेकिंग के बहाने सिया केतन को ले गई, उससे पहले अपने जन्मदिन का जश्न केतन के साथ मनाया और बाकायदा सोशल मीडिया पर उसे डाला भी। उन वीडियो को देखकर जरा भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि इस दौरान कितनी भयावह योजना उसके दिमाग में चल रही होगी। लोहागढ़ किले में जब केतन और सिया पहुंचे तो उनके साथ-साथ चेतन चौधरी भी पहुंचा, जिसके साथ मिलकर सिया ने केतन को ऊंचाई से धक्का दे दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर फिर पोस्ट डाली कि जन्मदिन पर तुम मुझे छोड़कर चले गए। पहले-पहल इसे सामान्य दुर्घटना मानकर सिया के लिए ही सबकी सहानुभूति उमड़ी कि नवंबर में इनकी शादी होनी थी, जिसके लिए दोनों परिवार जमकर तैयारी कर रहे थे। जयपुर में शाही अंदाज में शादी करवाने के लिए 17 करोड़ रुपयों में एक महल भी बुक करवा लिया गया था, लेकिन उससे पहले इतना बुरा हादसा हो गया। पुलिस ने जब इस दुर्घटना की जांच शुरू की तो कुछ अजीबोगरीब संयोगों पर नजर गई, जैसे शादी से पहले की फोटोग्राफी करवाने के लिए यह जोड़ा बाली जाने वाला था, और एक दिन पहले केतन का पासपोर्ट अचानक गुम हो गया। 14 जून को भी सिया और केतन लोहागढ़ ट्रेक पर गए थे, जहां केतन को सिया ने धक्का दिया था और उसने झाड़ी पकड़कर खुद को बचाया था, तब सिया ने कहा था कि उसने सांप देखा और केतन की जान बचाने के लिए घबराहट में उसे धक्का दिया। लेकिन 18 जून को जब यह जोड़ा फिर से लोहागढ़ ट्रेक पहुंचा तो इस बार उनके करीब ही एक युवक सर्दियों में पहनी जाने वाली हुडी पहने हुए था और उसका चेहरा छिपा था, जबकि पुणे में अभी गर्मी ही है। पुलिस ने जब इन सारे तथ्यों की गहराई से पड़ताल की तो यह समझने में वक्त नहीं लगा कि यह सामान्य हादसा नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या थी।
अब सिया पुलिस की गिरफ्त में है, केतन के घरवाले स्वाभाविक तौर पर उसके लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। उनका एक ही सवाल है कि अगर किसी और से प्यार था और केतन से शादी नहीं करनी थी, तो पहले ही अपने घरवालों को मना कर देना था, इसके लिए हमारे बेटे को मारने की क्या जरूरत थी। ठीक ऐसा ही सवाल पिछले साल मेघालय में क्रूरता से मारे गए राजा रघुवंशी के घरवाले भी पूछ रहे थे, जब राजा से शादी करने के चंद दिनों बाद सोनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उनकी हत्या कर दी थी। असल में इन्हें प्रेमी या प्रेमिका कहना प्रेम जैसे पवित्र भाव का अपमान करने जैसा है, ये अपराध में भागीदार होते हैं, इससे ज्यादा इन्हें और कुछ नहीं कहा जा सकता।
बहरहाल, इंदौर से लेकर पुणे तक अपने जीवनसाथी को मारने की घटनाएं समाज में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति को तो दिखाती ही हैं, साथ ही यह संकेत भी देती हैं कि एक परंपरागत लीक पर समाज को चलाने की कोशिश कई बार कितने भयावह परिणाम लाती है। न जाने क्यों भारतीय समाज में अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने या किसी से प्यार करने के बाद शादी करने को अभी भी समाज घटिया या हिकारत से देखता है। आज के दौर में भी बहुत से अभिभावक यह कहने से हिचकते हैं कि उनकी बेटी या बेटे ने अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुना है। हमारा समाज बेटे की पसंद को कई बार सहजता से स्वीकार कर लेता है लेकिन बेटियां खुलकर जीवनसाथी के लिए अपनी पसंद बताने से भी रोक दी जाती हैं। अगर वह अपने अफेयर से शादी करें तो उसे या तो पाश्चात्य संस्कृति का दुष्प्रभाव बताया जाता है, या सामाजिक वर्जना की दोषी माना जाता है। कई बार इसके भी दुष्परिणाम सामने आते हैं,लड़की मां-बाप की पसंद के पति के साथ समायोजन बैठाने में असफल रहती है अथवा बागी होकर गलत कदम उठा लेती है। कई बार आत्महत्या,और अब तो मंगेतर के कत्ल तक बात जा पहुंची है। ऐसे कदम घातक और समाज के स्वरूप को नष्ट करने वाले हैं। वो इतनी हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाती कि शादी के लिए अपनी मर्जी बताए या मां-बाप के दबाव को मानने से इनकार करे।
सिया गोयल और सोनम रघुवंशी दोनों को यदि सामाजिक दायरे में पर्याप्त पारिवारिक नियंत्रण और मर्यादा में रहकर जीने के विचार और संस्कार दिए जाते तो वह किसी आशिक के जाल में फंसकर अपराध की ओर अग्रसर नहीं होतीं। या फिर उन्हें अपने पसंद के लड़कों से शादी करनी थी या मां-बाप की मर्जी से शादी नहीं करनी थी, तो वे पहले बता सकती थीं, इससे घर बर्बाद नहीं होते, न ही विवाह जैसी संस्था से भरोसा उठता। मगर इन्होंने गलत राह चुनी। हालांकि इनके कारण केवल लड़कियों पर सवाल उठाने से इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं मिलेगा।
अभी बीते दिनों नोएडा से लेकर भोपाल, कलकत्ता से लेकर देहरादून तक दहेज हत्याओं या ससुराल में मिली प्रताड़ना के कारण हुई मौतों के मामले भी सामने आए, जिनमें नवयुवतियों की जिंदगी बर्बाद हुई और उनके मां-बाप जिंदगी भर का दुख अब उठा रहे हैं। लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि विवाह से पहले स्वतंत्र, स्वच्छंद जीवन जीने का मन बना चुकी लड़कियों को ससुराल की बंदिश और मर्यादा में रहकर जीना स्वीकार नहीं है, जिस कारण वह कई बार आत्महत्या कर ससुराल वालों को दहेज हत्या व उत्पीड़न के अपराध में फंसा जाती हैं। इस सबके जिम्मेदार विवाह पूर्व के अफेयर और स्वच्छंद जीवनशैली होते है। विवाह से पहले यौन शुचिता का विचार भी नष्ट हो रहा है, कुछ लोग इसे स्वीकार नहीं कर पाते हैं और दांपत्य में तनाव पैदा हो जाते हैं।
आदर्शवादी समाज होने के लिए अब बदलते माहौल की हकीकत को समझना और स्वीकार करना शुरू करना चाहिए। भोपाल, नोएडा, इंदौर, पुणे में घटी घटनाएं केवल अपराधकथाएं नहीं हैं, ये समाज के लिए एक चेतावनी हैं, जिन्हें सुनकर जागने की जरूरत है।अब या तो मॉडर्न जीवन से पैदा संक्रमण को स्वीकार कीजिए या बच्चों को जन्म से ही मर्यादा में रहकर जीवन जीने के लिए संस्कार दीजिए। (विनायक फीचर्स)


