– उच्च न्यायालय इलाहाबाद में भी मामला दर्ज मामले की सुनवाई शीघ्र
फर्रुखाबाद/नई दिल्ली। जनपद फर्रुखाबाद और राजधानी लखनऊ से प्रकाशित दैनिक यूथ इंडिया के संपादक शरद कटियार ने अपनी सुरक्षा के मामले मे फर्रुखाबाद के विधायक और चचेरे भाई के दवाव मे प्रशासनिक स्तर पर कथित भ्रामक रिपोर्टों को लेकर मामला सीधे भारतीय प्रेस परिषद नई दिल्ली में उठा दिया है।
भारतीय प्रेस परिषद नई दिल्ली मे दर्ज कराये गए मामले मे आरोप लगाया है कि वर्ष 2020 में जीवन-भय के आधार पर उच्च न्यायालय और भारतीय प्रेस परिषद के आदेशों के क्रम मे मिली सुरक्षा को वर्ष 2023 में माफिया तंत्र के दवाव और एक सत्ता के विधायक व उनके भाई के इशारे पर शासन से समुचित जांच के हुए बिना समाप्त कर दिया गया, जबकि पूर्व में परिषद और उच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर ही सुरक्षा प्रदान की गई थी। और जनपति सुरक्षा समिति फर्रुखाबाद द्वारा आयुक्त कानपुर के माध्यम से सुरक्षा संबंधी संस्कृत व्याख्या शासन को भेजी गई थी,जिसे विधायक के दबाव में नजर अंदाज कर दिया गया।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रार्थी पिछले कई वर्षों से जिले में सक्रिय माफिया तंत्र, अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर लगातार खोजी पत्रकारिता उनके अखवार दैनिक यूथ इंडिया मे होतीं रही है । इसी कारण उन्हें और उसके परिवार को लगातार खतरा बना हुआ है।
उन्होंने सबसे गंभीर आरोप जनपदीय सुरक्षा समिति फर्रुखाबाद पर लगाए गए हैं। प्रार्थना पत्र के अनुसार, 2025 और 2026 में प्रस्तुत कई जांच रिपोर्टें आपस में विरोधाभासी और भ्रामक हैं, जिनमें कभी निवास स्थान तो कभी पारिवारिक स्थिति को लेकर गलत तथ्य दर्ज किए गए। एक रिपोर्ट में तो गणपति सुरक्षा समिति के अध्यक्ष डीएम आशुतोष कुमार द्विवेदी सचिव एसपी आरती सिंह और एलआईयू फतेहगढ़ प्रभारी निरीक्षक धर्मराज सिंह द्वारा उनकी जीवित मां श्रीमती निर्मला कटियार पत्नी स्वर्गीय सुधीर मोहन कटियार एडवोकेट को ही मृतक घोषित कर दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव और प्रभावशाली आपराधिक प्रवत्ति के व्यक्तियों के हस्तक्षेप के चलते उसकी सुरक्षा बहाली और बढ़ोतरी की संस्तुतियों को नजर अंदाज किया गया। साथ ही, उसका शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण भी लंबे समय से लंबित है, जिसका नवीनीकरण भी आज तक नहीं हो सका । उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी पर जिले के उनके सजातीय नेताओं ने दबाव बनाकर निष्पक्ष जांच नहीं होने दी। जिलाधिकारी ने उनके मामले में गहनता से पड़ताल कराये बगैर फर्जी जांच आख्याएँ प्रस्तुत करा कर फ़र्ज़ी आधार पर उत्तर प्रदेश शासन और जनपद एवं सत्र न्यायाधीश फर्रुखाबाद को भी भ्रमित किया।
प्रेस परिषद से की गई मांगों में प्रमुख रूप से सुरक्षा सम्बन्धी
पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, और जनपदीय सुरक्षा समिति द्वारा दी गई रिपोर्टों का सत्यापन
पूर्व आदेशों की अवमानना पर जवाब तलब शामिल हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने फर्रुखाबाद में प्रशासनिक पारदर्शिता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय प्रेस परिषद इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
फिलहाल, यह मामला केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
प्रेस परिषद में सुरक्षा मामले मे ‘भ्रामक रिपोर्ट’ का मामला दर्ज


