– ” कहते-कहते भर आईं अखिलेश की आंखें
– यादव परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
– बोले क़ानून और परिवार के मुताबिक अब होगा आगे काम
लखनऊ। अपने प्रिय छोटे भाई प्रतीक यादव की संदेहास्पद आकस्मिक मौत को लेकर भावुक हुए सपा मुखिया और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नम आंखों के बीच भले ही बोला हो लेकिन उनके तेवर तल्ख हैं,उन्होंने साफ कहा कि भाई अपने प्रतीक को बचपन से जानते हैं अब जो कानून और परिवार रहेगा कोई काम होगा।
अस्पताल के बाहर सन्नाटा था, लेकिन भीतर यादव परिवार की बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। सबसे ज्यादा भावुक दिखे अखिलेश यादव। मीडिया से बात करते हुए उनकी आवाज कई बार भर्रा गई। उन्होंने कहा “मैंने प्रतीक को बचपन से देखा है। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, यह बहुत दुखद है। वे आगे बढ़कर काम करना चाहते थे… कानून और परिवार जो कहेगा, हम वही मानेंगे और कानूनी रास्ता अपनाएंगे।”
अखिलेश यादव का यह बयान अब कई मायनों में चर्चा का केंद्र बन गया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि “कानूनी रास्ता अपनाएंगे” जैसी बात इशारा करती है कि परिवार भी मौत के हर पहलू को गंभीरता से देख रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव को उनके साले और एक करीबी दोस्त अस्पताल लेकर पहुंचे थे। बाद में परिवार के सदस्य और करीबी नेता अस्पताल पहुंचे। सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेश चंद्र पांडेय ने पुष्टि की कि प्रतीक यादव को अस्पताल मृत अवस्था में लाया गया था।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया। विक्रांत वीर के नेतृत्व में पुलिस टीम प्रतीक यादव के आवास पहुंची। सूत्रों के अनुसार, जांच के तहत उनके कमरे को सील कर दिया गया है। यह कदम इस मामले को और रहस्यमयी बना रहा है।
गलियारों में अब कई तरह की चर्चाएं तेज हैं,क्या यह सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी थी? क्या प्रतीक लंबे समय से तनाव में थे? क्या कोई ऐसी परिस्थिति थी जिसे परिवार अभी सार्वजनिक नहीं करना चाहता?
इन सवालों के जवाब फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छिपे हैं। बताया जा रहा है कि पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई है और डॉक्टरों का विशेष पैनल गठित किया गया है। हाई प्रोफाइल मामलों में ही आमतौर पर ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाती है।


