
प्रशांत कटियार
देश के करीब 23 लाख छात्रों के सपनों पर एक बार फिर सिस्टम ने बुलडोजर चला दिया। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा 2026 को रद्द कर दिया गया है। लाखों छात्र वर्षों से दिन रात मेहनत कर रहे थे। किसी किसान ने खेत गिरवी रखकर बेटे को कोचिंग भेजा, किसी मां ने गहने बेच दिए, तो किसी पिता ने कर्ज लेकर फीस भरी। लेकिन आखिर में वही हुआ जिसका डर हर मेहनती छात्र को रहता है। पेपर लीक हो गया और पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी।
सबसे हैरानी वाली बात यह है कि सरकार और परीक्षा एजेंसी लगातार दावा करती रहीं कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत है। प्रश्नपत्रों पर विशेष पहचान चिन्ह लगाए गए थे। वाहनों की निगरानी की जा रही थी। परीक्षा केंद्रों पर कैमरे, पहचान जांच और मोबाइल नेटवर्क रोकने वाले उपकरण लगाए गए थे। लेकिन इतने तामझाम के बाद भी अगर प्रश्नपत्र बाजार में बिक गया तो साफ है कि या तो पूरा सिस्टम फेल है या फिर अंदर तक सड़ चुका है।
इस परीक्षा के लिए करीब 22 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था। आवेदन शुल्क भी छात्रों से जमकर वसूला गया। सामान्य वर्ग के छात्रों से लगभग 1700 रुपये लिए गए। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से करीब 1600 रुपये वसूले गए। वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और थर्ड जेंडर अभ्यर्थियों से लगभग 1000 रुपये फीस ली गई। यानी सिर्फ आवेदन शुल्क के नाम पर ही करोड़ों रुपये जमा किए गए। अब छात्र पूछ रहे हैं कि जब सुरक्षा ही नहीं संभाली गई तो आखिर इतनी भारी फीस किस बात की ली गई।
बताया जा रहा है कि इस पूरे रैकेट से जुड़े लोग परीक्षा का प्रश्नपत्र 25 हजार रुपये से लेकर 40 लाख रुपये तक में बेच रहे थे। कहीं “गेस पेपर” के नाम पर सौदे हुए तो कहीं सीधे असली प्रश्नपत्र पहुंचाने की चर्चाएं सामने आईं। यानी गरीब और मेहनती छात्रों की किस्मत बाजार में खुलेआम बोली लगाकर बेची जा रही थी। जिसने लाखों रुपये दिए, उसके लिए रास्ता आसान करने की कोशिश हुई और जिसने ईमानदारी से पढ़ाई की, उसे फिर लाइन में खड़ा कर दिया गया।
यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं का मजाक बन चुका है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा, शिक्षक पात्रता परीक्षा, रेलवे भर्ती, कर्मचारी चयन आयोग, पटवारी भर्ती, लेखपाल भर्ती, वन दरोगा भर्ती और कई दूसरी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो चुके हैं। हर बार सरकारें बड़ी बड़ी बातें करती हैं, लेकिन हर बार माफिया सिस्टम को ठेंगा दिखाकर निकल जाता है।
सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात को लेकर है कि मेहनती छात्र हर बार पिसता है और सेटिंग वाले लोग मलाई काट जाते हैं। गांवों के गरीब बच्चे दिन रात पढ़ाई करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन प्रश्नपत्र माफिया लाखों रुपये लेकर पूरी व्यवस्था को खरीद लेता है। जिन छात्रों ने परीक्षा देकर राहत की सांस ली थी, वे अब फिर से तनाव और डर में जीने को मजबूर हैं।
अब सवाल सिर्फ परीक्षा रद्द होने का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर देश का युवा कब तक सिस्टम की नाकामी की कीमत चुकाता रहेगा। कब तक मेहनत करने वाले छात्र ठगे जाते रहेंगे और कब तक सरकारें सिर्फ जांच बैठाकर अपना पल्ला झाड़ती रहेंगी। क्योंकि अगर इतनी सुरक्षा, कैमरे और निगरानी के बावजूद प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो इसे सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ कहा जाएगा।


