34 C
Lucknow
Friday, May 15, 2026

बड़े भाई का फर्ज निभाते रहे अखिलेश, फिर भी अंतिम फैसलों से रखे गए दूर!

Must read

प्रतीक की अंत्येष्टि के दौरान भी बेटे अर्जुन को साथ ले गए थे बैकुंठ धाम
यूथ इंडिया संवाददाता
लखनऊ। प्रतीक यादव की मौत के बाद सामने आ रहे घटनाक्रम अब लगातार नए सवाल खड़े कर रहे हैं। बुधवार 13 मई को हुए पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों और सैफई परिवार के करीबी लोगों के बीच तीखी चर्चाएं जारी हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि अखिलेश यादव सुबह 7 बजे से बिना खाए-पिए लगातार मौके पर डटे रहे, बड़े भाई की जिम्मेदारी निभाते रहे, लेकिन इसके बावजूद अंतिम फैसलों में उन्हें किनारे रखा गया। जबकि अंत्येष्टि के वक्त भी वह अपने बेटे अर्जुन को मौके पर साथ ले गए थे लेकिन उनके प्रति बेरुखी देखी गईं हालांकि प्रतीक की बेटियों को दुलार उनका चर्चा ए आम रहा।
सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव अपने बेटे अर्जुन यादव, भाई तेजप्रताप यादव और परिवार के अन्य करीबी सदस्यों के साथ सुबह से ही भेजा था । अंकुर यादव को भी करीब एक घंटा पहले ही मौके पर बुला लिया गया था ताकि व्यवस्थाओं में कोई कमी न रहे। सपा मुखिया अखिलेश यादव पूरे समय बड़े भाई का फर्ज निभाते रहे और व्यक्तिगत तौर पर बेहद भावुक स्थिति में थे।
लेकिन इसी बीच चर्चाएं इस बात को लेकर तेज हो गईं कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया में देरी क्यों हुई? अंदरखाने यह कहा जा रहा है कि यदि प्रक्रिया समय पर होती तो सुबह करीब 9 बजे तक पूरा मामला निपट सकता था। आरोप लगाए जा रहे हैं कि अपर्णा यादव की ओर से पोस्टमार्टम प्रक्रिया रुकवाई गई और मौके पर अखिलेश यादव की मौजूदगी बाद भी उनके भाई अमन बिष्ट को ही आगे रखा गया। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसे लेकर चर्चा तेज है।
सबसे बड़ा भावनात्मक सवाल यही उठ रहा है कि क्या अखिलेश यादव, तमाम जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद, इस पूरे घटनाक्रम में पराये बना दिए गए? क्योंकि सुबह से मौजूद रहने और हर व्यवस्था संभालने के बावजूद अंतिम निर्णयों में उनकी भूमिका सीमित दिखाई दी।
उधर इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई ने भी नए सवाल पैदा कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक पुलिस प्रतीक यादव का लैपटॉप और मोबाइल फोन अपने साथ ले गई है। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि जांच एजेंसियां अब डिजिटल एंगल से भी मामले की पड़ताल कर सकती हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मोबाइल और लैपटॉप में ऐसी जानकारियां थीं जो इस पूरे घटनाक्रम पर नई रोशनी डाल सकती हैं?
पहले से ही पोस्टमार्टम, पुराने चोटों के निशान, अस्पताल ले जाने की परिस्थितियां, अंतिम संस्कार और पारिवारिक मतभेदों को लेकर घिरा यह मामला अब और ज्यादा संवेदनशील हो चुका है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि नेताजी मुलायम सिंह यादव के परिवार में एक सदस्य की मौत के बाद भी रिश्तों की दरारें खुलकर सामने आती दिखीं।
हालांकि अब तक पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी साजिश या आपराधिक एंगल की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन लगातार सामने आ रही सूचनाएं, राजनीतिक बयान और पारिवारिक घटनाक्रम इस मौत को रहस्य और विवाद के घेरे में बनाए हुए हैं।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article