यूथ इंडिया संवाददाता
लखनऊ। प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक मंचों तक चर्चा इस बात की हो रही है कि जब पूरा यादव परिवार अंतिम संस्कार में मौजूद था, तब भारतीय परंपरा और संस्कारों के विपरीत जाकर प्रतीक यादव को मुखाग्नि उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने आखिर क्यों दी?
भारतीय संस्कृति में सामान्यत: पुत्र, भाई या परिवार का निकट पुरुष सदस्य मुखाग्नि देता है। ऐसे में समाजवादी परिवार जैसे बड़े राजनीतिक कुनबे की मौजूदगी के बावजूद ससुर द्वारा मुखाग्नि दिए जाने को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई सामाजिक और धार्मिक जानकार इसे असामान्य फैसला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे परिवार का निजी निर्णय मान रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अंतिम संस्कार के दौरान शिवपाल सिंह यादव लगातार परिवार के साथ मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि वह प्रतीक यादव की दोनों बेटियों को अपने साथ लेकर चले और पूरे समय परिवार को संभालते दिखाई दिए। वहीं शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव भी व्यवस्थाओं में लगातार सक्रिय रहे। इससे यह सवाल और गहरा गया कि जब परिवार के इतने करीबी सदस्य मौजूद थे, तब अंतिम संस्कार की सबसे महत्वपूर्ण रस्म ससुर को क्यों निभानी पड़ी?
राजनीतिक और पारिवारिक सूत्रों में चर्चा है कि अपर्णा यादव के भाई अमन बिष्ट ने पहले से ही अंतिम संस्कार की कई व्यवस्थाएं तय कर दी थीं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसी चर्चा ने पूरे घटनाक्रम को और विवादों में ला दिया है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह फैसला परिवार की सामूहिक सहमति से हुआ था या फिर किसी सीमित दायरे में तय किया गया?
इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय पारिवारिक परंपराओं और आधुनिक राजनीतिक परिवारों के बदलते रिश्तों पर भी बहस छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी के समर्थकों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा में है कि नेताजी मुलायम सिंह यादव की विरासत और सैफई परिवार की परंपराओं के बीच ऐसा फैसला आखिर किन परिस्थितियों में लिया गया।
उधर प्रतीक यादव की मौत को लेकर पहले से उठ रहे सवाल पोस्टमार्टम, पुराने चोटों के निशान, अस्पताल ले जाने की परिस्थितियां और जांच की मांग अब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद और गहरे हो गए हैं।
फिलहाल प्रतीक यादव की मौत और अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम अब सिर्फ पारिवारिक मामला नहीं रह गए हैं। हर नई जानकारी के साथ यह मामला और रहस्यमयी होता जा रहा है, जबकि जनता के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है,आखिर पर्दे के पीछे ऐसा क्या हुआ, जिसने परंपराओं तक को बदल दिया?


