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Sunday, May 24, 2026

मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात के राजनीतिक मायने: क्या फिर भाजपा के साथ खड़े होंगे मुन्नू बाबू?

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– 1998 से योगी आदित्यनाथ और चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू के रहे करीबी संबंध, मुलाकात के बाद फर्रुखाबाद की राजनीति में तेज हुई चर्चाएं

यूथ इंडिया | लखनऊ/फर्रुखाबाद

राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व सांसद चन्द्रभूषण सिंह की हालिया मुलाकात ने फर्रुखाबाद की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक भूमिका के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

 

चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी से कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद बने थे। वहीं 1998 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में योगी आदित्यनाथ देश के सबसे युवा सांसद बनकर संसद पहुंचे थे। उस दौर में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंध बेहद घनिष्ठ बताए जाते हैं। दिल्ली स्थित नॉर्थ एवेन्यू आवास परिसर में योगी आदित्यनाथ नीचे के फ्लैट में रहते थे, जबकि मुन्नू बाबू ऊपर के फ्लैट में। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार उस समय संसदीय और संगठनात्मक मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच अक्सर लंबी चर्चा हुआ करती थी।

 

बाद के वर्षों में प्रदेश की राजनीति बदली और वर्ष 2004 में मुन्नू बाबू समाजवादी पार्टी से सांसद बने। हालांकि 2009 में परिसीमन के बाद भोगांव विधानसभा हटने और अलीगंज क्षेत्र जुड़ने से राजनीतिक समीकरण बदल गए। अंदरूनी विरोध और कथित भीतरघात के चलते उन्हें चुनावी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्होंने अपने पुत्र सौरभ सिंह को भोजपुर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया, लेकिन जीत नहीं मिल सकी। इसके बावजूद 2012 से 2017 तक उनका भाजपा से राजनीतिक जुड़ाव बना रहा।

 

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के एक प्रभावशाली वर्ग की इच्छा थी कि फर्रुखाबाद सीट से मुन्नू बाबू को उम्मीदवार बनाया जाए। लेकिन परिस्थितियां अलग रहीं और समाजवादी पार्टी से रमेश्वर यादव मैदान में उतरे। इसके बाद धीरे-धीरे मुन्नू बाबू का समाजवादी पार्टी से मोहभंग बढ़ता गया।

सूत्रों का दावा है कि समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे पीडीए फार्मूले और कथित सवर्ण विरोधी मानसिकता से भी वे असहज रहे। पार्टी की एक बैठक में बसपा से आए नेता सर्वेश अंबेडकर द्वारा कथित तौर पर उनकी राजनीतिक “वोटिंग” किए जाने की घटना ने भी उन्हें गहरा आहत किया। उनके करीबी मानते हैं कि यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक रुख में बदलाव का बड़ा कारण बना।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाने वाले मुन्नू बाबू की मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान विशेष आत्मीयता दिखाई दी। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री मुलाकात के दौरान बेहद सहज और प्रसन्न नजर आए, जबकि हाल के समय में फर्रुखाबाद के कई अन्य नेताओं से मुलाकातों में ऐसा उत्साह नहीं दिखा था।

अब इस मुलाकात के बाद यह कयास और तेज हो गए हैं कि चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू एक बार फिर खुलकर भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक अभियान को मजबूती देते दिखाई पड़ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर इस घटनाक्रम को समाजवादी पार्टी के लिए भी झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिले में सपा के पुराने वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव लगातार कम हुआ है और अब पार्टी काफी हद तक डॉ. नवल किशोर शाक्य जैसे नेताओं के भरोसे दिखाई दे रही है।

फिलहाल मुन्नू बाबू की यह मुलाकात फर्रुखाबाद की राजनीति में आने वाले दिनों के बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

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