– पुलिस की भूमिका संदिग्ध
फर्रुखाबाद। सरकार एक ओर करोड़ों रुपये खर्च कर पौधरोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद में प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की खुलेआम कटान पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। नवाबगंज थाना क्षेत्र के नगला दमू गांव में 130 हरे पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने बाग मालिक और ठेकेदार पर करीब चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया तथा शमसाबाद के फैजबाग स्थित एक आरा मशीन को सील कर दिया। हालांकि इस पूरे मामले में पुलिस और स्थानीय तंत्र की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार रात से लकड़ी माफियाओं ने नगला दमू गांव स्थित सागौन के बाग में अवैध कटान शुरू कर दिया। मंगलवार को 28 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बावजूद कटान नहीं रुका। आरोप है कि कुल 80 सागौन, 20 नीम और 30 यूकेलिप्टस के पेड़ काट दिए गए। इसके बाद लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से लगभग छह किलोमीटर दूर शमसाबाद के फैजबाग स्थित आरा मशीन पर पहुंचाकर रातभर चिरान कराया गया।
हैरानी की बात यह है कि पूरी रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही, कटर मशीनों का शोर और लकड़ी की ढुलाई होती रही, लेकिन न तो स्थानीय पुलिस को इसकी भनक लगी और न ही समय रहते कार्रवाई हुई। मामला उजागर होने के बाद वन विभाग हरकत में आया। वन दरोगा राकेश तिवारी और कायमगंज वन क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया, आरा मशीन पर ताला लगवाया और संबंधित ठेकेदार व बाग मालिक पर करीब चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया।


