शमशाबाद, फर्रुखाबाद।
कायमगंज–फर्रुखाबाद मार्ग पर वर्षों पहले बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय आज भी आम लोगों के लिए राहत का बड़ा साधन बने हुए हैं। कभी एक समय था जब इस मुख्य मार्ग पर यात्रियों के बैठने या रुकने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी। आसपास के गांवों से आने-जाने वाले लोगों को घंटों सड़क किनारे खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता था। सर्दी, गर्मी, बारिश या तेज धूप—हर मौसम में यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था और उन्हें पेड़ों या आसपास की दुकानों का सहारा लेना पड़ता था।
समय के साथ जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं ने इस समस्या को समझा और पहले अस्थायी, फिर स्थायी समाधान के रूप में जगह-जगह यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण कराया। लाखों रुपये की लागत से बने ये प्रतीक्षालय आज भी लोगों को धूप, बारिश और ठंड से राहत प्रदान कर रहे हैं। सुबह-शाम यहां यात्रियों की भीड़ देखी जा सकती है, जो वाहनों का इंतजार करते हुए इन्हीं आश्रयों का उपयोग करते हैं।
विकासखंड शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम नगला नान में ऐतिहासिक चिंतामणि तालाब के निकट बना एक प्रतीक्षालय इसका उदाहरण है, जहां आज भी लोग समय बिताते नजर आते हैं। खास बात यह है कि कुछ स्थानों पर ये प्रतीक्षालय गरीबों के लिए रोजगार का जरिया भी बन गए हैं। कई ग्रामीण यहां अस्थायी दुकानें संचालित कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इसी क्रम में एक ग्रामीण द्वारा प्रतीक्षालय में हेयर सैलून चलाकर रोजी-रोटी कमाने का मामला भी सामने आया है।
हालांकि, इन प्रतीक्षालयों की वर्तमान स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। मार्ग पर कई स्थानों पर बने प्रतीक्षालय अब जर्जर हो चुके हैं। कहीं फर्श टूट चुकी है, तो कहीं बैठने की पट्टियां क्षतिग्रस्त हैं। कुछ प्रतीक्षालय इतने खस्ताहाल हैं कि वहां बैठना भी जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो ये प्रतीक्षालय किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
इसके अलावा, जहां-जहां प्रतीक्षालय बनाए गए थे, वहां पेयजल के लिए हैंडपंप भी लगाए गए थे, लेकिन अधिकांश हैंडपंप अब खराब या जर्जर हालत में हैं। भीषण गर्मी में जहां प्रतीक्षालय छाया तो देते हैं, वहीं पानी की सुविधा न होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और यात्रियों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इन प्रतीक्षालयों की मरम्मत कराई जाए और पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि ये सुविधाएं वास्तव में जनता के लिए उपयोगी साबित हो सकें।
लाखों की लागत से बने यात्री प्रतीक्षालय, कहीं सहारा तो कहीं बदहाली की मिसाल


