हापुड़ में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के कथित शोषण के खिलाफ उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है। महासंघ के जिलाध्यक्ष शरद कुमार गर्ग और महामंत्री योगेंद्र अग्रवाल ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जिलाधिकारी द्वारा अर्वाचीन इंटरनेशनल स्कूल पर शुल्क नियामक समिति के माध्यम से लगाए गए जुर्माने को सराहनीय कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि समस्या केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है।
महासंघ ने आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालय अब भी मनमानी फीस वृद्धि कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन किताबों, स्टेशनरी, कॉपियों, यूनिफॉर्म और अन्य मदों के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की प्रथाएं अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल रही हैं और शिक्षा व्यवस्था को व्यावसायिक बना रही हैं।
ज्ञापन में महासंघ ने यह भी कहा कि वे पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस और व्यापक कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने जिला प्रशासन से एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने की मांग की है, जो विभिन्न निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण करे और अपनी रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपे।
महासंघ ने मांग की है कि इस प्रस्तावित समिति में अभिभावक महासंघ के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रह सके। उनका कहना है कि अभिभावकों की भागीदारी के बिना की गई जांच पर सवाल उठ सकते हैं और वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाएगी।
ज्ञापन में 4 अप्रैल को हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक का भी उल्लेख किया गया, जिसमें जिलाधिकारी ने सभी निजी विद्यालयों को 7 दिनों के भीतर संशोधित फीस स्ट्रक्चर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इस पर डीआईओएस ने बताया कि कुछ स्कूलों ने अपना संशोधित शुल्क विवरण जमा कर दिया है, जबकि शेष विद्यालयों को 25 अप्रैल तक का समय दिया गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि समयसीमा के बाद नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।


