नई दिल्ली। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान से जुड़े इंटरनेट मीडिया हैंडल द्वारा संचालित एक बड़े डीपफेक और दुष्प्रचार अभियान का पर्दाफाश किया है। एजेंसियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे कई फर्जी वीडियो का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाना, छात्रों के बीच भ्रम और असंतोष फैलाना तथा उन्हें आंदोलन के लिए उकसाना है।
खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, इन वीडियो में भ्रामक दावा किया जा रहा है कि हाल में आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ केंद्र सरकार सख्त कार्रवाई करने जा रही है। जांच में सामने आया है कि इस तरह के वीडियो सुनियोजित तरीके से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जा रहे हैं, ताकि छात्रों में भय और आक्रोश का माहौल बनाया जा सके तथा उनका गुस्सा सीधे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की ओर मोड़ा जा सके।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले फर्जी वीडियो के जरिए भारतीय सेना को निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी को केंद्र में रखकर दुष्प्रचार फैलाने की रणनीति अपनाई जा रही है। एजेंसियों का मानना है कि इसका उद्देश्य भारत में अस्थिरता पैदा करना, राजनीतिक माहौल को प्रभावित करना और सामाजिक तनाव बढ़ाना है।
इस बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। दिल्ली सहित बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र सरकारों ने भी छात्रों को इसी प्रकार का आश्वासन दिया है। दिल्ली सरकार ने हाल ही में नीट-यूजी प्रदर्शन से जुड़ी 13 एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
खुफिया एजेंसियों का कहना है कि सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद दुष्प्रचार फैलाने वाले नेटवर्क ने डीपफेक वीडियो और भ्रामक सामग्री का प्रसार और तेज कर दिया। अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान भारत में भ्रम फैलाने के साथ-साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में चल रही आंतरिक समस्याओं से अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाने की कोशिश का भी हिस्सा हो सकता है।


