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Saturday, April 25, 2026
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शरिया कानून लागू करना चाहता था छांगुर गिरोह और मतांतरण रैकेट में अदालत ने तय किए आरोप

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लखनऊ

बलरामपुर समेत आसपास के जिलों में सक्रिय कथित मतांतरण रैकेट पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एटीएस/एनआईए की विशेष अदालत ने जलालुद्दीन उर्फ छांगुर और उसके गिरोह के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह गिरोह लंबे समय से गैर-मुस्लिम लोगों को भय, लालच और प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने में लगा था और इसके तार विदेशों तक जुड़े पाए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि छांगुर गिरोह संगठित तरीके से मतांतरण का नेटवर्क चला रहा था, जिसमें आर्थिक मदद और रणनीतिक समर्थन विदेशों से मिल रहा था। एटीएस की पड़ताल में नेपाल और खाड़ी देशों से जुड़े संदिग्ध लेन-देन और फंडिंग के इनपुट भी सामने आए, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए न केवल अवैध मतांतरण कराया जा रहा था, बल्कि देश की सामाजिक और धार्मिक संरचना को प्रभावित करने की भी कोशिश की जा रही थी।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष 5 जुलाई को यूपी एटीएस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए छांगुर और उसके कई साथियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिनमें संगठित तरीके से लोगों को निशाना बनाकर उन्हें लालच, डर और दबाव के जरिए मतांतरण के लिए मजबूर करने की बात सामने आई।
अदालत में आरोप तय होने के बाद अब मामले की सुनवाई तेज होगी और आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
फिलहाल इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं, ताकि इस तरह के किसी भी नेटवर्क को समय रहते समाप्त किया जा सके।

भाजपा की विभाजनकारी राजनीति से जनता नाराज़: अरविन्द केजरीवाल का दावा स्टालीन फिर बनेंगे सीएम

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चेन्नई

तमिलनाडु की सियासत में चुनावी हलचल के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने डीएमके के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता भाजपा की “विभाजनकारी और कटु राजनीति” को पूरी तरह नकारती है और राज्य में उसकी कोई मजबूत पकड़ नहीं है।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के मूल ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव से दक्षिण भारत के राज्यों के साथ अन्याय होगा और उनकी राजनीतिक भागीदारी कम हो सकती है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालीन की जमकर सराहना की और कहा कि जो भी नेता जनता के लिए अच्छा काम करता है, उसका समर्थन होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक एकता बन रही है, जो आने वाले समय में भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है।
वहीं दिल्ली से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर, आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा को हटाने की याचिका खारिज होने पर केजरीवाल ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही इस पर कोई टिप्पणी करेंगे, क्योंकि उन्होंने अपनी दलीलें पहले ही अदालत में रख दी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर जिस तरह विपक्ष सक्रिय हुआ है, वह आने वाले चुनावों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल तमिलनाडु से उठी यह सियासी आवाज देशभर में नई बहस को जन्म दे रही है।

परिसीमन जोड़ महिला आरक्षण टाल रही सरकार : जयराम रमेश

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नई दिल्ली

देश में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर महिलाओं को आरक्षण देने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सोनिया गांधी और राहुल गाँधी पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग कर चुके थे, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पुराने पत्र साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा था कि लोकसभा में बहुमत का उपयोग कर महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया जाए। उन्होंने यह भी दोहराया कि कांग्रेस हमेशा से इस कानून के समर्थन में रही है और इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानती है।
राहुल गांधी द्वारा लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2010 में राज्यसभा से पारित हो चुका था, लेकिन लोकसभा में लंबित रहने के कारण अब तक लागू नहीं हो सका। राहुल गांधी ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से अपील की थी कि यदि सरकार गंभीर है तो इसे बिना शर्त समर्थन देकर जल्द पारित कराया जाए, अन्यथा देरी से इसका क्रियान्वयन और मुश्किल हो जाएगा।
विपक्षी दलों ने अब मांग उठाई है कि मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर ही महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए और इसके लिए संसद के आगामी सत्र में नया विधेयक लाया जाए। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को परिसीमन से जोड़कर टालने की कोशिश कर रही है, जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिलने में और देरी हो रही है।
दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार का प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। इस बिल में महिला आरक्षण लागू करने के साथ-साथ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव था, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह गिर गया। इसके बाद से ही महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण अब केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन चुका है, जिस पर आने वाले समय में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

चीन से ईरान भेजे जा रहे मिसाइल रसायन

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भारतीय मूल की पूर्व अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा, कार्गो जहाज पर केमिकल होने का शक

एजेंसी

मध्य पूर्व के संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाले एक कंटेनर जहाज को कब्जे में लेकर क्षेत्रीय हालात को और विस्फोटक बना दिया है। दावा किया जा रहा है कि यह जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और इसमें मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े रसायन या डुअल-यूज मटेरियल लदा हो सकता था, जिसका इस्तेमाल सैन्य और औद्योगिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार जहाज को कई बार रुकने का आदेश दिया गया, लेकिन उसने निर्देशों की अनदेखी की। इसके बाद चेतावनी स्वरूप फायरिंग कर जहाज के इंजन को निष्क्रिय किया गया और फिर अमेरिकी बलों ने उस पर चढ़ाई कर उसे जब्त कर लिया। बताया जा रहा है कि जब्त किया गया जहाज “टोस्का” नाम का एक कंटेनर पोत है, जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स समूह से जुड़ा है—एक ऐसी कंपनी जिस पर पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जहाज हाल के हफ्तों में चीन के झुहाई बंदरगाह पर भी देखा गया था, जिससे इस पूरे घटनाक्रम में चीन की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जहां यह दावा किया जा रहा है कि चीन अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के सैन्य ढांचे को मजबूती दे रहा है।
वहीं ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार देते हुए कड़ी निंदा की है। तेहरान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है और इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी की नीति नहीं बदलता, वह किसी भी शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा।
स्थिति की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहाज पर चालक दल के परिवारों की मौजूदगी की भी जानकारी सामने आई है, जिसके चलते ईरान फिलहाल संयम बरतने की बात कर रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती जांच में जहाज पर ऐसे सामान होने के संकेत मिले हैं, जो मिसाइल निर्माण में उपयोग किए जा सकते हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में यह टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है। फिलहाल इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है और पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।

सीजफायर खत्म होने से पहले फिर गरमाया अमेरिका-ईरान विवाद

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ट्रंप की धमकी, तेहरान का पलटवार युद्ध के आसार तेज

वाशिंगटन

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। दो हफ्ते के संघर्ष-विराम (सीजफायर) की अवधि समाप्त होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े तेवर दिखाते हुए चेतावनी दी है कि यदि वार्ता से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला तो बड़े हमले किए जा सकते हैं। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और क्षेत्र में फिर से युद्ध भड़कने की आशंका तेज हो गई है।
वहीं ईरान ने भी अमेरिका के आरोपों और धमकियों का करारा जवाब दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका बातचीत के नाम पर दबाव बनाने की नीति अपना रहा है और वार्ता को ‘समर्पण’ में बदलना चाहता है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने उसके जहाजों को जब्त कर तनाव को और भड़काने का काम किया है, जिससे विश्वास बहाली की प्रक्रिया को झटका लगा है।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान में बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। इस कदम को कूटनीतिक असहमति के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीजफायर समाप्त होने के बाद हालात नहीं सुधरे, तो मध्य पूर्व में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की स्थिति बन सकती है, जिसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा। फिलहाल दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं, जहां से आने वाले फैसले आने वाले दिनों की दिशा तय करेंगे।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप

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विरोध पर युवती से मारपीट

फर्रुखाबाद

जिले के जहानगंज थाना क्षेत्र के ग्राम भड़ौसा में एक युवती ने गांव के ही युवक पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता सावरीन बानो पुत्री सलाउद्दीन गिस्त्री ने आरोप लगाया है कि सलमान अख्तर पुत्र परवेज अख्तर पिछले करीब दो वर्षों से उसे प्रेम जाल में फंसाकर शादी का झांसा देता रहा और इसी बहाने उसके साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता रहा।
पीड़िता के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को आरोपी उसे शादी का भरोसा देकर कमालगंज क्षेत्र के एक होटल में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद वह उसे अपने घर ले आया, लेकिन वहां पहुंचते ही हालात बदल गए। आरोप है कि सलमान अख्तर के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य ताहिर, अतर पुत्र अनीस तथा मैसर बेगम ने युवती के साथ गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की।
युवती ने यह भी आरोप लगाया कि गांव के प्रधान बसरूद्दीन की मौजूदगी में यह मारपीट कराई गई और जब उसके परिजन मौके पर पहुंचे तो उनके साथ भी अभद्रता की गई। मारपीट में पीड़िता के चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी पक्ष दबंग किस्म का है और उसे लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही है, जिससे वह भयभीत है। उसने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव का माहौल है और पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रही है।