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Friday, April 24, 2026
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24 घंटे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 64 IAS अफसरों के तबादले, 25 जिलों के डीएम बदले

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लखनऊ। योगी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए रविवार रात से शुरू हुआ तबादलों का सिलसिला सोमवार को भी जारी रखा। महज 24 घंटे के भीतर कुल 64 आईएएस अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया गया। इसमें 25 जिलों के जिलाधिकारी और कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार के इस कदम को आगामी प्रशासनिक रणनीति और शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।

रविवार देर रात 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए, जिनमें 15 जिलों के डीएम और 5 मुख्य विकास अधिकारी शामिल थे। इसके बाद सोमवार को दूसरे दिन 24 और आईएएस अफसरों के ट्रांसफर किए गए, जिनमें 10 जिलों के डीएम बदले गए।

इन जिलों के नए जिलाधिकारी नियुक्त

सुल्तानपुर – इंद्रजीत सिंह
श्रावस्ती – अन्नपूर्णा गर्ग
बुलंदशहर – कुमार हर्ष
शामली – आलोक यादव
सहारनपुर – अरविंद कुमार चौहान
अमरोहा – नितिन गौड़
हमीरपुर – अभिषेक गोयल
रायबरेली – सरनीत कौर ब्रोका
फतेहपुर – निधि गुप्ता वत्स
उन्नाव – घनश्याम मीणा
लखीमपुर खीरी – अंजमी कुमार सिंह
मैनपुरी – इंद्रमणि त्रिपाठी
औरैया – बृजेश कुमार
आगरा – मनीष बंसल
झांसी – गौरांग राठी

सोमवार को बदले गए प्रमुख डीएम और तैनाती

अविनाश कुमार – गाजीपुर से अलीगढ़
अरविंद सिंह – एटा के डीएम
अमित आसेरी – बांदा के डीएम
डॉ. अंकुर लाठर – फर्रुखाबाद की डीएम
कविता मीना – हापुड़ की डीएम
ईशा प्रिया – अंबेडकरनगर की डीएम
चर्चित गौड़ – सोनभद्र के डीएम
अनुपम शुक्ला – गाजीपुर के डीएम
शशांक त्रिपाठी – अयोध्या के डीएम
ईशान प्रताप सिंह – बाराबंकी के डीएम

अधिकारियों को अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं

निखिल टीकाराम फुंडे – विशेष सचिव, मुख्यमंत्री
प्रेम रंजन सिंह – अपर राज्य परियोजना निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान
अभिषेक पांडेय – अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त
संजीव रंजन – विशेष सचिव, कृषि विभाग
जे. रीभा – विशेष सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म
आशुतोष कुमार द्विवेदी – विशेष सचिव, लोक निर्माण विभाग
बद्रीनाथ सिंह – विशेष सचिव, उच्च शिक्षा
दीक्षा जैन – अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, UPSIDA
डॉ. अपराजिता सिंह – उपाध्यक्ष, बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण
प्रणता ऐश्वर्या – उपाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण
उत्कर्ष द्विवेदी – सीडीओ शाहजहांपुर
अभिनव जे जैन – सीडीओ कानपुर नगर
दीक्षा जोशी – सीडीओ सीतापुर

वरिष्ठ स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां

अरविंद मल्लप्पा बंगारी – विशेष सचिव, मुख्यमंत्री
नितीश कुमार – प्रबंध निदेशक, यूपी पावर कॉर्पोरेशन
श्रुति – प्रबंध निदेशक, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, आगरा
आशुतोष निरंजन – परिवहन आयुक्त
किंजल सिंह – सचिव, माध्यमिक शिक्षा
दुर्गा शक्ति नागपाल – आयुक्त, देवीपाटन मंडल

खास बात

नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम के पति मनीष बंसल को आगरा का डीएम बनाया गया है, जो इस फेरबदल में चर्चित नियुक्ति मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह तबादला सूची अभी अंतिम नहीं है और आने वाले दिनों में और भी आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर संभव हैं। सरकार का फोकस प्रशासनिक कसावट, बेहतर कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों में तेजी लाने पर है।

बोनस के वादे, भरोसे पर सवाल: क्या दुग्ध किसानों के साथ फिर हो रहा है छल?

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विशेष संवाददाता
कानपुर: उत्तर प्रदेश के मध्य और पूर्वी क्षेत्र में दुग्ध खरीद के क्षेत्र में तेजी से सक्रिय हुई एक कम्पनी को लेकर किसानों के बीच असंतोष की चर्चा तेज हो रही है। किसानों का आरोप है कि कम्पनी ने सीधे दूध खरीद शुरू करते समय बोनस, बेहतर भुगतान और दीर्घकालिक लाभ के बड़े वादे किए, लेकिन अब तक उन वादों पर अमल दिखाई नहीं दे रहा। सबसे बड़ा सवाल बोनस भुगतान को लेकर उठ रहा है, जिसे लेकर किसानों में निराशा और नाराज़गी दोनों बढ़ती दिख रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादकों का कहना है कि जब कम्पनी ने शुरुआत की, तब उसे पारंपरिक मॉडल से अलग, किसान हितैषी और अधिक लाभकारी व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया। दावा किया गया कि किसानों को नियमित भुगतान के साथ अतिरिक्त बोनस का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। इन्हीं दावों के आधार पर अनेक किसानों ने कम्पनी से जुड़कर दूध आपूर्ति शुरू की।
अब किसानों के बीच यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि बोनस का वादा किया गया था, तो उसका भुगतान अब तक क्यों नहीं हुआ? क्या यह सिर्फ अधिक से अधिक दूध संग्रह करने की रणनीति थी, या फिर वादों के क्रियान्वयन में कहीं गंभीर खामी है?
किसी भी संस्था की स्थिरता केवल तेजी से विस्तार करने में नहीं, बल्कि उसके प्रबंधन तंत्र, पारदर्शिता, भुगतान अनुशासन और मजबूत टीम पर निर्भर करती है। यदि कोई संस्था केवल बाजार में वर्चस्व की होड़ में किसानों को आकर्षक वादे देकर जोड़ती है, लेकिन बाद में उन्हीं वादों को पूरा नहीं करती, तो यह भरोसे के संकट को जन्म देता है। दुग्ध क्षेत्र में पहले भी ऐसे विवाद सामने आते रहे हैं, जहां बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर ने किसानों को नुकसान पहुंचाया। ऐसे में मौजूदा सवाल केवल एक कम्पनी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दुग्ध खरीद मॉडल की विश्वसनीयता पर बहस खड़ी कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यदि वादा किया गया था तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए—बोनस कब मिलेगा, किन शर्तों पर मिलेगा, और यदि नहीं मिलेगा तो पहले ऐसे दावे क्यों किए गए? किसानों के बीच यह भी मांग उठ रही है कि दुग्ध खरीद से जुड़े वादों और भुगतान व्यवस्था पर नियामक स्तर पर निगरानी बढ़नी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी कम्पनी किसानों के भरोसे के साथ खिलवाड़ न कर सके। यह मामला अब सिर्फ बोनस भुगतान का नहीं, बल्कि दुग्ध उत्पादकों के सम्मान, भरोसे और आर्थिक सुरक्षा का प्रश्न बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्ष इन सवालों का क्या जवाब देते हैं, और किसानों की आशंकाओं का समाधान कैसे निकलता है।

योगी सरकार में बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक ऐतिहासिक सुधार

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स्कूल चलो अभियान से लाखों बच्चों की वापसी, सरकारी स्कूलों पर बढ़ा भरोसा

ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और DBT योजनाओं से शिक्षा व्यवस्था हुई मजबूत

लखनऊ, 20 अप्रैल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग ने व्यापक और ठोस बदलाव दर्ज किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम के रूप में सामने आया है। परिषदीय विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन इसका प्रमाण है। इस वर्ष अप्रैल माह से गतिशील इस अभियान के अंतर्गत 20 अप्रैल तक, यानी मात्र 20 दिनों में ही 8 लाख 79 हजार से अधिक नए बच्चों का नामांकन दर्ज किया जा चुका है, जो परिषदीय शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

योगी सरकार ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा है। अवस्थापना के स्तर पर 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों को ऑपरेशन कायाकल्प से जोड़ा गया। 2017-18 में मात्र 36 प्रतिशत स्कूल ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त थे, जो अब बढ़कर 96.30 प्रतिशत हो गए हैं। 75 जनपदों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। तकनीक, प्रशिक्षण और पोषण योजनाओं के साथ शिक्षा को समग्र रूप से मजबूत किया गया है। स्पष्ट है कि योगी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और परिणाम अब व्यवस्थित रूप में दिख रहे हैं।

नामांकन और मुख्यधारा से जुड़ाव
प्रदेश में स्कूल चलो अभियान और सर्वे आधारित रणनीति ने शिक्षा से दूर बच्चों को जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है। वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 2.69 लाख बच्चों को कक्षा-1 में सीधे प्रवेश दिया गया, जबकि 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से मुख्यधारा में जोड़ा गया। यह प्रयास केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को धरातल पर लागू करने का उदाहरण है। लगातार बढ़ते नामांकन से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।

निःशुल्क सुविधाएं और छात्र हित
सरकार ने आर्थिक बाधाओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया है। प्रतिवर्ष 1.30 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी के लिए ₹1200 प्रति छात्र की सहायता दी जाती है। कक्षा 1 से 8 तक सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और कार्यपुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन उपायों से अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई।

अवस्थापना विकास में बड़ा सुधार
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है। 1.32 लाख से अधिक विद्यालय इस अभियान से आच्छादित हुए हैं। हर विद्यालय में डेस्क-बेंच, शौचालय, पेयजल, बिजली और कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

मॉडल विद्यालयों से नई दिशा
प्रदेश में शिक्षा के नए मानक स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। 75 जनपदों में 150 विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक शिक्षा दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और कुल बजट 4500 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। हर विद्यालय में 1500 से अधिक छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था होगी, जिससे कुल 2.25 लाख विद्यार्थी सीधे लाभान्वित होंगे। साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। यह पहल शिक्षा के मानकों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो रही है।

तकनीक आधारित शिक्षा का विस्तार
शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल संसाधनों का व्यापक उपयोग किया गया है। हजारों विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT (इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब स्थापित की गई हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरित किए गए हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनी है। वर्ष 2024-25 में 4.53 लाख शिक्षकों और शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 2025-26 में 4.33 लाख शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसी क्रम में 1,32,828 परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापित कर उन्हें क्रियाशील बनाया गया है। समग्र शिक्षा और पीएम श्री योजना के तहत 2022-23 से 2024-25 तक कुल 25,954 विद्यालयों को स्मार्ट क्लास से आच्छादित किया गया है। 2025-26 में 5,924 अन्य विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए। इसके साथ ही 880 ब्लॉक संसाधन केंद्रों में आईसीटी लैब स्थापित की जा चुकी हैं तथा 2023-24 और 2024-25 में 5,817 विद्यालयों को आईसीटी लैब से जोड़ा गया है, जबकि 2025-26 में 8,291 विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापना की गई।

बालिका शिक्षा को मजबूती
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत 746 विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें कक्षा 6 से 12 तक उच्चीकृत किया गया है। इनमें 87,647 बालिकाएं नामांकित हैं। स्मार्ट क्लास, ICT लैब, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से बालिकाओं का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षा, बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

समावेशी शिक्षा और सामाजिक न्याय
दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 29, 241 बच्चों को और 2025-26 में 25,397 बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए। इसके साथ ही सहायक उपकरण, एस्कॉर्ट अलाउंस और छात्रवृत्ति DBT के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। इससे हर बच्चे को शिक्षा के दायरे में लाने का प्रयास सफल होता दिख रहा है।

पीएम श्री योजना और आरटीई के तहत अवसर
पीएम श्री योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,722 विद्यालयों को आच्छादित किया गया है, जहां स्मार्ट क्लास, ICT लैब और खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वहीं आरटीई के तहत 2024-25 में 1.65 लाख और 2025-26 में 1.85 लाख बच्चों को निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश दिलाया गया है। इससे वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिला है।

नवाचार, शोध और संस्थागत विकास
एससीईआरटी के माध्यम से ‘शोध संगम’ पत्रिका का प्रकाशन किया गया है और 210 शोध कार्य पूरे किए गए हैं। ई-ग्रंथ और डिजिटल पोर्टल विकसित किए गए हैं। 27 डायट संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह पहल शिक्षा प्रणाली को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में अहम है।

पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा
पीएम पोषण योजना के तहत 1.42 लाख विद्यालयों में 1.52 करोड़ विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। साप्ताहिक दूध और फल वितरण से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ है। 3.63 लाख रसोइयों को ₹2000 प्रतिमाह मानदेय साल में 10 महीने दिया जा रहा है। इसमें से 93 प्रतिशत रसोइयां महिलाएं हैं। उन्हें आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़ा गया है। इससे योजना का प्रभाव और व्यापक हुआ है।

कर्मियों के हित में बड़ा निर्णय
सरकार ने शिक्षा कर्मियों के मनोबल को भी प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि कर दी गई है। अब शिक्षामित्रों को ₹18,000 और अनुदेशकों को ₹17,000 प्रतिमाह मिलेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले नौ वर्षों में संरचना, गुणवत्ता, तकनीक और समावेशन चारों स्तर पर व्यापक परिवर्तन देखा है। योजनाओं का दायरा बढ़ा है, क्रियान्वयन मजबूत हुआ है और परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। यह बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि स्कूलों, कक्षाओं और बच्चों के भविष्य में नजर आ रहा है। यही बदलाव प्रदेश की नई पीढ़ी के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

दीवानी परिसर की पार्किंग में भीषण आग, पांच कारें जलीं; कूड़े से उठी चिंगारी पर शक

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आगरा
दीवानी परिसर की पार्किंग में सोमवार दोपहर उस समय अफरातफरी मच गई जब अचानक एक के बाद एक पांच कारों में आग लग गई। घटना के बाद परिसर में मौजूद वादकारियों और अधिवक्ताओं में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, और लोग अपने वाहनों को सुरक्षित निकालने के लिए जल्दबाजी करते नजर आए।

आग की शुरुआत गेट नंबर एक के पास पार्किंग क्षेत्र में खड़ी एक कार से हुई, जिसके बाद लपटें तेजी से फैलती हुई पास में खड़ी अन्य कारों तक पहुंच गईं। देखते ही देखते पांच वाहन आग की चपेट में आ गए, जिनमें से एक कार पूरी तरह जलकर खाक हो गई। सुरक्षाकर्मियों ने शुरुआती स्तर पर आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता बढ़ने के कारण प्रयास नाकाफी साबित हुए।

घटना के दौरान परिसर में लगभग आधे घंटे तक अफरातफरी की स्थिति बनी रही। लोगों ने अपने स्तर पर वाहनों को धक्का देकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश की। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह पार्किंग क्षेत्र में पड़े कूड़े के ढेर से उठी चिंगारी मानी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि किसी ने जलती हुई बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली कूड़े में फेंक दी, जिससे आग भड़क गई और पास खड़ी गाड़ियों तक पहुंच गई।

इस घटना ने परिसर की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं और वादकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कूड़े की सफाई और निगरानी व्यवस्था बेहतर होती, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था।

फिलहाल प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है और आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।

25अप्रैल से शुरू होगी ‘परशुरामपुरी क्रिकेट लीग (सीजन-1)’

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जलालाबाद क्षेत्र में क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। आगामी 24 अप्रैल 2026 से ‘परशुरामपुरी क्रिकेट लीग (सीजन-1)’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस टूर्नामेंट में क्षेत्र की विभिन्न टीमें हिस्सा लेंगी, जिससे रोमांचक मुकाबलों की उम्मीद जताई जा रही है।
आयोजन समिति के अनुसार, प्रतियोगिता में विजेता टीम को ₹51,000 का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जबकि उपविजेता (रनर-अप) टीम को ₹21,000 की धनराशि दी जाएगी। इसके साथ ही खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को सम्मानित करने के लिए मैन ऑफ द सीरीज और मैन ऑफ द मैच जैसे आकर्षक पुरस्कार भी रखे गए हैं।
टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए टीमों की एंट्री फीस ₹5,100 निर्धारित की गई है। आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता को सफल और निष्पक्ष बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
आयोजन का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करना और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना है। आयोजकों ने सभी खेल प्रेमियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करें।
संपर्क सूत्र:
रजत शर्मा – 9935310668
विपिन सिंह – 9120068105
टूर्नामेंट को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और इसे एक बड़े खेल आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।

शाहजहांपुर को मिली 47 करोड़ की सौगात, राज्य मंत्री परिवहन एवं वित्त मंत्री ने 4 बड़ी परियोजनाओं का किया लोकार्पण

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अहमदपुर नियाजपुर में बना आधुनिक सैटेलाइट बस अड्डा, कई शहरों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव: नए सेटेलाइट बस अड्डे से यात्रियों को मिलेगी बेहतर सुविधा

 

शाहजहांपुर 20 अप्रैल। उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एवं उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री परिवहन विभाग (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के कर कमलों द्वारा बटन दबाकर 47 करोड रुपए की लागत से 04 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। मंत्री ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर बस अड्डे से बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जनपद शाहजहाँपुर में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के पूर्व निर्मित बस स्टेशन का सौन्दर्याकरण का कार्य (लागत- 1894.83 लाख रुपए का लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर जी सैटेलाईट बस अड्डा के निर्माण कार्य (लागत- 1248.51 लाख रुपए का कार्यशाला का निर्माण कार्य (लागत- 1059.53 लाख रुपए का) डिटेन्शन/डम्पिंग यार्ड के निर्माण कार्य (लागत- 239.44 लाख रुपए का माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश शासन प्रेरणा से नया सैटेलाइट बस स्टैंड अहमदपुर नियाजपुर में लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। नवनिर्मित सैटेलाइट बस अड्डे का नाम महान समाजसेवी एवं आदर्श शासक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के सम्मान में रखा गया है।

परिवहन मंत्री ने परियोजनाओं का लोकार्पण करते हुए प्रसन्नता व्यक्ति की। उन्होंने कहा कि शाहजहाँपुर में लंबे समय से एक सुव्यवस्थित बस अड्डे की आवश्यकता थी। पुराना बस अड्डा अत्यधिक भीड़भाड़ एवं संकरे क्षेत्र में स्थित होने के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए इस सैटेलाइट बस अड्डे का निर्माण कराया गया है। उन्होंने बताया कि इस नए बस अड्डे के माध्यम से शाहजहाँपुर को बरेली, लखनऊ, सीतापुर एवं दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों से सुगमता से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि कांट,पुवाया, तिलहर में बस अड्डे, डंपिंग यार्ड का कार्य एवं जनपद स्तर पर ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं रिसर्च सेंटर निर्माण कराया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि 47 करोड रुपए की लागत से चार परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ है यह एक जिले के लिए बहुत बड़ी सौगात है। उन्होंने कहा कि इस बस अड्डे के निर्माण से चारों तरफ कनेक्टिविटी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर आज बस अड्डा बनाया गया है, वहां पहले अत्यंत खराब स्थिति थी। वह क्षेत्र एक बड़े गड्ढे के रूप में था, जहां जलभराव की समस्या बनी रहती थी। लगभग छह से आठ महीने की कठिन मेहनत के बाद भूमि को उपयोग योग्य बनाया गया, जिसके पश्चात इस आधुनिक बस अड्डे का निर्माण संभव हो सका। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि स्वच्छता की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस बस अड्डे से शाहजहाँपुर की कनेक्टिविटी लखनऊ, लखीमपुर, हरदोई एवं बरेली से और बेहतर होगी। साथ ही उन्होंने दयाशंकर सिंह का आभार व्यक्त करते हुए उनके सहयोग की सराहना की।

वित्त मंत्री ने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शाहजहाँपुर के विकास हेतु लगभग 350 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बरेली मोड़ से सुभाष नगर होते हुए रिंग रोड तक सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है। शहर के सौंदर्यीकरण हेतु सड़कों के किनारे पट्टी विकसित की गई है जिस पर अतिक्रमण न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़कों पर अतिक्रमण न करने से सड़कों को चौड़ा एवं व्यवस्थित बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि शहर में 1500 लोगों की क्षमता वाला एक आधुनिक ऑडिटोरियम भी बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लगभग 403 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का निर्माण कार्य प्रस्तावित/प्रगति पर है, जो शाहजहाँपुर से होकर गुजरेगी और क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगी।

उन्होंने यह भी बताया कि आगामी 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भारत लगभग 86 प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करता था, किन्तु अब एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में पेट्रोल में लगभग 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाया जा रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और एथनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए लगभग 130 करोड़ रुपये की सब्सिडी स्वीकृत की गई है, जो नवंबर तक प्राप्त हो चुकी है। हाइब्रिड वाहनों के पंजीकरण में भी छूट दी जा रही है। इन पहलों से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बहुआयामी रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

सांसद लोकसभा अरुण कुमार सागर एवं राज्यसभा सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया एवं महापौर नगर निगम अर्चना वर्मा ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित कर जनपद के विकास के बारे में बताया।

इस अवसर पर जिला पंचायत ममता यादव, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी डॉ अपराजिता सिंह, जिला अध्यक्ष केसी मिश्रा, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष डीसीएस राठौर, महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता, नगर आयुक्त सौम्या गुरु रानी अपर नगर आयुक्त एसके सिंह, आरएम रोडवेज रमेश कुमार एवं एआरएम अरुण कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।