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Friday, April 24, 2026
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बस हादसा: खाई में गिरी बस से 21 की मौत, 60 से अधिक घायल, पीएम मोदी ने किया 2 लाख रुपये मुआवजे का एलान

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उधमपुर/नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। रामनगर-उधमपुर मार्ग पर कघोट गांव के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर करीब 70 से 80 फीट गहरी खाई में गिर गई, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक यात्री घायल हो गए। हादसा सुबह करीब 9:40 बजे हुआ, जब तेज रफ्तार बस मोड़ पर चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के समय बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और छात्र भी शामिल थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए। सूचना मिलते ही पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को खाई से निकालकर एंबुलेंस के जरिए जीएमसी उधमपुर पहुंचाया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है।

प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। घायलों ने भी बताया कि बस में कई यात्री खड़े थे, जिससे संतुलन बिगड़ने पर हादसा और गंभीर हो गया। प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की है। वहीं, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी दुख जताते हुए गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट कर बेहतर इलाज मुहैया कराने की बात कही है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन को प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में राहत और बचाव कार्य जारी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

बंगाल चुनाव में उबाल: फ्लाइट देरी पर भड़कीं ममता बनर्जी

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अधिकारियों को दी नसीहत—भाजपा के लोग चले जाएंगे, आपको यहीं रहना है

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को केंद्रीय एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनावी माहौल में अपनी यात्रा में बाधा डालने का दावा किया। कोलकाता के बेलेघाटा में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी फ्लाइट को रनवे पर करीब आधे घंटे तक रोककर रखा गया, जिससे उनके कार्यक्रम प्रभावित हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक महीने से उन्हें रेलवे और विमानन विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय जानबूझकर उनकी आवाजाही में अड़चनें पैदा की जा रही हैं। ममता बनर्जी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्रियों को यात्रा के दौरान प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो रहा है।
अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का उदाहरण भी दिया। ममता ने दावा किया कि झाड़ग्राम में हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को भी करीब 40 मिनट तक रोका गया था। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करार देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े करती हैं।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में विमानन विभाग के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को भूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल आते-जाते रहते हैं, लेकिन अधिकारियों को जनता और राज्य के साथ ही रहना होता है, इसलिए उन्हें निष्पक्षता के साथ काम करना चाहिए।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने सोमवार को बीरभूम के मुरारई, उत्तर 24 परगना के खरदह और कोलकाता के बेलियाघाटा में चुनावी रैलियां कीं। हालांकि, उनके इन आरोपों पर विमानन अधिकारियों की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ईरान तनाव के बीच व्हाइट हाउस का ‘लॉक्ड-इन मोड’ पोस्ट, ट्रंप के संदेश से बढ़ीं अटकलें

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वॉशिंगटन। ईरान को लेकर बढ़ते तनाव और बैकचैनल बातचीत की अटकलों के बीच व्हाइट हाउस की एक पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय सियासत में हलचल तेज कर दी है। सोमवार को व्हाइट हाउस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक तस्वीर साझा करते हुए “लॉक्ड-इन मोड: एक्टिवेटेड, इट्स मंडे, नो एक्सक्यूज, जस्ट विन” का संदेश जारी किया, जिसे मौजूदा हालात में एक सामान्य प्रेरक पंक्ति के बजाय कड़े रणनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील समय में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि अमेरिका किसी निर्णायक रणनीति की ओर बढ़ रहा है। ईरान के साथ जारी तनाव और वार्ता की अनिश्चित स्थिति के बीच यह संदेश संकेत देता है कि वॉशिंगटन अब दबाव की नीति को और तेज कर सकता है या किसी बड़े कदम की तैयारी में है।
इस पोस्ट के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। क्या अमेरिका ईरान पर और कड़ा रुख अपनाने जा रहा है? क्या यह बातचीत की मेज पर तेहरान को लाने के लिए आखिरी दबाव की रणनीति है, या फिर किसी संभावित कार्रवाई का संकेत? हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक सैन्य कदम की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन व्हाइट हाउस का यह संदेश मौजूदा परिस्थितियों में बेहद अहम माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, “लॉक्ड-इन मोड” का अर्थ पूरी तरह तैयार और फोकस्ड स्थिति से है, जबकि “नो एक्सक्यूज, जस्ट विन” यह दर्शाता है कि अमेरिका अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाक सक्रिय

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इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री से की अहम बातचीत

एजेंसी: एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ती नजर आ रही हैं। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई टेलीफोन वार्ता में क्षेत्रीय हालात और युद्ध को रोकने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा हुई। रूस ने ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा संघर्षविराम को बनाए रखने पर जोर देते हुए शांति बहाली के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत बताई। इस दौरान ईरान ने रूस को भरोसा दिलाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से रूसी जहाजों और कार्गो की आवाजाही निर्बाध बनी रहेगी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ईरानी जनता को अमेरिकी नीतियों पर गहरा अविश्वास है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान को दबाव में लाकर झुकाना चाहता है, लेकिन ईरान किसी भी परिस्थिति में आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध जारी है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान भी मध्यस्थ की भूमिका में सक्रिय हो गया है। संकेत मिल रहे हैं कि अगले 24 से 48 घंटों में ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच सकता है, जहां अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। चर्चा का मुख्य मुद्दा ईरान का संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम रह सकता है, जिस पर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है।

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भी ईरानी विदेश मंत्री से बातचीत कर क्षेत्रीय शांति के लिए संवाद बनाए रखने पर जोर दिया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर से की गई बातचीत भी चर्चा में है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई।


 

सपा का बड़ा चुनावी ऐलान: 300 यूनिट मुफ्त बिजली और महिलाओं को सालाना 40 हजार पेंशन देने का वादा

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगामी चुनावों को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि प्रदेश में समाजवादी सरकार बनने पर हर उपभोक्ता को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सालाना 40 हजार रुपये पेंशन देने की योजना लागू की जाएगी। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता को परेशान किया जा रहा है और बिजली बिलों में अनियमितताएं बढ़ी हैं।

प्रदेश सपा मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था जनता के लिए राहत नहीं बल्कि परेशानी का कारण बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब समझ चुकी है कि बढ़े हुए बिजली बिलों के पीछे भ्रष्टाचार और अव्यवस्था जिम्मेदार है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।

सपा अध्यक्ष ने 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी कार्यकर्ताओं को तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम को दोहराते हुए अधिक से अधिक सीटें जीतनी हैं और प्रदेश में बदलाव लाना है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह समाजवादी विचारधारा को बदनाम करने के लिए निराधार आरोप लगाती है और मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नए-नए कथानक गढ़ती है, लेकिन जनता अब इन बातों में आने वाली नहीं है।

भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार नकली विरोध की घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण मजबूर युवा ऐसे कार्यों में शामिल हो रहे हैं, जिनका राजनीतिक लाभ उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जाता है और फिर उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान सपा अध्यक्ष से बिहार के मुजफ्फरपुर से मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह तक स्केटिंग करते हुए यात्रा पर निकले युवाओं—मो. तौहीद रजा, मो. साजिद, मो. अमीरुल और मो. अली—ने भी मुलाकात की। अखिलेश यादव ने युवाओं के इस साहसिक प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

यूपी में 24 घंटे का प्रशासनिक भूचाल: 64 आईएएस तबादले, सुधार की आंधी या सत्ता की सर्जिकल स्ट्राइक?

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यूपी में 24 घंटे का प्रशासनिक भूचाल: 64 आईएएस तबादले, 25 जिलों की बदली कमान

– सुधार की आंधी या सत्ता की सर्जिकल स्ट्राइक?

– शरद कटियार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्ता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक मशीनरी को झकझोरने में उसे देर नहीं लगती। महज 24 घंटे के भीतर 64 आईएएस अधिकारियों के तबादले और 25 जिलों के जिलाधिकारियों की कुर्सी बदल देना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सियासी-प्रशासनिक संदेश है—“काम करो या हटो”। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब प्रदेश में कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं की गति और भ्रष्टाचार पर सवाल लगातार उठ रहे थे।

रविवार देर रात 40 आईएएस अधिकारियों की सूची जारी होती है और सोमवार को 24 और नाम जोड़ दिए जाते हैं। यह केवल तबादला नहीं, बल्कि एक तरह की प्रशासनिक सर्जरी है जिसमें उन जिलों को खासतौर पर टारगेट किया गया जहां शिकायतें, भ्रष्टाचार या विकास कार्यों में सुस्ती की रिपोर्ट लगातार शासन तक पहुंच रही थी। आंकड़ों पर गौर करें तो कुल तबादलों में करीब 39% यानी 25 जिले सीधे तौर पर प्रभावित हुए—यह किसी भी राज्य के लिए एक बड़ा प्रशासनिक रिसेट माना जाता है।

सबसे ज्यादा चर्चा में वे जिले हैं जहां लंबे समय से शिकायतों का अंबार था। फर्रुखाबाद जैसे जिले में नए डीएम के रूप में डॉ. अंकुर लाठर की तैनाती यह संकेत देती है कि शासन यहां प्रशासनिक सख्ती चाहता है। वहीं अयोध्या, आगरा, रायबरेली, सहारनपुर और लखीमपुर खीरी जैसे संवेदनशील जिलों में डीएम बदलना सिर्फ रूटीन नहीं बल्कि रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। खासकर आगरा में मनीष बंसल की तैनाती—जो नोएडा की डीएम मेधा रूपम के पति हैं—ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चा को और गर्म कर दिया है। यह नियुक्ति योग्यता आधारित है या नेटवर्क आधारित, इस पर बहस तेज हो चुकी है।

अगर गहराई से देखा जाए तो यह फेरबदल तीन बड़े संकेत देता है। पहला—सरकार आने वाले समय में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। दूसरा—2027 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक ढांचा अभी से कसने की तैयारी है। और तीसरा—जिन जिलों में कानून-व्यवस्था या राजस्व से जुड़ी शिकायतें अधिक हैं, वहां “परफॉर्मेंस बेस्ड पोस्टिंग” का प्रयोग किया जा रहा है।

वरिष्ठ स्तर पर भी बदलाव कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। विशेष सचिव से लेकर मंडल आयुक्त और पावर कॉर्पोरेशन जैसे अहम विभागों में नई तैनातियां बताती हैं कि सरकार सिर्फ जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शासन ढांचे को री-इंजीनियर कर रही है। दुर्गा शक्ति नागपाल को देवीपाटन मंडल का आयुक्त बनाना और किंजल सिंह को माध्यमिक शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी देना, ऐसे फैसले हैं जो सीधे तौर पर विकास और शासन की दिशा तय करेंगे।

लेकिन बड़ा सवाल यही है,क्या सिर्फ तबादलों से व्यवस्था सुधर जाएगी? पिछले आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में हर साल औसतन 200 से अधिक आईएएस अधिकारियों के तबादले होते हैं। इसके बावजूद भ्रष्टाचार, धीमी परियोजनाएं और प्रशासनिक लापरवाही की शिकायतें खत्म नहीं हुईं। यानी समस्या सिर्फ चेहरों की नहीं, सिस्टम की भी है।

कई जिलों में वहां बीते एक साल में विकास परियोजनाओं की प्रगति 60% से कम रही और जन शिकायतों का निस्तारण औसतन 45% के आसपास अटका रहा। ऐसे में यह बदलाव एक जरूरी झटका जरूर है, लेकिन अगर मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय नहीं हुई तो यह भी सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा।

यह भी साफ है कि सरकार ने संदेश दे दिया है—अब फाइलों की गति, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सिर्फ नारा नहीं रहेगा। आने वाले महीनों में यह देखा जाएगा कि नए डीएम और अफसर अपने जिलों में कितना बदलाव ला पाते हैं या फिर यह फेरबदल भी पुराने पैटर्न का हिस्सा बनकर रह जाता है।फिलहाल उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में हलचल है, कुर्सियां बदल चुकी हैं, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है—जमीन पर काम की।