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Saturday, March 7, 2026
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जुर्म सम्राट दुर्दांत माफिया अनुपम दुबे ने अपनों पर ही ढाया कहर

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सगे चाचा को 21 गोलियां मार किया था मौत के हवाले, चचेरे भाई के खीचें थे नाखून

यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जुर्म और जरायम की दुनिया का दो दसक तक बेताज बादशाह रहा यूपी का टॉप १० माफिया अनुपम दुबे जीवन भर सर्वाधिक अपने ही सजातीयों पर कहर बरपाता रहा। कभी उसने अपने गैंग और भाईयों के साथ सगे चाचा और चाची को ताबडतोड़ गोलियों से भून मौत के घाट उतारा तो कभी उसने अपनी सगी चचेरी बहनों को घर से बेदखल कर दिया। कभी चचेरे भाईयों के बर्बरता पूर्वक नाखून खींच उन्हें अपने खौफ के मायाजाल में भयजदा किया तो कभी गरीब शर्मा बंधुओं को गोलियों से भून मौत के घाट उतारा।
जुर्म की दुनिया का भयाभय चेहरा अनुपम दुबे केवल मार-काट का चेहरा ही नही रहा उसने अपने पडोसियों और कई सजातीयों के घरों की बेटियों के हाथों में मेहदी नही सजने दी। अपने पैत्रक गांव में तो किसी बेटी को हवस का ऐसा शिकार बनाया कि अपने घर की दीबार तोडकर उसका घर ही खुद में मिला लिया और पूरी जवानी उसके हाथ पीले नही होने दिये।
माफिया अनुपम दुबे सीएम योगी की जीरो टालरेंस कार्यवाही में करीब ८२ संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमों और ठेकेदार समीम हत्याकांड में मुख्य आरोपी करार होने के बाद मथुरा की जेल में आजीवन कारावासा की सजा भुगत रहा है तो हाल ही में उसके अपराध के साथी रहे सगे भाई अनुराग दुबे डब्बन और ब्लाक प्रमुख अमित दुबे बब्बन सहित उनके गैंग के ११ बदमाश भी गैगस्टर एक्ट में सलाखों के पीछे हैं।
कोतवाली फतेहगढ़ के समीप माफिया अनुपम दुबे ने अपने भाईयों के दम पर अधिवक्ता रहे संजय मिश्रा के बेशकीमती मकान को न केवल कब्जा किया बल्कि उन्हें सपरिवार जिला छोडने पर मजबूर कर दिया। छिवरामऊ जनपद कन्नौज के चचेरे भाई ऋषभ दुबे पर बर्वर हमले किये यहां तक कि उसके नाखून तक खींचकर उसे अधमरा कर दिया था। जिसका आजतक कोई सुराग नही लगा। सगे चाचा कौशल किशोर दुबे व चाची $कृष्णा दुबे की बर्वता पूर्वक हत्या की। फतेहगढ़ के चर्चित वकील राजीव बाजपेई पर कचहरी प्रांगण में ही कई बार जानलेवा हमले कराये। चलती ट्रेन से पुलिस इंस्पेक्टर को हत्या कर फेंक देने जैसे सनसनीखेज रिकार्ड भी बनाये।
माफिया और उसके गैंग के खौफ के कारण पीडितों ने खुलकर शिकायतें नही की थी।
कन्नौज, फर्रूखाबाद, मैनपुरी अंचल में वर्षो से चर्चित इस गैंग ने सरकारी गैर सरकारी जमीनों पर ताबडतोड कब्जे किये। पडोसी जनपद कन्नौज के थाना सौरिख क्षेत्र में चपुन्ना स्थित करोड़ों की सरकारी जमीन फर्जी अभिलेखों में चढ़वाकर अपने रिश्तेदार धर्मेन्द्र त्रिपाठी उसकी बहू नेहा त्रिपाठी संग गैंग बनाकर कानून व्यवस्था को तार-तार किया।
फतेहगढ़ डबल मर्डर में आज भी बुजुर्ग पिता सदमें में
फतेहगढ़ कोतवाली के निकट गरीब पान विक्रेता के बेटे रज्जन शर्मा और बिन्नू शर्मा को बर्वरता पूर्वक गोलियों से माफिया अनुपम दुबे ने न केवल भून मौत के घाट उतारा था। बल्कि उस दर्ज मुकदमें में फाइनल रिपोर्ट भी अपने प्रभाव के चलते लगवा ली थी। आज तक यही नही पता लगा कि उन दोनों ब्राम्हण समाज के उभरते युवाओं को माफिया के भाईयों ने नही तो किसने मौत के घाट उतारा। छिवरामऊ के अंकित दीक्षित को मौत के घाट उतारा। फतेहगढ के राजीव मिश्रा की जमीन कब्जा कर ली। अपने साथी नॉन प्रक्टिशनर वकील भोलेपुर निवासी अवधेश मिश्रा के जरिए न जाने कितने सजातीयों को झूठे मुकदमों में फंसवाकर उनका आर्थिक शोषण कराया। अपने गैंग के जरिए न जाने कितनी जमीनों पर कब्जे किये।
सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए सेल गठित
शासन प्रशासन ने माफिया पर कार्यवाही करते हुए उसके गैंग पर शिकंजा कसा है। वहीं सोशल मीडिया पर उसके समर्थन और माहौल बनाने वालों के लिए निगरानी मीडिया सेल का गठन किया है।

माफिया अनुपम दुबे की बढ़ी मुश्किलें, 21 साल पुराने दोहरे हत्याकांड की जांच दोबारा शुरू

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सगे चाचा की बेटी राधिका की सरकार ने की सुनवाई, चाचा कौशल किशोर और चाची कृष्णा देवी की गोलियों से भून की थी निर्मम हत्या
यूथ इंडिया संवाददाता
मैनपुरी, फर्रुखाबाद। पडोसी जनपद मैनपुरी के वेवर थाना स्थित गांव नवीगंज में वर्ष २००५ में हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में पुर्नविवेचना के आदेश दिये गये है। अदालत के निर्देश के बाद पुलिस के आलाधिकारियों ने दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू करने की स्वीकृति दे दी है। यह फैसला मृतक दंपत्ति की बेटी राधिका पत्नी सौरभ मिश्रा की गुहार के बाद हुआ है।
घटना ६ अगस्त २००५ की है जब नवीगंज निवासी और माफिया अनुपम दुबे पुत्र स्व० महेश चन्द्र के सगे चाचा कौशल किशोर दुबे और उनकी पत्नी कृष्णा देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात में माफिया अनुपम दुबे उसके भाई अनुराग दुबे डब्बन साथी कर्नलगंज कोतवाली फतेहगढ निवासी बॉबी जाटव गांव सासापुर निवासी सरोज शर्मा, नरेन्द्र काली व दन्नाहार मैनपुरी निवासी लालू पाण्डेय को अभियुक्त बनाया गया था। घटना के बाद पुलिस ने जांच की और माफिया अनुपम दुबे के प्रभाव के कारण साक्ष्य न मिलने का हवाला देते हुए ५ फरवरी २००६ में न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
करीब १९ वर्ष बाद मृतक कौशल किशोर दुबे की बेटी राधिका पत्नी सौरभ मिश्रा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और पुन: जांच की मांग की। उसने दलील दी कि घटना के समय वह व उसके भाई बहन नावालिग थे। इसलिए पहले न्याय के लिए संघर्ष नही कर सके अब वयस्क होने पर उसने मामले को फिर से उठाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मैनपुरी कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुर्नविवेचना की अनुमति दे दी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध कभी समाप्त नही होता और सत्य की खोज के लिए जांच अधिकारी स्वतंत्र है। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस अधीक्षक मैनपुरी ने पुर्न: विवेचना की औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब नये सिरे से साक्ष्य जुटाने, पुराने गवाहों के वयान दर्ज करने और तकनीकि तथ्यों की समीक्षा की जायेगी।
पीडित परिवार को न्याय की उम्मीद जगने के बाद उनका कहना है कि इतने वर्षो बाद भी उन्हें न्याय की आस थी। पुन: जांच शुरू होने से उम्मीद जगी है कि सच्चाई सामने आयेगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
गैगस्टर एक्ट में बंद डब्बन, जल्द बी वारंट
गैगस्टर एक्ट में इन दिनों माफिया अनुपम दुबे का अपराधी भाई अनुराग दुबे डब्बन फतेहगढ जेल में बंद है। सगे चाचा चाची की हत्या के मुकदमें में पुर्न: विवेचना के आदेश के बाद पुलिस द्वारा बी वारंट लिया जाना तय है। इसके बाद माफिया और उसके भाईयों की मुश्किलें बढऩी तय है। इसके अलावा माफिया के बाहर घूम रहे गैंग पर भी कड़ी कार्यवाही के लिए पुलिस ताना बाना बुन रही है। माफिया के पैरोकारों पर शासन की फर्रूखाबाद से लेकर मैनपुरी तक नजर है। दिवंगत कौशाल किशोर दुबे के बेटे सीतू दुबे ने बताया कि उन्हें व परिवार को माफिया गैंग से लगातार खतरा है।

पदोन्नति व अधिष्ठान परिवर्तन की मांग को लेकर एमओसीएच चिकित्सकों का सत्याग्रह शुरू

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कन्नौज। प्रदेश के अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य (एमओसीएच) ने पदोन्नति एवं अधिष्ठान परिवर्तन की मांग को लेकर सत्याग्रह शुरू कर दिया है। इसी क्रम में जनपद कन्नौज में भी चिकित्सकों ने काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. देवदत्त राजपूत ने बताया कि एमओसीएच की नियुक्ति आयुर्वेद विभाग से की गई थी, जबकि वर्तमान में वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्य कर रहे हैं। इस विसंगति के कारण उनकी पदोन्नति बाधित हो रही है और सेवा संबंधी लाभ प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश संगठन की ओर से कई बार शासन स्तर पर ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
चिकित्सकों का कहना है कि यदि अधिष्ठान परिवर्तन और पदोन्नति की मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश संघ के निर्देशानुसार आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
सत्याग्रह के दौरान डॉ. अमित, डॉ. कुलदीप, डॉ. चित्रा, डॉ. कृष्णकांत और डॉ. अर्पणा सहित अन्य चिकित्सकों ने समर्थन देते हुए काला फीता बांधकर कार्य किया और शासन से शीघ्र समाधान की मांग की।

युवक ने संदिग्ध परिस्थितियों में दी जान, पीछे छूटा रोता-बिलखता परिवार

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फर्रुखाबाद। जनपद के थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम लखनपुर में बुधवार देर रात उस समय कोहराम मच गया जब 22 वर्षीय युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में घर में मिला। घटना की सूचना मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम लखनपुर निवासी अंकित (22) पुत्र बालकिशन जाटव मंडी समिति की एक आढ़त पर काम करता था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। अंकित अपने पीछे पत्नी रूबी, ढाई वर्ष पूर्व विवाहिता, 9 माह की मासूम बेटी सिद्धि सहित बड़ा परिवार छोड़ गया है। मृतक के परिवार में छोटे भाई-बहन शिवम (18), सुरजीत (17), सुशांत (16), इशू (12) और बहन ईशा (8) भी हैं। घटना के बाद पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों के अनुसार अंकित की शादी लगभग ढाई वर्ष पहले राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव कुसमापुर निवासी रूबी के साथ हुई थी। दंपति के बीच अक्सर घरेलू विवाद होता रहता था। बताया गया कि मंगलवार को किसी बात को लेकर कहासुनी होने के बाद पत्नी रूबी अपनी 9 माह की बेटी सिद्धि को लेकर मायके चली गई थी। बुधवार को ससुराल पक्ष के लोग उसे वापस लाने के लिए गए थे।
इसी बीच अंकित बुधवार देर शाम अपने पिता के साथ काकरनगर भगौतीपुर में आयोजित एक 13वीं की दावत में शामिल होने गया था। परिजनों का कहना है कि दावत से लौटने के बाद वह सामान्य दिख रहा था, लेकिन देर रात उसने यह कदम क्यों उठाया, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। सुबह जब परिजनों ने उसे कमरे में संदिग्ध अवस्था में देखा तो चीख-पुकार मच गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक पूछताछ की। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।
घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। मासूम बच्ची सिद्धि के सिर से पिता का साया उठ जाने से हर किसी की आंखें नम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घरेलू विवादों को समय रहते सुलझा लिया जाए तो ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सकता है।

सुपर-8 में आज भारत-वेस्टइंडीज का वर्चुअल नॉकआउट, जीतने वाली टीम पहुंचेगी सेमीफाइनल

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नई दिल्ली| कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन में होगा। यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति लेकर आया है। जो भी टीम यह मैच जीतेगी, वह सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश कर लेगी।
ग्रुप-1 की अंक तालिका में वेस्टइंडीज बेहतर नेट रन रेट के आधार पर फिलहाल दूसरे स्थान पर है। भारत यदि इस मुकाबले में कैरेबियाई टीम को पराजित कर देता है तो उसके चार अंक हो जाएंगे और वह दूसरे स्थान पर रहकर अंतिम-4 में जगह बना लेगा। ऐसे में यह मुकाबला किसी क्वार्टर फाइनल से कम नहीं माना जा रहा है।
टी20 विश्व कप के इतिहास में भारत और वेस्टइंडीज के बीच अब तक चार मुकाबले हुए हैं, जिनमें से तीन में टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा है। उसे इस टूर्नामेंट में कैरेबियाई टीम के खिलाफ केवल एक जीत मिली है। हालांकि दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 30 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले गए हैं, जिनमें 19 मुकाबले भारत ने जीते हैं, जबकि 10 में वेस्टइंडीज को सफलता मिली है। एक मैच बेनतीजा रहा। भारतीय सरजमीं पर दोनों के बीच 13 मुकाबलों में से 8 भारत और 5 वेस्टइंडीज ने जीते हैं।
सुपर-8 चरण में वेस्टइंडीज की अफ्रीकी टीम से हार और भारत की जिम्बाब्वे पर जीत के बाद यह मैच निर्णायक बन गया है। मुकाबले की विजेता टीम 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे सेमीफाइनल में खेलेगी। अब निगाहें इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी हैं, जहां दोनों टीमें सेमीफाइनल का टिकट हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी।

एलओसी पर फिर ड्रोन की घुसपैठ, सेना ने की फायरिंग

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जम्मू| रविवार तड़के जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर भारतीय सीमा में घुसे एक पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय सेना ने फायरिंग कर खदेड़ दिया। ड्रोन कुछ देर तक दिगवार इलाके में मंडराता रहा और बाद में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की ओर लौट गया।
जानकारी के अनुसार सुबह करीब 6 बजकर 10 मिनट पर सेना के जवानों ने संदिग्ध ड्रोन की गतिविधि देखी। इसके बाद उसे मार गिराने के लिए एक दर्जन से अधिक राउंड फायर किए गए। हालांकि ड्रोन गोलियों से बच निकला और सीमा पार वापस लौट गया।
यह पिछले तीन दिनों में दूसरी बार है जब पुंछ सेक्टर में सीमा पार से ड्रोन गतिविधि देखी गई है। इससे पहले 27 फरवरी को भी इसी क्षेत्र में पाकिस्तानी ड्रोन पर गोलीबारी की गई थी।
घटना के बाद सेना ने पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ड्रोन द्वारा किसी प्रकार के हथियार, गोला-बारूद या नशीले पदार्थों की एयरड्रॉपिंग तो नहीं की गई। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और सीमा क्षेत्र में निगरानी और कड़ी कर दी गई है।