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Monday, April 20, 2026
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नोएडा हिंसा के बाद बड़ा एक्शन, 10 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द; 42 और ब्लैकलिस्ट होने की कगार पर

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गौतम बुद्ध नगर

नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद प्रशासन और श्रम विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए ठेकेदारों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। श्रमिकों के शोषण, वेतन में देरी और श्रम कानूनों के उल्लंघन की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने अब तक 10 ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं, जबकि 42 अन्य ठेकेदारों को नोटिस जारी कर ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
श्रम विभाग की जांच में सामने आया है कि कई ठेकेदार न्यूनतम वेतन अधिनियम का पालन नहीं कर रहे थे और श्रमिकों को तय मानकों से कम भुगतान किया जा रहा था। इसके अलावा ओवरटाइम का भुगतान नहीं करना, पीएफ और ईएसआईसी जैसी अनिवार्य सुविधाओं में अनियमितता और समय पर वेतन न देना भी प्रमुख शिकायतों में शामिल रहा। विभाग के अनुसार, अब तक कुल 245 ठेकेदारों को लाइसेंस निरस्तीकरण और ब्लैकलिस्टिंग के नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
अधिकारियों का कहना है कि श्रमिकों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन ठेकेदारों पर आरोप सिद्ध होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में उन्हें किसी भी सरकारी या निजी परियोजना में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
श्रम विभाग ने अन्य कंपनियों और फैक्ट्रियों में कार्यरत ठेकेदारों की भी जांच शुरू कर दी है, ताकि ऐसे मामलों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
इस कार्रवाई को नोएडा में श्रमिकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं, प्रशासन ने श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के शोषण या अनियमितता की शिकायत सीधे विभाग से करें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

ईरानी कार्रवाई से 14 जहाज रोके गए, भारतीय पोत पर फायरिंग, वैश्विक तेल सप्लाई पर मंडराया संकट

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तेहरान

पश्चिम एशिया के बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) द्वारा भारत आ रहे मालवाहक जहाजों के एक बड़े काफिले को रोकने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, ओमान के उत्तर-पूर्व में केशम और लारक द्वीपों के बीच यह घटना उस समय हुई जब 14 जहाजों का काफिला अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान ईरानी गनबोट्स ने अचानक उन्हें घेर लिया और बिना किसी चेतावनी के दो जहाजों पर फायरिंग कर दी, जिसमें एक भारतीय तेल टैंकर का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया।
घटना के बाद हालात तेजी से बिगड़े और सुरक्षा कारणों से काफिले में शामिल 13 जहाजों को अपना सफर बीच में ही रोककर फारस की खाड़ी के सुरक्षित क्षेत्रों की ओर लौटना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए कच्चा तेल लेकर आ रहा एक भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ने में सफल रहा। बाकी जहाज फिलहाल लारक द्वीप के दक्षिणी हिस्से में फंसे हुए हैं, जहां स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि रोके गए जहाजों में से सात भारतीय ध्वज वाले हैं, जबकि अन्य जहाज लाइबेरिया, मार्शल आइलैंड्स और वियतनाम से संबंधित हैं। इन जहाजों में कच्चा तेल, एलपीजी गैस और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण संसाधन लदे हुए हैं, जिनकी आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजार पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय के माध्यम से ईरान से संपर्क साधा है और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा संभावित युद्धविराम की समाप्ति के मद्देनजर यह घटना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस संवेदनशील क्षेत्र में विकसित हो रही परिस्थितियों और कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई हैं।

आर्मी डे पर ईरान का सख्त संदेश: सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई बोले सेना बने ‘बिजली की तरह वार करने वाली ताकत’, युद्ध अभी खत्म नहीं

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नासिक

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच मोजतबा खामेनेई ने आर्मी डे के अवसर पर देश की सेना को लेकर कड़ा और रणनीतिक संदेश दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने हाल ही में समाप्त हुए 40 दिन के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दुश्मनों के खिलाफ मजबूती से मोर्चा संभाला और उन्हें करारा जवाब दिया। सुप्रीम लीडर बनने के बाद यह उनका पहला आर्मी डे संबोधन था, जिसे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपने भाषण में खामेनेई ने सेना की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि ईरानी सेना “बिजली की तरह तेज और घातक हमला करने” की ताकत हासिल करे। उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मनों की रणनीति कमजोर है और ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण और रणनीतिक विस्तार के लिए नए कदम उठाए जाएंगे।
सुप्रीम लीडर ने विशेष रूप से ड्रोन तकनीक, मिसाइल क्षमता और नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ईरान की रक्षा व्यवस्था अब पहले से कहीं ज्यादा सशक्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देश के ड्रोन सिस्टम दुश्मनों पर सटीक और तेज हमले करने में सक्षम हैं, जबकि नौसेना किसी भी समुद्री चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह भी संकेत दिया गया कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में और निवेश व विस्तार किया जाएगा।
अपने संबोधन में उन्होंने हालिया युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों और सैन्य अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके बलिदान ने ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है। खामेनेई ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध भले ही फिलहाल युद्धविराम के साथ थमा हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। उन्होंने सेना को सतर्क रहने और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान न केवल ईरान की आंतरिक सैन्य नीति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सख्त संदेश देता है कि ईरान आने वाले समय में किसी भी चुनौती का जवाब और अधिक ताकत के साथ देने की तैयारी में है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

‘मैं जिंदा हूं’ कहकर तहसील पहुंचा युवक, भाई पर संपत्ति हड़पने और लेखपाल पर मिलीभगत का गंभीर आरोप

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मैनपुरी

जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर उसकी पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप लगा है। यह मामला तहसील क्षेत्र के गांव धोबई का है, जहां निवासी हेमराज ने खुद तहसील पहुंचकर अधिकारियों के सामने गुहार लगाई और कहा कि “मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मुझे मृत दिखा दिया गया है।”
हेमराज ने एसडीएम सुनिष्ठा सिंह के समक्ष प्रस्तुत होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उसने बताया कि उसके पिता रामेश्वर दयाल की मृत्यु के बाद संपत्ति का बंटवारा होना था, लेकिन उसके भाई रामू ने कथित रूप से लेखपाल के साथ मिलीभगत कर उसे रिकॉर्ड में मृत दिखवा दिया। इसके बाद पूरी संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है और मोटी रकम लेकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया है।
पीड़ित का कहना है कि जब उसे इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो वह हैरान रह गया। उसने कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन सुनवाई न होने पर मजबूर होकर तहसील पहुंचा और उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग की। उसने प्रशासन से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उसकी संपत्ति उसे वापस दिलाई जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सुनिष्ठा सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी किए और प्रकरण को तहसीलदार को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुए अन्याय को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत न हो तो किस तरह से किसी को कागजों में “मृत” दिखाकर उसकी संपत्ति पर कब्जा किया जा सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आने और पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद है।

करोड़ों की सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा उजागर, डीएम ने दिए जांच के आदेश; प्रशासन में मचा हड़कंप

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औरैया

जनपद में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सदर तहसील क्षेत्र के ककराही गांव में धान व दाल मिल संचालित करने के नाम पर करोड़ों रुपये की कीमती सरकारी जमीन पर कब्जा किए जाने की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित जमीन को कब्जाने के लिए पुराने दस्तावेजों का सहारा लिया गया। बताया जा रहा है कि वर्ष 1971 में एक इकरारनामा तैयार किया गया था, जबकि इसके आधार पर वर्ष 1988 में कथित रूप से आदेश जारी कर जमीन को निजी उपयोग में दर्शा दिया गया। प्रशासन को आशंका है कि इस पूरी प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी भूमि को निजी संपत्ति में बदलने की कोशिश की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, ककराही गांव में जिस भूमि पर धान और दाल मिल संचालित होने का दावा किया गया है, उसकी वास्तविक स्थिति और स्वामित्व को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब पुराने रिकॉर्ड, अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कर सच्चाई सामने लाने में जुटा है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जनपद में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करते हुए जमीन को मुक्त कराया जाएगा और जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाएगा। फिलहाल इस पूरे प्रकरण की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

फौजी के बंद मकान को चोरों ने बनाया निशाना, लाखों के जेवरात पार; पुलिस जांच में जुटी

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औरैया

जनपद के अजीतमल क्षेत्र में चोरी की एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां चोरों ने एक फौजी के बंद पड़े मकान को निशाना बनाकर लाखों रुपये के जेवरात पार कर दिए। घटना से इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार, अनंतराम कस्बे के मोहल्ला गांधी नगर, बिजली घर के पास स्थित निवासी अनिल सेंगर का मकान लंबे समय से बंद पड़ा था। अनिल सेंगर भारतीय सेना में तैनात हैं और वर्तमान में उनकी पोस्टिंग प्रयागराज में है। बच्चों की पढ़ाई के चलते उनकी पत्नी कानपुर में रहती हैं, जिससे मकान खाली रहता था। इसी का फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया।
बताया जा रहा है कि गांव बबाइन निवासी अनिल सेंगर के छोटे भाई मोनू सेंगर किसी कार्य से अजीतमल स्थित मकान पहुंचे, जहां उन्होंने घर का ताला टूटा देखा। अंदर जाकर देखा तो अलमारी और बक्सों के ताले टूटे हुए थे और उनमें रखा कीमती जेवरात गायब था। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ भी की और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी लेने का प्रयास किया। पीड़ित परिवार का कहना है कि घर में रखे लाखों रुपये के जेवरात चोरी हुए हैं, हालांकि पूरी चोरी की सूची परिवार के अन्य सदस्यों के आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
कोतवाली प्रभारी ललितेश नारायण त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि चोरों का सुराग लगाया जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर खाली पड़े मकानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि घर खाली छोड़ने की स्थिति में पड़ोसियों को सूचना दें और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करें, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।