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Thursday, February 12, 2026
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अज्ञात वाहन की टक्कर से पैदल जा रहे युवक की मौत

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अमृतपुर, फर्रुखाबाद । थाना राजेपुर क्षेत्र में स्थित गांव गांधी के सामने 25 वर्षीय युवक पैदल जा रहा था। तभी पीछे से आए अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई ग्रामीणों के द्वारा पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पाकर थाना अध्यक्ष योगेंद्र सिंह सोलंकी मौके पर पहुंचे। घायल युवक को 108 एंबुलेंस के द्वारा डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल भिजवाया गया ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नवनीत कुमार ने युवक को मृत घोषित कर दिया गया।
थाना अध्यक्ष राजपुर योगेंद्र सोलंकी ने बताया कि युवक की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है अज्ञात वाहन मौके से भागने में सफल रहा। लेकिन उप निरीक्षक शिशुपाल के द्वारा मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है तहरीर मिलने के बाद विधि कार्रवाई की जाएगी

जलभराव के चलते कच्चा मार्ग गड्ढों में तब्दील, स्थानीय लोगों ने की मार्ग निर्माण की मांग

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यूथ इंडिया संवाददाता
शमशाबाद, फर्रुखाबाद। नगर के काजी टोला मोहल्ले से शेरवानी टोला तक जाने वाले कच्चे मार्ग की दयनीय स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों ने नगर पंचायत कार्यालय शमशाबाद के अधिशाषी अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा। जलभराव के कारण यह मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुका है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
मोहल्ला काजी टोला के निवासियों, जिनमें जहीर खां, सुभाष चंद्र, अनिल कुमार, नरेश चंद्र, जितेंद्र सिंह, राहुल, भजनलाल, विजय सिंह, महेंद्र सिंह, आकाश और ताहिर खां शामिल हैं, ने अधिशाषी अधिकारी से इस मार्ग के निर्माण की मांग की। शिकायती पत्र में उन्होंने बताया कि कच्चा मार्ग जलभराव के कारण बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे वाहन चालकों और स्कूली छात्राओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस कच्चे मार्ग से गुजरते समय कई बाइक सवार दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। आए दिन हो रही इन दुर्घटनाओं से लोगों की जान खतरे में है। इससे पहले भी स्थानीय लोगों ने इस मार्ग के निर्माण की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि यदि इस खस्ताहाल मार्ग का निर्माण कराया जाता है, तो स्थानीय निवासियों और स्कूली बच्चों को बड़ी राहत मिल सकती है। जनहित को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर से नगर पंचायत कार्यालय शमशाबाद के अधिशाषी अधिकारी से इस मार्ग के शीघ्र निर्माण की अपील की गई है।

गंगा और रामगंगा नदी के जलस्तर पर बाढ़ की चेतावनी

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते फर्रुखाबाद जिले की नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सिंचाई खंड-फर्रुखाबाद द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है।
गंगा नदी का जलस्तर लोहिया सेतु (पंचाल घाट) पर शनिवार सुबह 8:00 बजे तक *136.60 मीटर* रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान *137.10 मीटर* से केवल 0.50 मीटर नीचे है। वहीं, शाम 4:00 बजे तक जलस्तर और बढक़र खतरे के निशान के और करीब पहुंच सकता है।
रामगंगा नदी का जलस्तर *बह्मदत्त द्विवेदी सेतु (रामगंगा)* पर सुबह 8:00 बजे तक *134.85 मीटर* मापा गया, जो खतरे के निशान *137.10 मीटर* से 2.25 मीटर नीचे है। लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है, जो आगामी समय में बाढ़ का कारण बन सकता है।
नदियों के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। संभावित बाढ़ के खतरों को ध्यान में रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सतर्क रहें और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
नरोरा स्कीम से 96287 क्यूसेक पानी गंगा नदी में छोड़ा गया है,जिससे गंगा के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। वहीं, रामगंगा नदी में 5948 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके अलावा, खो बैराज से 3416 क्यूसेक, हरेली बैराज से 228 क्यूसेक, और रामनगर बैराज

मुस्लिम वक़्फ़ बोर्ड संशोधन बिल: राजनीतिक भूचाल, अधिकारों की गुहार, और धर्म की आड़ में लड़ाई

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शरद कटियार
1976 और 2005 में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिम वक़्फ़ बोर्ड की समस्याओं को हल करने के उद्देश्य से एनडीए सरकार ने मुस्लिम वक़्फ़ बोर्ड संशोधन बिल संसद में पेश किया है। इस बिल को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। एनडीए सरकार वक़्फ़ बोर्ड के कमजोर प्रबंधन और भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए वक़्फ़ एक्ट की धारा 14 और 19 में संशोधन की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष इस बिल को वक़्फ़ संपत्तियों को हड़पने की साजिश के रूप में देख रहा है। इस विवाद के बीच, सरकार ने बढ़ते विरोध के कारण बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का फैसला किया है। अब देखना यह होगा कि जेपीसी इस विवादास्पद बिल के बारे में क्या निर्णय लेती है।

जेपीसी कमेटी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से आठ, कांग्रेस से तीन, और समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड समेत अन्य विपक्षी पार्टियों से एक-एक सदस्य शामिल किए गए हैं।

सरकार का पक्ष

एनडीए सरकार वक़्फ़ बोर्ड पर मौजूदा कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नए संशोधित बिल को लागू करने की पुरजोर कोशिश कर रही है। सरकार ने तिरुपपुर में 216 लोगों की 93 संपत्तियों, तिरुचिरापल्ली में 1500 साल पुराने मंदिर, तिरुपेंथूरेई मंदिर की 369 एकड़ जमीन और सूरत म्युनिसिपल काउंसिल मुख्यालय पर वक़्फ़ बोर्ड के दावों को सामने रखते हुए वक़्फ़ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

इसके साथ ही, सरकार का तर्क है कि मौजूदा वक़्फ़ बोर्ड में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता, जबकि नए बिल में दो महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की गई है। सरकार का कहना है कि वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों पर अनियमितता और अवैध खरीद-बिक्री के कई मामले सामने आए हैं, जिनका समाधान आज तक नहीं हुआ है। सरकार ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वक़्फ़ की संपत्तियों का प्रबंधन ठीक से नहीं हुआ, जिसके कारण गरीब और पिछड़े मुस्लिम समाज को उनके अधिकार से वंचित होना पड़ा।

सच्चर कमेटी ने यह भी पाया कि वक़्फ़ की 14.9 लाख संपत्तियों से केवल 162 करोड़ रुपये की आय हो रही है, जो कि बहुत कम है। इसके अलावा, सरकार का कहना है कि सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल और स्टेट वक़्फ़ बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी आवश्यक है, और वक़्फ़ बोर्ड के प्रतिनिधियों का दायरा भी बढ़ाना चाहिए।

मौजूदा वक़्फ़ बोर्ड की व्यवस्था

वर्तमान में वक़्फ़ बोर्ड में महिलाओं की कोई भागीदारी नहीं है। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी वक़्फ़ कमिश्नर होते हैं, और हर राज्य में राज्य वक़्फ़ बोर्ड का गठन होता है। वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष का चुनाव हर तीन साल में होता है, जिसमें दो सांसद और दो विधायक सरकार के नामित सदस्य होते हैं। सरकारी अधिकारी वक़्फ़ बोर्ड के सीईओ के रूप में कार्य करते हैं।

मौजूदा वक़्फ़ बोर्ड के अधिकार

वक़्फ़ बोर्ड को किसी भी संपत्ति पर दावा करने का असीमित अधिकार है। विवाद की स्थिति में दूसरे पक्ष को अपना अधिकार साबित करना होता है, और वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।

नए बिल में प्रस्तावित संशोधन

नए संशोधित बिल में वक़्फ़ की संपत्तियों का सरकारी मूल्यांकन और राजस्व की जांच, सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल और स्टेट वक़्फ़ बोर्ड में दो महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी, वक़्फ़ एक्ट की धारा 14 और 19 में बदलाव, और वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील का प्रावधान शामिल हैं।

इस बिल को लेकर देशभर में सियासत गरमाई हुई है। सत्ता और विपक्ष के बीच यह संघर्ष केवल कानून और व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुस्लिम समाज के हकों और उनके भविष्य को लेकर भी एक बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है। अब इस बिल का क्या हश्र होगा, यह आने वाले समय में जेपीसी की सिफारिशों और संसद की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

समकालीन भारत: विकास और चुनौतियों का द्वंद्व

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शरद कटियार
आज का भारत एक ऐसा देश है जो विकास की तेज़ रफ्तार पर सवार है, लेकिन इसी के साथ, कई चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर विचार करते समय, यह स्पष्ट होता है कि देश के विकास की धारा में कई बाधाएँ हैं, जिनसे निपटना अत्यंत आवश्यक है।
वर्तमान समय में, आर्थिक क्षेत्र में सुधार की ओर बढ़ते हुए, भारत को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई, बेरोजगारी, और आर्थिक असमानता जैसी समस्याएँ आम नागरिकों को प्रभावित कर रही हैं। युवा वर्ग, जो देश का भविष्य है, रोजगार के अभाव में संघर्ष कर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार देने के लिए, नौकरियों के सृजन पर अधिक ध्यान देना होगा। इसके अलावा, कौशल विकास के माध्यम से युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना समय की मांग है।
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंताओं को जन्म दिया है। बढ़ती हुई गर्मी, बाढ़, सूखा, और अन्य प्राकृतिक आपदाएँ देश के विभिन्न हिस्सों में सामान्य जीवन को प्रभावित कर रही हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। देश को नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए और प्रदूषण को कम करने के लिए सख्त नीतियों को लागू करना चाहिए।
भारत की विविधता उसकी ताकत है, लेकिन यही विविधता सामाजिक सौहार्द के मुद्दे पर चुनौती भी बन सकती है। धर्म और जाति के आधार पर समाज में बढ़ते तनाव को देखते हुए, एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। सरकार और समाज दोनों को इस दिशा में काम करना होगा कि सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखा जा सके।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में, हाल के वर्षों में कई सुधार हुए हैं, लेकिन अब भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और शिक्षा के स्तर को सुधारने की आवश्यकता है। सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही इन क्षेत्रों में सुधार ला सकता है।

न्यायिक प्रणाली की गति और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी ध्यान देना आवश्यक है। भ्रष्टाचार, जो समाज के हर हिस्से में फैला हुआ है, देश के विकास को बाधित कर रहा है। न्यायिक सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है।
(लेखक यूथ इंडिया के ग्रुप एडिटर हैं) अपनी राय दें youthindianews@gmail.com

जिले की कानून व्यवस्था को लेकर एसपी आलोक प्रियदर्शी की सख्ती, हर कोने पर चौकसी

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जिले की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एसपी आलोक प्रियदर्शी ने अपनी निगरानी को और सख्त कर दिया है। उनके नेतृत्व में पुलिस प्रशासन ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
एसपी आलोक प्रियदर्शी ने कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नए आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत, जिले के सभी प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा, विभिन्न इलाकों में रात्री गश्त बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
एसपी की कार्यशैली
सख्त निगरानी: एसपी आलोक प्रियदर्शी ने जिले के हर कोने पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया है। पुलिस बल को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल रिपोर्ट करें और त्वरित कार्रवाई करें।
आंकड़ों का विश्लेषण: एसपी प्रियदर्शी ने अपराध के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया है। इसके आधार पर, उन्होंने अपराध की उच्च दर वाले क्षेत्रों में विशेष पुलिस तैनाती की योजना बनाई है।
सामुदायिक सहभागिता: एसपी ने स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए अभियान चलाए हैं। ग्राम प्रधानों और स्थानीय नेताओं से नियमित संवाद कर सुरक्षा की स्थिति को मजबूत किया जा रहा है।
प्रशिक्षण और निगरानी: पुलिसकर्मियों को नई तकनीकों और तरीकों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही, उच्च अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है।
पुलिस गश्त: जिले में रात्री गश्त की संख्या 30त्न बढ़ाई गई है।
संदिग्ध गतिविधियों की जांच: पिछले महीने में 100 से अधिक संदिग्ध मामलों की जांच की गई है।
सामुदायिक बैठकें: एसपी ने पिछले महीने 15 से अधिक सामुदायिक बैठकें की हैं।
एसपी आलोक प्रियदर्शी की इस सख्त निगरानी और कार्यशैली ने जिले में सुरक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों के चलते अपराध दर में कमी आई है और नागरिकों के बीच सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।
जिले के लोग अब एसपी प्रियदर्शी की सख्ती को लेकर आश्वस्त हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी मेहनत से जिले की कानून व्यवस्था और भी बेहतर होगी।