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Saturday, April 11, 2026
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प्राथमिक विद्यालय की छत से गिरा प्लास्टर, बाल-बाल बचे दर्जनों बच्चे

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शमसाबाद। ब्लॉक क्षेत्र के गांव बघऊ स्थित प्राथमिक विद्यालय में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब अचानक बरामदे की छत का प्लास्टर गिर गया। इस घटना में कक्षा 1 और कक्षा 4 के लगभग 32 छात्र-छात्राएं बाल-बाल बच गए, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और शिक्षकों में हड़कंप फैल गया।

विद्यालय में उस समय कुल 56 बच्चे उपस्थित थे। दोपहर करीब 12:30 बजे, जब शिक्षक कक्षा 1 के 17 और कक्षा 4 के 15 बच्चों को बरामदे में टाट पट्टी पर बैठाकर पढ़ा रहे थे, तभी छत का एक हिस्सा अचानक गिर गया। गनीमत रही कि कोई बच्चा उस दौरान छत के नीचे नहीं था, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

घटना के बाद शिक्षकों ने तत्काल सभी बच्चों को बरामदे से हटाकर परिसर में सुरक्षित स्थान पर भेजा और उच्च अधिकारियों को जानकारी दी। प्रधानाध्यापिका पुष्पा देवी, दो सहायक अध्यापक और दो शिक्षामित्र मौके पर उपस्थित थे।

खंड शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी मिल चुकी है। किसी छात्र के घायल होने की सूचना नहीं है। छत से प्लास्टर गिरने की तकनीकी जांच करवाई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों ने विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर चिंता जताई है और अधिकारियों से तत्काल मरम्मत कराए जाने की मांग की है। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विद्यालय प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अपर जिला अधिकारी व अपर पुलिस अधीक्षक ने सुनी जनता की समस्याएं

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मौके पर कुल आय 58 प्रार्थना पत्र 6 का मौके पर निस्तारण, शिक्षामित्र विद्यालय में तैनाती के बावजूद भी देने आया प्रार्थना पत्र कार्रवाई के निर्देश

अमृतपुर फर्रुखाबाद: शासन की मंशा के अनुरूप जन-जन को न्याय दिलाने के लिए तहसील संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया समाधान दिवस पर कुल 58 प्रार्थना पत्र आए।

जिसमें शिवचरण पुत्र मदन लाल निवासी ज्ञानपुर ने मिट्टी पर चकमार्ग डलवाने को लेकर शिकायत की नगला केवल निवासी रामवीर ने तालाब की भूमि पर कब्जा हटाने के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया माधुरी पत्नी सुनील निवासी दहेलिया ने दबंग द्वारा जमीन पर कब्जा हटवा कर पुनः कब्जा दिलवाने के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया युसूफ खां निवासी दौलतपुर चकई ने सार्वजनिक आबादी की जगह से अवैध निर्माण हटवाने को लेकर प्रार्थना पत्र दिया।

मौके पर अपर जिला अधिकारी अरुण कुमार पारिवारिक लाभ की शिकायत लेकर आई महिला को त्वरित न्याय दिलाया वही अनीता पत्नी मेघनाथ जो राशन कार्ड की समस्या लेकर आई थी।

उस पर भी जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए वहीं मौके पर उप जिला अधिकारी अतुल कुमार सिंह प्रभारी तहसीलदार अभिषेक कुमार सिंह सीएचसी प्रभारी डा प्रमित राजपूत व अन्य कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।

जर्जर प्राथमिक विद्यालय भवनों में पढ़ाई या दुर्घटना की प्रतीक्षा?

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जब किसी देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों की शिक्षा जान जोखिम में डालकर हो रही हो, तो यह सवाल उठाना लाज़मी है — क्या हम बच्चों को शिक्षा देने या हादसों की ओर धकेलने की व्यवस्था चला रहे हैं? उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद अंतर्गत शमसाबाद ब्लॉक के गांव बघऊ स्थित प्राथमिक विद्यालय में हुई छत गिरने की घटना ने एक बार फिर सरकारी विद्यालयों की बदहाली, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर कर दिया है।

शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे जब कक्षा 1 और कक्षा 4 के बच्चे बरामदे में पढ़ाई कर रहे थे, तभी अचानक छत से प्लास्टर भरभरा कर गिर पड़ा। सौभाग्यवश किसी छात्र को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन यदि इस घटना में जान-माल की हानि होती, तो क्या हम सिर्फ मुआवज़े और जांच के भरोसे रह जाते?

यह कोई पहली घटना नहीं है। देशभर के सरकारी स्कूलों में भवनों की जर्जर हालत, संसाधनों की कमी, और जवाबदेही की अनुपस्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि इसे सिर्फ “स्थानीय घटना” न समझा जाए, बल्कि यह सवाल राष्ट्रीय प्राथमिकता की बहस में शामिल हो।

भारत में सरकारी स्कूलों की एक बड़ी संख्या ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित है, जहाँ भवनों की दशा बेहद चिंताजनक है। बघऊ गांव की यह घटना दिखाती है कि वर्षों से मरम्मत न होने के कारण दीवारों की दरारें, टपकती छतें और जर्जर प्लास्टर बच्चों की सुरक्षा को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।

सरकारी रिपोर्ट्स और यूनिसेफ जैसी संस्थाओं की रिसर्च भी इस ओर इशारा करती हैं कि भारत में लाखों बच्चों की पढ़ाई जर्जर भवनों, असुरक्षित कक्षों और गैर-मानवीय परिस्थितियों में हो रही है। जब शिक्षा का अधिकार (Right to Education) संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है, तो क्या उसमें सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण भी नहीं जुड़ा होना चाहिए?

भारत सरकार की कई योजनाएँ — सर्व शिक्षा अभियान, समग्र शिक्षा अभियान, विद्यालय कायाकल्प योजना — कागज़ों पर तो बेहद प्रभावी लगती हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और बयां करती है।

बघऊ विद्यालय की छत गिरने की घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अधिकारी फाइलों में रिपोर्ट्स बना रहे हैं, लेकिन स्कूलों की दशा सुधर नहीं रही। प्रधानाध्यापक, शिक्षामित्र और खंड शिक्षा अधिकारी मौके पर होने के बावजूद यह लापरवाही क्यों बनी रही? क्या शिक्षा विभाग के पास कोई नियमित निरीक्षण और भवन संरचना की जांच की प्रणाली नहीं है?

इस घटना से एक और गंभीर मुद्दा सामने आता है — शिक्षकों की भूमिका और उनकी सीमाएं। इस हादसे के दौरान प्रधानाध्यापिका पुष्पा देवी और उनके सहकर्मी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित निकालकर उच्च अधिकारियों को सूचना दी।

यह दर्शाता है कि शिक्षक न केवल शिक्षा का दायित्व निभा रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की भरपाई भी कर रहे हैं। कई बार उनसे भवन की मरम्मत, बिजली, पानी, मध्यान्ह भोजन, यहां तक कि छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने की जिम्मेदारी भी थोप दी जाती है। ऐसे में असली सवाल यह है कि क्या शिक्षक पढ़ा रहे हैं या विभागीय खामियों को ढक रहे हैं?

अधिकारियों की रस्म अदायगी: जांच, आश्वासन और फिर मौन

जैसे ही कोई घटना होती है, प्रशासन की प्रतिक्रिया हमेशा एक जैसी होती है — “तकनीकी जांच कराई जाएगी”, “किसी के घायल होने की सूचना नहीं है”, “आवश्यक कार्रवाई की जाएगी”।

क्या कभी हमने सुना कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई? दोषियों पर कार्रवाई हुई? मरम्मत कार्य कितने दिन में हुआ? ज़्यादातर मामलों में जांच एक औपचारिकता बनकर रह जाती है। इससे न तो शिक्षकों को राहत मिलती है, न छात्रों को सुरक्षित वातावरण।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राज्य बाल आयोगों का दायित्व है कि वे बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करें। परंतु जब एक प्राथमिक विद्यालय में 32 नन्हीं जानें छत के गिरते प्लास्टर से बाल-बाल बचती हैं, तो क्या यह आयोग की सक्रियता की अपेक्षा नहीं करता?

ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेना और स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट तलब करना बाल सुरक्षा की दिशा में पहला कदम होना चाहिए, जो अक्सर नहीं होता।

जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, वहाँ के जनप्रतिनिधि — ग्राम प्रधान से लेकर विधायक और सांसद तक — जनता की भलाई के लिए चुने गए हैं। लेकिन जब विद्यालयों की स्थिति बदहाल हो और हादसे होते रहें, तो उनकी निष्क्रियता को कैसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है?

क्या इन प्रतिनिधियों ने कभी स्कूल भवन का दौरा किया? क्या ज़िला योजना समिति की बैठक में विद्यालय की मरम्मत का प्रस्ताव लाया गया? अफसोस की बात है कि जनप्रतिनिधियों की चिंता सिर्फ चुनावों तक सीमित रह गई है।
समस्या गंभीर है, लेकिन समाधान असंभव नहीं।

हर सरकारी विद्यालय की संरचना की तकनीकी जांच हर साल इंजीनियरों द्वारा की जाए और रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर डाली जाए।

जिसमें जनप्रतिनिधि, अभिभावक, शिक्षक, ग्राम प्रधान, ब्लॉक स्तर के अधिकारी शामिल हों और वे हर तीन महीने में स्कूल का जायजा लें।

विद्यालय कायाकल्प योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग ज़मीनी स्तर पर हो, इसके लिए पंचायत, बीएसए और प्रधानाध्यापक की त्रिस्तरीय निगरानी हो।शिक्षक नहीं होंगे भवन प्रभारी शिक्षक का कार्य केवल शिक्षण होना चाहिए। मरम्मत और संरचना संबंधी दायित्व विभागीय इंजीनियरों के पास ही रहें प्रशासनिक जवाबदेही तय हो

जिस विद्यालय में इस प्रकार की घटनाएँ हों, वहाँ के खंड शिक्षा अधिकारी और संबंधित अभियंता से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा जाए।शिक्षा की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए

बघऊ प्राथमिक विद्यालय में हुआ हादसा तो टल गया, लेकिन यह एक चेतावनी है। यह चेतावनी है कि अगर अब भी हमने विद्यालयों के बुनियादी ढांचे की उपेक्षा की, तो अगली बार कोई बच्चा बच नहीं पाएगा। शिक्षा के अधिकार के साथ सुरक्षित शिक्षा का अधिकार भी जुड़ा होना चाहिए।

अब ज़रूरत है राजनीतिक इच्छाशक्ति की, प्रशासनिक जवाबदेही की और सामाजिक जागरूकता की। यह संपादकीय केवल एक दुर्घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक आईना है।
बच्चे हमारी प्राथमिकता नहीं बने, तो हमारा भविष्य भी अंधकारमय हो सकता है।

शरद कटियार

उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट की बैठक में संगठनात्मक मजबूती और व्यापारी हितों पर हुआ विचार-विमर्श

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बिजली की समस्या और रेलवे रोड मार्केट के पुनर्जीवन पर भी हुई चर्चा, उत्पीड़न के खिलाफ सख्त रुख

फर्रुखाबाद: उद्योग व्यापार मंडल (मिश्रा गुट) की एक महत्वपूर्ण बैठक जिला अध्यक्ष सदानंद शुक्ला की अध्यक्षता में जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष लालू कनौजिया के आवास पर संपन्न हुई। बैठक में संगठन की एकजुटता, विस्तार और व्यापारी हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में मुख्य रूप से शहर में लगातार हो रही बिजली आपूर्ति की दुर्दशा और रेलवे रोड मार्केट के पुनर्जीवन को लेकर चर्चा हुई। साथ ही, यह भी निर्णय लिया गया कि व्यापारियों के किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिला अध्यक्ष सदानंद शुक्ला का ऐलान:

“फर्रुखाबाद जनपद में यदि किसी भी व्यापारी के साथ अन्याय या उत्पीड़न होता है, तो संगठन उसके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहेगा। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर उद्योग व्यापार मंडल को किसी भी हद तक जाना पड़े, वह तैयार है।”

सभी उपस्थित सदस्यों ने इस पर सर्वसम्मति से समर्थन व्यक्त किया और संगठन को और अधिक सशक्त बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव भी दिए।

बैठक में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी:

सदानंद शुक्ला – जिला अध्यक्ष

लालू कनौजिया, राजू गौतम – वरिष्ठ उपाध्यक्ष

अनुपम रस्तोगी – जिला संयुक्त महामंत्री

अरविंद गुप्ता – जिला उपाध्यक्ष

सौरभ शुक्ला, राम मिश्रा – जिला मीडिया प्रभारी

विशाल छाबड़ा, महेंद्र दुबे, गौरव दुबे – जिला मंत्री

नवनीत मिश्रा – जिला संगठन मंत्री

सोनी शुक्ला, नेहा मिश्रा – महिला अध्यक्ष

श्याम सुंदर गुप्ता – जिला युवा अध्यक्ष

अंकुर गुप्ता – युवा महामंत्री

इखलाक खां – नगर अध्यक्ष

अंकुर श्रीवास्तव – नगर युवा अध्यक्ष

राकेश सक्सेना – नगर महामंत्री

कमलेश गुप्ता – लिंगीगंज अध्यक्ष

नीरज मिश्रा – पूर्व प्रदेश युवा उपाध्यक्ष

बैठक का समापन संगठन की एकता और व्यापारी हितों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ। पदाधिकारियों ने आने वाले समय में और सक्रियता के साथ कार्य करने का निश्चय व्यक्त किया।

फतेहगढ़ में भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की महिला इकाई गठित, संगठन को मजबूती देने पर जोर

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रेखा सोमवंशी बनीं नगर अध्यक्ष, नवगठित टीम ने व्यापारी हितों के लिए संघर्ष का लिया संकल्प

फर्रुखाबाद: भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की फतेहगढ़ नगर महिला इकाई का औपचारिक गठन कर दिया गया है। यह घोषणा रेखा सोमवंशी के निवास पर आयोजित एक बैठक के दौरान की गई, जिसमें संगठन विस्तार और महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया।

बैठक में महिला जिला अध्यक्ष श्रीमती प्रीति तिवारी ने प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, प्रदेश संगठन मंत्री मुकेश गुप्ता, जिला चेयरमैन सुभाष अग्रवाल, तथा जिला महामंत्री आनंद मोहन वर्मा की सहमति प्राप्त कर संगठन की नई नगर इकाई की घोषणा की।

घोषित पदाधिकारी:

रेखा सोमवंशी – नगर अध्यक्ष

वंदना मिश्रा – महामंत्री

रूबी चतुर्वेदी – उपाध्यक्ष

अंजली वर्मा – मंत्री

मीनाक्षी पाल – संगठन मंत्री

सरस्वती वर्मा – मंत्री

सुमन राजपूत – कोषाध्यक्ष

बैठक में विशेष रूप से उपस्थित किशोर न्याय बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती सुमन राठौर एवं भाजपा महिला जिला अध्यक्ष श्रीमती बबीता पाठक को सर्वसम्मति से संगठन का संरक्षक नियुक्त किया गया और उनका भव्य स्वागत किया गया।

इस अवसर पर जिला अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता ने प्रवीण वर्मा को फतेहगढ़ नगर अध्यक्ष के पद पर मनोनीत करने की घोषणा भी की।

कार्यक्रम में सभी नव निर्वाचित पदाधिकारियों का फूल मालाओं और पटका पहनाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। इस दौरान प्रदेश संगठन मंत्री मुकेश गुप्ता ने बताया कि आने वाले समय में फतेहगढ़ महिला इकाई का तेजी से विस्तार किया जाएगा, ताकि व्यापारी समाज में महिला नेतृत्व की भागीदारी और सशक्त हो।

नवनियुक्त पदाधिकारियों ने संगठन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वे व्यापारी हितों की रक्षा, महिला सशक्तिकरण और समाज के कल्याण के लिए सदैव संघर्षशील रहेंगी।

भूजल संरक्षण को लेकर निकाली गई रैली, बच्चों ने दी जल बचाने की प्रेरणा

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रामानंद बालिका विद्यालय में जल संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत हुआ जागरूकता कार्यक्रम

फर्रुखाबाद: जल संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत रामानंद बालिका विद्यालय में भूजल संरक्षण को लेकर एक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में विद्यालय की छात्राओं ने हिस्सा लेते हुए चित्रों, नारों और पोस्टरों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को जल के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती रीता दुबे के निर्देशन में किया गया। इस दौरान भूजल सप्ताह प्रभारी फराना हाशमी, श्रीमती नीना कठेरिया, श्रीमती पूजा गुप्ता, रजत प्रजापति तथा कुमारी अनन्या शर्मा (वनस्थली टीचिंग) ने भी रैली में सक्रिय रूप से भाग लिया।

रैली के दौरान विभिन्न स्थानों पर रुककर लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया गया। छात्राओं ने नारे लगाए – “जल ही जीवन है”, “पानी बचाओ, भविष्य बचाओ”, आदि। शिक्षकों और प्रतिभागियों ने लोगों को बताया कि नल खुला न छोड़ें, टंकी भरने के बाद पानी बंद कर दें, और अवश्यकता से अधिक पानी बर्बाद न करें।

इस अवसर पर शिक्षिकाओं ने यह भी कहा कि यदि जल का दुरुपयोग नहीं रोका गया तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने नागरिकों से सोच-समझकर जल उपयोग करने की अपील की और बताया कि असीमित जल उपयोग आने वाले समय में पानी की विकराल समस्या खड़ी कर सकता है।

विद्यालय प्रबंधन ने कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया और भविष्य में ऐसे आयोजन और भी बड़े स्तर पर करने का संकल्प लिया।