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Tuesday, April 28, 2026
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बुंदेलखंड की चांदी की मछली कला संकट में, मौदहा का सोनी परिवार आज भी संभाले हुए विरासत

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मौदहा, हमीरपुर
बुंदेलखंड की ऐतिहासिक पहचान रही चांदी की मछली की कारीगरी आज अस्तित्व के गंभीर संकट से जूझ रही है। कभी देश-विदेश में अपनी बारीक शिल्पकला और चमक के लिए प्रसिद्ध यह कला अब बढ़ती लागत, घटती मांग और सरकारी सहयोग की कमी के चलते धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे के उपरौश मोहल्ले में रहने वाला सोनी परिवार किसी तरह इस परंपरा को जीवित रखने का प्रयास कर रहा है।

कारीगरों के अनुसार चांदी की मछली बनाने की प्रक्रिया बेहद सूक्ष्म और मेहनत भरी होती है। चांदी के तार को खींचकर पतली पट्टियों में बदला जाता है और फिर उन्हें पीट-पीटकर महीन जालीनुमा आकार दिया जाता है, जिससे मछली को लचीलापन और जीवंत रूप मिलता है। यह पूरी कारीगरी हाथ से की जाती है, जिसे मशीनों से दोहराना संभव नहीं है।

इस कला की जड़ें लगभग 400 वर्ष पुरानी मानी जाती हैं और इसे चंदेल काल से जोड़कर देखा जाता है। पारिवारिक इतिहास के अनुसार वर्ष 1738 में नवल सोनी के वंशजों ने इस कला को मूर्त रूप दिया था। तब से यह परिवार सात पीढ़ियों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। इतिहासकारों के अनुसार यह कला मुगल और अंग्रेजी शासनकाल में भी प्रसिद्ध रही।

परिवार के दावों के अनुसार अंग्रेजी शासनकाल में चांदी की मछली को लंदन प्रदर्शनी में भी सराहा गया था, जहां इसकी बारीकी देखकर महारानी विक्टोरिया तक प्रभावित हुई थीं। बताया जाता है कि तुलसीदास सोनी को इस उपलब्धि पर सम्मान भी मिला था, जो आज भी परिवार के पास सुरक्षित है।

आज स्थिति यह है कि पहले जहां कई परिवार इस कारीगरी से जुड़े थे, वहीं अब केवल सोनी परिवार ही इसे संभाले हुए है। चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी और बाजार में मांग घटने से यह व्यवसाय लगातार घाटे में चल रहा है। कारीगरों के अनुसार पहले जहां बड़े ऑर्डर आते थे, अब स्थिति बहुत सीमित रह गई है।

परिवार के सदस्य बताते हैं कि महीने में करीब दो से ढाई लाख रुपये का कारोबार होता है, लेकिन शुद्ध बचत केवल 20 से 30 हजार रुपये तक ही रह जाती है। इसी कारण नई पीढ़ी इस काम से दूर होती जा रही है और परिवार के कई सदस्य अब दूसरे पेशों या नौकरी की ओर बढ़ चुके हैं।

स्थानीय बाजार में चांदी की मछली की कीमत उसके वजन और बारीकी के अनुसार तय होती है। 5 ग्राम की छोटी मछली लगभग 900 रुपये में मिलती है, जबकि 2 किलो तक की बड़ी मछली की कीमत लाखों रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि यह उत्पाद मुख्य रूप से सीधे खरीदारों द्वारा ही खरीदा जाता है।

कारीगरों की सबसे बड़ी मांग है कि इस कला को GI टैग और ODOP योजना में शामिल किया जाए, ताकि इसे सरकारी संरक्षण मिल सके। साथ ही बिना ब्याज चांदी उपलब्ध कराने की भी मांग की जा रही है, जिससे उत्पादन लागत कम हो सके। उनका कहना है कि यदि सहयोग नहीं मिला तो यह अनोखी धरोहर केवल इतिहास बनकर रह जाएगी।

फिलहाल जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया गया है, लेकिन कारीगरों को उम्मीद है कि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि बुंदेलखंड की यह अनमोल कला आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।

नए जिलाधिकारी के रूप में पहुंचे डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, सादगी और संवेदनशील कार्यशैली से जगी नई उम्मीदें

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मैनपुरी। उत्तर प्रदेश शासन के आदेश के बाद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने मैनपुरी जनपद के जिलाधिकारी के रूप में विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया। कलेक्ट्रेट परिसर में पदभार संभालने के साथ ही प्रशासनिक अमले ने उनका स्वागत किया, वहीं जिले में उनके आगमन को लेकर अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता के बीच उत्सुकता का माहौल देखने को मिला। अपनी सादगी, सहज व्यवहार और जमीनी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. त्रिपाठी के मैनपुरी पहुंचने से जिले में बेहतर प्रशासन और जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर नई उम्मीदें जागी हैं।
डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी इससे पहले औरैया जिले में जिलाधिकारी के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने करीब दो वर्षों तक प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व दिया। उनकी कार्यशैली का सबसे खास पहलू यह रहा कि उन्होंने न सिर्फ कार्यालय में बैठकर काम किया, बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर आम लोगों की समस्याओं को सुना और उनके समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित की। यही कारण रहा कि औरैया में उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी, जो जनता के बीच रहकर काम करने में विश्वास रखते हैं।
औरैया से उनके स्थानांतरण के समय का दृश्य बेहद भावुक रहा। खासकर स्कूली बच्चों द्वारा दी गई विदाई ने हर किसी को भावुक कर दिया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं फूल-मालाएं लेकर अपने “डीएम सर” को विदा करने पहुंचे थे। कई बच्चे फूट-फूटकर रोते नजर आए, तो कुछ चुपचाप नम आंखों से उन्हें जाते हुए देख रहे थे। दरअसल, डॉ. त्रिपाठी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ समय निकालकर बच्चों को पढ़ाने भी जाते थे, जिससे उनके प्रति बच्चों का गहरा लगाव बन गया था।
डॉ. त्रिपाठी मूल रूप से आजमगढ़ जनपद के निवासी हैं और वर्ष 1998 बैच के पीसीएस अधिकारी रहे हैं। अगस्त 2020 में उन्हें आईएएस पद पर पदोन्नत किया गया, जिसके बाद उन्होंने नगर विकास विभाग में विशेष सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्हें लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने शहरी विकास से जुड़े कई अहम निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू किया। जुलाई 2024 में उन्हें औरैया जिले का जिलाधिकारी बनाया गया था, जहां उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और जनहितकारी सोच से अलग पहचान बनाई।
मैनपुरी में कार्यभार संभालने के बाद डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने संकेत दिए हैं कि उनकी प्राथमिकता जिले में पारदर्शी प्रशासन स्थापित करना, जनसुनवाई को और अधिक प्रभावी बनाना तथा विकास योजनाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और उनका समाधान तय समय सीमा में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया।
डॉ. त्रिपाठी के अनुभव, सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और जनसेवा के प्रति समर्पण को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि मैनपुरी में उनके नेतृत्व में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिक मजबूत होगी। उनके आगमन से जहां प्रशासनिक तंत्र को नई दिशा मिलने की संभावना है, वहीं आम जनता को भी एक संवेदनशील और सक्रिय जिलाधिकारी मिलने की उम्मीद बंधी है।

दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत में किसान की मौत, युवक गंभीर घायल; मासूम नाती बाल-बाल बचा

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औरैया। दिबियापुर थाना क्षेत्र के सहायल रोड स्थित गांव अबावर के पास मंगलवार दोपहर दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक किसान की मौत हो गई, जबकि दूसरी बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के समय किसान अपने मासूम नाती के साथ बाइक से लौट रहे थे, गनीमत रही कि बच्चा इस भीषण दुर्घटना में सुरक्षित बच गया। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, अटसू चौकी क्षेत्र के गांव राऊपुर प्रेम नगर निवासी 52 वर्षीय महेश चंद्र मंगलवार को अपने नाती नितिन का नवोदय विद्यालय में प्रवेश कराने गए थे। दोपहर करीब तीन बजे वह नाती को साथ लेकर बाइक से घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक गांव अबावर के पास पहुंची, सामने से आ रही तेज रफ्तार बाइक से उनकी जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि महेश चंद्र का हेलमेट टूट गया और उनके सिर में गंभीर चोटें आईं।
बताया गया कि महेश चंद्र के पीछे दूसरी बाइक पर उनकी बेटी शिल्पी और दामाद भी आ रहे थे। हादसा होते ही उन्होंने अपने पिता को खून से लथपथ हालत में सड़क पर पड़ा देखा तो उनके होश उड़ गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस और परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस की सहायता से महेश चंद्र और दूसरी बाइक के घायल चालक पीयूष (20), निवासी सहायल, को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने महेश चंद्र को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल पीयूष को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
थाना प्रभारी निरीक्षक पंकज मिश्रा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी और घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। मामले में तहरीर मिलने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। जिस मासूम के उज्ज्वल भविष्य के लिए दादा उसे स्कूल में दाखिला दिलाने ले गए थे, उसी सफर ने उनकी जिंदगी छीन ली। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम पसरा हुआ है।

स्कूल बंद कर शराब के ठेके खोल रही सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त : आदित्य यादव

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मैनपुरी। बदायूं से समाजवादी पार्टी के सांसद आदित्य यादव और करहल विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक तेज प्रताप यादव ने मंगलवार को एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करते हुए प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान दोनों नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
सपा सांसद आदित्य यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक ओर स्कूल बंद किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शराब के ठेके खोले जा रहे हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और लोगों के परिवार बर्बादी की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम उठाए, न कि राजस्व के नाम पर सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाए।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास कर रही है और देश-प्रदेश को बांटने वाली नीतियों पर काम कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और जनता को राहत मिलेगी।
वहीं करहल विधायक तेजप्रताप यादव ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसलों के उचित दाम न मिलने से परेशान हैं, खासकर आलू उत्पादक किसानों की स्थिति बेहद खराब है। लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार केवल योजनाओं का श्रेय लेने में लगी हुई है, जबकि जमीनी स्तर पर आम जनता को कोई राहत नहीं मिल रही। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ही विभिन्न राज्यों के चुनाव समाप्त होंगे, डीजल और पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे महंगाई और अधिक बढ़ेगी और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
इस मौके पर कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिनमें श्रीनिवास यादव, अरुनेंद्र यादव, पूर्व विधायक अनिल यादव, शशांक मिश्रा, शशांक चतुर्वेदी, आयुष यादव, हर्षवर्धन यादव और गुलशन यादव शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला और नेताओं के समर्थन में नारेबाजी भी की गई।

संदिग्ध हालात में नवविवाहिता की मौत, कमरे में फंदे से लटका मिला शव; मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप

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मैनपुरी। जिले के थाना क्षेत्र स्थित गांव विक्रमपुर में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया। विवाहिता का शव उसके ससुराल के कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। वहीं, मायके पक्ष ने ससुरालियों पर हत्या कर शव को फंदे पर लटकाने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जनपद कासगंज के थाना सिढ़पुरा क्षेत्र के गांव फतेहपुर निवासी हेमराज ने अपनी 20 वर्षीय पुत्री मंजू शाक्य की शादी करीब चार महीने पहले मैनपुरी जिले के गांव विक्रमपुर निवासी सचिन शाक्य के साथ की थी। शादी के कुछ ही महीनों बाद सोमवार शाम को विवाहिता का शव उसके ससुराल के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक ससुराल पक्ष के लोग घर से फरार हो चुके थे।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि मंजू शाक्य की हत्या गला दबाकर की गई है और साक्ष्य छिपाने के लिए उसके शव को फंदे पर लटका दिया गया। मृतका के भाई संजीव ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि उनकी बहन को शादी के बाद से ही प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंजू करीब दो महीने की गर्भवती थी, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
घटना के बाद गांव में भारी भीड़ जमा हो गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक ओर जहां मायके पक्ष इंसाफ की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ससुराल पक्ष के फरार होने से संदेह और गहरा गया है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच में जुटी हुई है।
थाना प्रभारी चंद्रपाल सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि तहरीर के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह घटना एक बार फिर दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करती है, जिससे समाज में चिंता का माहौल बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।

तिलक समारोह से लौट रहे बाबा-नाती की दर्दनाक मौत, ट्रक चालक फरार

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इटावा। जिले के इटावा-फर्रुखाबाद मार्ग पर मंगलवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। चौबिया थाना क्षेत्र के गांव रैपुरा के पास अहनैया नदी पुल के सामने तेज रफ्तार ट्रक और कार की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कार सवार बाबा और नाती की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त कार में फंसे शवों को बाहर निकाला।
जानकारी के अनुसार, मैनपुरी जिले के थाना समान कटरा क्षेत्र के ग्राम गजपुरा निवासी 40 वर्षीय गोविंद सिंह चौहान ग्वालियर में रिकवरी का कार्य करते थे। वह सोमवार को अपने चाचा देवेंद्र सिंह भदौरिया की पुत्री के तिलक समारोह में शामिल होने गांव आए थे। इसके बाद वह कन्नौज जनपद के मुगई गांव में तिलक चढ़ाने गए थे। मंगलवार तड़के सुबह करीब सात बजे वह अपनी स्विफ्ट कार से ग्वालियर के लिए वापस रवाना हुए। उनके साथ रिश्ते में बाबा 70 वर्षीय गणेश सिंह भदौरिया, निवासी आनंद नगर कोतवाली इटावा, भी कार में सवार थे।
जैसे ही उनकी कार चौबिया क्षेत्र के रैपुरा भट्टा के पास पहुंची, सामने से आ रहे गिट्टी से लदे तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने कार में सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और दोनों लोग अंदर बुरी तरह फंस गए। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष महेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ राहत कार्य में जुट गए और स्थानीय लोगों की मदद से करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला गया।
घायलों को तत्काल सीएचसी बसरेहर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गोविंद सिंह चौहान को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल गणेश सिंह भदौरिया को सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
हादसे की खबर जैसे ही परिजनों और तिलक समारोह वाले घर तक पहुंची, वहां का खुशियों भरा माहौल अचानक मातम में बदल गया। मृतक गोविंद सिंह की मां संतोष देवी, पत्नी पूनम और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गोविंद अपने पीछे 13 वर्षीय बेटे गुड्डू को छोड़ गए हैं, जिसका भविष्य अब अनिश्चितता में घिर गया है।
थानाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि दुर्घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसकी तलाश कर रही है। तहरीर मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरनाक परिणामों को उजागर कर दिया है।