लखनऊ। संसद में नारी शक्ति वंदन विधेयक के गिरने के बाद राजधानी लखनऊ में सियासत उबाल पर है। मुद्दे को लेकर नगर निगम में बुलाया गया विशेष सत्र अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। मेयर की पहल पर बुलाई गई इस बैठक का उद्देश्य निंदा प्रस्ताव पारित करना बताया गया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक स्टंट करार देते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया।
नगर निगम के इस विशेष सत्र में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, माहौल गरमा गया। ममता चौधरी ने सीधे मेयर पर सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर इस विशेष सदन को बुलाने का औचित्य क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मूल मुद्दों—जैसे पानी, सड़क और सफाई—को दरकिनार कर राजनीतिक एजेंडा चलाया जा रहा है।
वहीं समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पार्षदों ने एकजुट होकर सदन का बहिष्कार कर दिया। उनका आरोप है कि यह पूरा सत्र सिर्फ दिखावे और राजनीतिक लाभ के लिए बुलाया गया है, जबकि शहर की जमीनी समस्याओं पर कोई चर्चा नहीं हो रही।
सूत्रों के मुताबिक, विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन विधेयक के गिरने पर केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी थी। लेकिन विपक्ष की गैरमौजूदगी में यह प्रस्ताव कितना प्रभावी होगा, इस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि स्थानीय निकायों में इस तरह के मुद्दों पर विशेष सत्र बुलाना असामान्य नहीं है, लेकिन जिस तरह से विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक नौटंकी’ करार दिया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
नगर निगम का विशेष सत्र बना विवाद का अखाड़ा, विपक्ष का बहिष्कार


