कल्पनाओं से भरा मेरा वास्तविक जीवन
कल्पनाओं से भरा मेरा वास्तविक जीवन,
जिसमें अच्छे-बुरे की खबर नहीं।
मैं तो हूँ एक कच्ची मनुष्य,
जिसमें मुझे अपनों की ही खबर नहीं।
वास्तविक जीवन में मुझे अपना कोई नहीं दिखा,
पर काल्पनिक जीवन में मुझे बेगाना कोई ना दिखा।
वास्तविक जीवन में आते ही मानसिक स्थिति खराब,
और काल्पनिक जीवन में जाते ही खुशियों का ना जवाब।
जरूरी है क्या वास्तविक जीवन में जीना?
मुझे तो काल्पनिक जीवन में जीना लगा बेशुमार
वास्तविक जीवन में उम्मीद ऐसी टूटी की,
काल्पनिक जीवन में उम्मीद नहीं किसी से।
इतना भी वास्तविक जीवन में नहीं जीना
कि स्वयं के काल्पनिक जीवन को ही नष्ट कर दूं |
अरे, खुश रहने का तरीका ढूंढो,
दुखी तो एक छोटा कीट भी कर देता है |
वाणी कटियार


