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Thursday, May 21, 2026

“मेरे घायल नाती को इंसाफ चाहिए…” पूर्व डीएम स्टेनो के.के. वर्मा की आंखों में दर्द, विधवा बेटी का परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

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फर्रुखाबाद। कभी प्रशासनिक दफ्तरों में फाइलों के बीच सरकारी व्यवस्था को करीब से देखने वाले जिला अधिकारी कार्यालय के पूर्व स्टेनो के.के. वर्मा आज खुद न्याय की लड़ाई लड़ते दिखाई दे रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी आवाज में सिस्टम के खिलाफ गुस्सा कम और टूटे हुए परिवार का दर्द ज्यादा दिखाई देता है। उनकी विधवा बेटी, घायल नाती और पूरे परिवार पर दर्ज मुकदमों को लेकर अब यह मामला केवल कानूनी विवाद नहीं बल्कि इंसाफ की गुहार बनता जा रहा है।

के.के. वर्मा का आरोप है कि उनकी विधवा बेटी के बेटे अथर्व के साथ घर के अंदर बेरहमी से मारपीट की गई। घटना में अथर्व की आंख पर गंभीर चोट आई और उसकी आंख की रोशनी तक प्रभावित हो गई। परिवार का कहना है कि घायल बच्चे को इलाज के लिए लखनऊ तक ले जाना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद न्याय मिलने के बजाय उन पर ही दबाव बनाया जाने लगा।

पूर्व स्टेनो वर्मा जब अपने घायल नाती की तस्वीरें दिखाते हैं तो उनकी आवाज भर्रा जाती है। उनका कहना है कि “जिस बच्चे की आंख से खून बह रहा था, वह खुद कोतवाली पहुंचा, लेकिन अब उसी परिवार को आरोपी बनाया जा रहा है।” परिवार का दावा है कि घटना के बाद दूसरे पक्ष की ओर से अदालत के जरिए क्रॉस मुकदमा दर्ज कराकर दबाव बनाने की कोशिश की गई।

सबसे भावुक पहलू यह है कि जिस बेटी ने पहले ही पति को खो दिया, अब वही अपनी संतान के लिए न्याय मांगते हुए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर बताई जा रही है। परिवार का कहना है कि घटना के समय जिन लोगों को मुकदमे में शामिल किया गया, वे मौके पर मौजूद तक नहीं थे। इसके बावजूद पूरे परिवार को कानूनी लड़ाई में उलझा दिया गया।

के.के. वर्मा ने पुराने संपत्ति विवाद और कथित फर्जी वसीयत के मामलों का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि लंबे समय से उनका परिवार दबाव और विवादों का सामना कर रहा है। उनका कहना है कि “सिस्टम में नौकरी की, कानून पर भरोसा किया, लेकिन आज खुद अपने परिवार के लिए इंसाफ मांगना पड़ रहा है।”

स्थानीय लोगों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि घायल बच्चा खुद कोतवाली तक पहुंच गया था तो फिर निष्पक्ष जांच में देरी क्यों हुई। वहीं परिवार लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आम आदमी न्याय के लिए किस दरवाजे पर जाए, जब पीड़ित ही खुद को कटघरे में खड़ा महसूस करने लगे। घायल बच्चे की तस्वीरें और एक बुजुर्ग दादा की टूटी आवाज अब फर्रुखाबाद में संवेदनशील चर्चा का हिस्सा बन चुकी हैं।

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