कमालगंज कर्बला के शहीदों और हजरत इमाम हुसैन की याद में इस वर्ष मोहर्रम का पर्व अत्यंत सादगी, शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस बार शहर की विभिन्न अंजुमनों और ताजियादारों ने फिजूलखर्ची से बचते हुए सादगी को प्राथमिकता दी। पारंपरिक तरीके से श्रद्धा के साथ ताजिये निकाले गए और इमाम हुसैन की शहादत को नमन किया गया।
गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक
मोहर्रम के मौके पर कस्बे में हमेशा की तरह गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द की अनुपम मिसाल देखने को मिली। हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन ने सहयोग किया। कई स्थानों पर गैर-मुस्लिम भाइयों द्वारा सबील (प्याऊ) लगाकर जायरीन और अकीदतमंदों के लिए ठंडे पानी और शरबत का इंतजाम किया गया था।
फिजूलखर्ची रोककर किया गया समाजसेवा का काम
इस वर्ष ताजिया कमेटियों ने एक नई और सराहनीय पहल की। तड़क-भड़क और ऊंचे लाउडस्पीकरों पर होने वाले खर्च को कम करके, उस राशि का उपयोग गरीबों की मदद, शिक्षा और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में किया गया।
प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच सभी ताजिये अपने पारंपरिक रास्तों से होते हुए कर्बला पहुंचे, जहाँ उन्हें अदब के साथ सुपुर्दे-खाक (विसर्जित) किया गया। पूरे आयोजन के दौरान युवाओं ने अनुशासन का परिचय दिया, जिसकी सराहना जिला प्रशासन और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा की जा रही है। शांति और सौहार्द का यह माहौल समाज के लिए एक बेहतरीन संदेश दे गया।
तड़क-भड़क से दूर रहकर अकीदत के साथ याद किए गए कर्बला के शहीद।
परंपरा,सादगी और शांति के साथ मनाया गया मोहर्रम, पेश की गई आपसी सौहार्द की मिसाल


