नई दिल्ली।
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में शांति बहाल होगी और दुनिया को आर्थिक अनिश्चितता से राहत मिलेगी।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए बनी सहमति का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि इस टकराव के कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता पैदा हुई, ऊर्जा बाजार प्रभावित हुए और कई देशों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में यह समझौता विश्व समुदाय के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है।
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस सहमति के प्रभावी क्रियान्वयन से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता स्थापित होगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों पर आवाजाही सामान्य होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत को भरोसा है कि शेष विवादित मुद्दों का भी समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाएगा, जिससे एक स्थायी और अंतिम समझौते का मार्ग प्रशस्त होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने हैं। समझौते के तहत सैन्य कार्रवाई समाप्त करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से व्यापारिक गतिविधियों के लिए खोलने तथा क्षेत्रीय तनाव कम करने पर सहमति बनी है। इस घटनाक्रम को वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों के लिए बड़ा मोड़ माना जा रहा है यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो भारत समेत दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।


