नई दिल्ली। देश में वीवीआईपी सुरक्षा और सरकारी खर्च को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने काफिले को लेकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। हाल के असम और गुजरात दौरों में प्रधानमंत्री के काफिले में वाहनों की संख्या पहले की तुलना में कम दिखाई दी। सबसे अहम बात यह रही कि इस बार काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों यानी इवी को भी प्रमुखता दी गई।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय और सुरक्षा एजेंसियों के बीच पिछले कुछ समय से “स्मार्ट और सस्टेनेबल सिक्योरिटी मूवमेंट” पर मंथन चल रहा था। इसी के तहत काफिले में अनावश्यक वाहनों को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम किया गया।
असम और गुजरात में पीएम मोदी के रोड मूवमेंट के दौरान सुरक्षा घेरा पूरी तरह सक्रिय रहा, लेकिन वाहन संख्या सीमित रखी गई। हालांकि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी ने सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई समझौता नहीं किया। एंटी-सैबोटाज जांच, रूट क्लियरेंस, क्विक रिस्पॉन्स टीम और बैकअप सुरक्षा पहले की तरह मौजूद रही।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस बदलाव को प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार लगातार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की बात कर रही है, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के काफिले में इवी शामिल कर सीधे तौर पर “ग्रीन इंडिया” का संदेश देने की कोशिश दिखाई दे रही है।
जानकारों का कहना है कि दुनिया के कई देशों में अब हाई-प्रोफाइल नेताओं के काफिलों में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। भारत में भी सरकारी विभागों को चरणबद्ध तरीके से इवी अपनाने के निर्देश पहले से दिए जा चुके हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह कदम भविष्य की सरकारी परिवहन नीति का संकेत माना जा रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, काफिले में वाहनों की संख्या कम करना केवल दिखावटी बदलाव नहीं होता। इसके पीछे रूट मैनेजमेंट, ट्रैफिक कंट्रोल, रिस्पॉन्स टाइम और ईंधन लागत जैसे कई बड़े फैक्टर जुड़े होते हैं। कम वाहन होने से आम जनता को ट्रैफिक जाम की परेशानी भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि क्या आने वाले समय में केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के वीवीआईपी काफिलों के लिए भी नई गाइडलाइन लागू हो सकती है। फिलहाल पीएम मोदी का बदला हुआ काफिला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।


