नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक पर शुक्रवार को हुई मतदान प्रक्रिया में सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिसके चलते यह विधेयक पारित नहीं हो पाया। इस घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में घमासान तेज हो गया है और सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष पर हमलावर है। शनिवार को आयोजित केंद्रीय कैबिनेट बैठक में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी दलों की तीखी आलोचना की।
कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को वर्ष 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस महत्वपूर्ण विधेयक को गिराकर विपक्ष ने “बहुत बड़ी गलती” की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की महिलाएं इस फैसले को कभी माफ नहीं करेंगी और विपक्ष को इसका राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह संदेश देश के हर गांव और हर नागरिक तक पहुंचाया जाना चाहिए कि किस प्रकार महिलाओं के अधिकारों को बाधित किया गया।
दरअसल, संविधान संशोधन के तहत लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था, लेकिन मतदान के दौरान इसे आवश्यक समर्थन नहीं मिल पाया। लंबी और तीखी बहस के बाद विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया, जिससे यह पारित नहीं हो सका।
इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में भावुक अपील करते हुए सभी सांसदों से “अंतरात्मा की आवाज” सुनने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि देश की करोड़ों महिलाओं की नजर इस फैसले पर है और कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे नारी शक्ति की भावनाएं आहत हों।
विधेयक के पारित न होने के बाद अब सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। सत्ता पक्ष जहां इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार के प्रस्ताव और रणनीति पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति के केंद्र में बना रहने की संभावना है।


