आगरा। न्यायालय को गलत तथ्य प्रस्तुत करना सिकंदरा थाना पुलिस को भारी पड़ गया। चोरी के एक मामले में आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर अदालत में भ्रामक जानकारी देने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिकंदरा थानाध्यक्ष और संबंधित दारोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में आया कि जिस आरोपी के खिलाफ केवल एक प्राथमिकी लंबित थी, उसकी आपराधिक छवि को गंभीर दिखाने के लिए अदालत में सात मुकदमों का विवरण प्रस्तुत कर दिया गया। जांच में यह तथ्य सामने आने पर अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और कोर्ट को गुमराह करने का गंभीर मामला माना।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारियों का दायित्व निष्पक्ष और तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करना है। यदि अदालत के समक्ष गलत या भ्रामक तथ्य रखे जाते हैं तो इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण पर नाराजगी जताते हुए आगरा पुलिस कमिश्नर को संबंधित थानाध्यक्ष और दारोगा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के रखवालों से अपेक्षा की जाती है कि वे पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय का यह रुख स्पष्ट संदेश देता है कि किसी भी स्तर पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।


