संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर : 1945 की नहीं, 2025 की हकीकत को दर्शाए यूएन

0
122

नई दिल्ली।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को राजधानी नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सैन्य योगदान देने वाले देशों के सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि आज का संयुक्त राष्ट्र अब भी 1945 के दौर को प्रतिबिंबित करता है, जबकि दुनिया 2025 की हकीकतों के साथ आगे बढ़ चुकी है।डॉ. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा, “मैं हाल ही में न्यूयॉर्क से 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेकर लौटा हूं। वहां के अनुभव से यह स्पष्ट है कि संयुक्त राष्ट्र को अब बदलने की जरूरत है। यह संस्था अब भी 80 साल पुरानी वास्तविकताओं पर टिकी है, जबकि इस दौरान इसके सदस्य देशों की संख्या चार गुना बढ़ चुकी है।उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं परिवर्तन नहीं करतीं, उनके अप्रासंगिक होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र को अधिक समावेशी, लोकतांत्रिक और सहभागी बनाना होगा, ताकि यह आज की दुनिया का सच्चा प्रतिनिधित्व कर सके। जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि “संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता इस बात पर टिकी है कि वह विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण की आवाज को कितना बुलंद करता है।विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश भी बदलाव चाहते हैं, और अब समय आ गया है कि सुरक्षा परिषद का भी विस्तार किया जाए, ताकि वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य का वास्तविक प्रतिनिधित्व हो सके।

शांति सेना के योगदान का उल्लेख करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा, “हमारे शांति सैनिक बहुपक्षवाद के सच्चे पथप्रदर्शक हैं। मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए वे अपनी जान जोखिम में डालते हैं। आज मैं उन 4000 से अधिक शांति सैनिकों को नमन करता हूं जिन्होंने कर्तव्य की राह पर सर्वोच्च बलिदान दिया।”

उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में जब भी संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों की योजना बनाई जाए, तो इसमें मेजबान देशों और शांति सैनिक भेजने वाले देशों दोनों को परामर्श प्रक्रिया में शामिल किया जाए। इससे शांति अभियानों की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

जयशंकर के इस बयान को भारत के वैश्विक सुधार एजेंडे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने की कोशिश है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here