– गवर्नर ने की संवैधानिक बड़ी कार्रवाई
– विधानसभा भंग होने से बदली सत्ता की तस्वीर
– इस्तीफा न देने पर थीं अड़ी
– देश भर में कराई किरकिरी
कोलकाता।पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक भूचाल देखने को मिला ज़ब चुनाव में बुरी तरह हार के बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे रही थीं, बुधवार को राज्यपाल उन्हें और उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया उसके बाद राज्य की सत्ता व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है।
विधानसभा भंग होने और करारी राजनीतिक हार के बावजूद इस्तीफा न देने के आरोपों के बीच यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार चुनावी पराजय और बढ़ते संवैधानिक दबाव के बावजूद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं थीं। इसी को लेकर विपक्ष लगातार उन पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगा रहा था। अंततः संवैधानिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद राज्यपाल ने हस्तक्षेप करते हुए सरकार को बर्खास्त कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में नई सत्ता व्यवस्था को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्षी दल इसे “लोकतंत्र की बहाली” बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध और संवैधानिक दुरुपयोग करार दे रही है। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक इस फैसले की तीखी राजनीतिक चर्चा हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शेखर के कार्यकाल से भी कर रहे हैं। वर्ष 1991 में केंद्र की चंद्रशेखर सरकार ने तमिलनाडु में एम . करूणानिधि की सरकार को बर्खास्त किया था। उस समय राज्य में कानून व्यवस्था और अलगाववादी गतिविधियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। भारतीय राजनीति में वह फैसला भी लंबे समय तक संवैधानिक बहस का विषय बना रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल का मौजूदा संकट केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया था। विधानसभा भंग होने के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने को लेकर उठे सवालों ने पूरे देश में चर्चा पैदा कर दी। विपक्ष का दावा है कि इससे लोकतांत्रिक परंपराओं की “देशभर में किरकिरी” हुई।


