– तेल कंपनियों को मिलेगा सीधा फायदा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र और जैव ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सरकार के इस निर्णय के बाद ऐसे पेट्रोल पर अब शून्य एक्साइज ड्यूटी लागू होगी।
सरकार का मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को गति देने और बढ़ती लागत के दबाव से जूझ रही तेल विपणन कंपनियों को राहत देने के लिए यह कदम आवश्यक था। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर तेजी से काम किया है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक्साइज ड्यूटी हटने से तेल कंपनियों की लागत में कमी आएगी और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को और मजबूती मिलेगी। इससे गन्ना किसानों और एथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
केंद्र सरकार पहले ही देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) के लक्ष्य को बढ़ावा दे रही है। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और विदेशी मुद्रा की बचत भी होती है।
हालांकि, अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस फैसले का लाभ आम उपभोक्ताओं तक किस हद तक पहुंचता है। यदि लागत में आई कमी का कुछ हिस्सा पेट्रोल कीमतों में समायोजित किया जाता है, तो वाहन चालकों को भी राहत मिल सकती है। फिलहाल सरकार का यह फैसला तेल कंपनियों, एथेनॉल उत्पादकों और कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन माना जा रहा है।
केंद्र का यह कदम साफ संकेत देता है कि भारत अब पेट्रोलियम आधारित अर्थव्यवस्था से धीरे-धीरे जैव ईंधन आधारित ऊर्जा मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां किसानों की फसल भी ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनेगी।


