अमेरिका की मध्यस्थता में शांति की कोशिश तेज, 34 साल बाद आमने-सामने बातचीत; डोनाल्ड ट्रंप ने की घोषणा
वॉशिंगटन
पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इस्राइल और लेबनान के बीच 10 दिनों के अस्थायी संघर्षविराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, जिसके बाद दोनों देशों ने शांति की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीजफायर पर सहमति जताई। उन्होंने बताया कि यह अस्थायी संघर्षविराम ईस्टर्न टाइम के अनुसार शाम 5 बजे से लागू होगा, जो भारत में 17 अप्रैल की सुबह 2:30 बजे के बराबर है।
हालांकि इस समझौते में हिजबुल्ला समूह का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जो इस्राइल-लेबनान संघर्ष का एक प्रमुख पक्ष माना जाता है। इसी कारण इस घोषणा को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि जमीनी स्तर पर संघर्ष की वास्तविक स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि लेबनान की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि जब तक जमीनी स्तर पर संघर्षविराम लागू नहीं होता, तब तक सीधी बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। इसके बाद कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आई और अंततः दोनों देशों के बीच अस्थायी समझौते पर सहमति बनी।
रिपोर्ट के अनुसार, 34 वर्षों के बाद पहली बार इस्राइल और लेबनान के प्रतिनिधि वॉशिंगटन डीसी में आमने-सामने मिले। इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अमेरिका ने इससे पहले एक त्रिपक्षीय बैठक की भी मेजबानी की थी, जिसमें इस्राइल, लेबनान और अमेरिकी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में युद्धविराम लागू करने, सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और भविष्य की शांति व्यवस्था के लिए एक व्यापक ढांचे पर काम करने पर सहमति बनी थी। अमेरिका ने उम्मीद जताई है कि यह अस्थायी संघर्षविराम आगे चलकर स्थायी शांति में बदल सकता है।


