वाराणसी/यूथ इंडिया। धर्मनगरी वाराणसी में गंगा की तलहटी से एक विशाल शिवलिंग मिलने के बाद क्षेत्र में आस्था और उत्सुकता का माहौल है। रामनगर क्षेत्र के सुजाबाद घाट के पास गंगा नदी के भीतर से निकाले गए इस शिवलिंग का वजन करीब दो कुंतल बताया जा रहा है। शिवलिंग मिलने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय मल्लाहों के अनुसार दो दिन पूर्व गंगा में नाव संचालन के दौरान उन्हें नदी की तलहटी में एक विशाल पत्थरनुमा आकृति दिखाई दी। करीब डेढ़ दर्जन मल्लाहों ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद इसे बाहर निकाला। बाहर निकालने पर यह शिवलिंग के रूप में दिखाई दिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग उसे देखने पहुंचने लगे।
शिवलिंग के आकार, बनावट और शिल्प को देखकर कुछ स्थानीय लोग और जानकार इसे अत्यंत प्राचीन बता रहे हैं। प्रारंभिक चर्चाओं में इसके करीब 2500 वर्ष पुराने होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक पुरातत्व विभाग या किसी अधिकृत संस्था द्वारा इसकी आयु को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
गौरतलब है कि वाराणसी और गंगा के तटों का इतिहास हजारों वर्षों पुराना रहा है। समय-समय पर गंगा के जलस्तर में बदलाव और कटान के दौरान कई प्राचीन अवशेष सामने आते रहे हैं। ऐसे में इस शिवलिंग की वास्तविक ऐतिहासिकता और प्राचीनता को लेकर विशेषज्ञों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शिवलिंग मिलने की सूचना के बाद आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु मौके पर पहुंच रहे हैं। कई लोगों ने इसे बाबा विश्वनाथ की नगरी में एक विशेष धार्मिक संकेत के रूप में देखा है, जबकि इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोग इसकी वैज्ञानिक जांच की मांग कर रहे हैं।


