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Wednesday, May 13, 2026

एटा में मिट्टी खनन माफियाओं का आतंक, राजस्व टीम से अभद्रता कर छुड़ा ले गए 2 लोडर

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नायब तहसीलदार की मौजूदगी में दबंगों का दुस्साहस, 3 नामजद समेत 10 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज

एटा। अवैध खनन पर सख्ती के दावों के बीच एटा में खनन माफियाओं का दुस्साहस खुलकर सामने आया है। जलेसर कोतवाली क्षेत्र के रनौसा गांव में अवैध मिट्टी खनन की सूचना पर पहुंची राजस्व टीम के साथ दबंगों ने न केवल अभद्रता की बल्कि कार्रवाई के दौरान पकड़े गए दो लोडर जबरन छुड़ाकर ले गए। घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के मुताबिक राजस्व विभाग की टीम अवैध मिट्टी खनन की शिकायत पर कार्रवाई करने रनौसा गांव पहुंची थी। टीम के साथ नायब तहसीलदार भी मौजूद थे। मौके पर जांच के दौरान अवैध खनन में लगे दो लोडरों को पकड़ा गया। इसी दौरान कारों से पहुंचे दबंगों ने राजस्व टीम को घेर लिया और अभद्रता शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपियों ने सरकारी कार्रवाई का विरोध करते हुए हंगामा किया और दबाव बनाकर दोनों लोडर मौके से छुड़ाकर ले गए।

घटना के दौरान राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बदसलूकी किए जाने की भी बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि दबंगों की संख्या 12 से अधिक थी और वे पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंचे थे। प्रशासनिक अधिकारियों के सामने जिस तरह खनन माफियाओं ने खुलेआम दबंगई दिखाई, उसने जिले में कानून व्यवस्था और खनन नेटवर्क की मजबूत पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले के बाद राजस्व विभाग की ओर से जलेसर कोतवाली में तहरीर दी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने 3 नामजद और 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, अभद्रता और अवैध खनन से जुड़े मामलों में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध मिट्टी खनन का कारोबार चल रहा है और कई बार शिकायतों के बावजूद माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। ग्रामीणों के अनुसार रात के अंधेरे में भारी मशीनों से मिट्टी खनन किया जाता है, जिससे सरकारी जमीनों और ग्रामीण रास्तों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

एटा की यह घटना एक बार फिर साबित कर रही है कि प्रदेश में अवैध खनन का नेटवर्क कितना संगठित और प्रभावशाली हो चुका है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब राजस्व टीम और नायब तहसीलदार की मौजूदगी में सरकारी कार्रवाई को खुलेआम चुनौती दी जा सकती है, तो आम लोगों की सुरक्षा और कानून का भय आखिर कितना बचा है।

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