दोपहर 3 बजे होगा शपथ ग्रहण, कन्नौज से कैलाश राजपूत का नाम सबसे आगे; फर्रुखाबाद फिर खाली हाथ रहने की चर्चा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार आज रविवार शाम 3 बजे जन भवन में होने जा रहा है। राजभवन स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और राज्यपाल नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। देर रात तक भाजपा संगठन और सरकार के बीच बैठकों का दौर चलता रहा, जिसके बाद संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
सूत्रों के मुताबिक इस बार कुल 10 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जिनमें 6 नए चेहरे शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कुछ मौजूदा राज्यमंत्रियों को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार और कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। भाजपा इस विस्तार को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारी के रूप में देख रही है। पार्टी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधकर अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटी हुई है।
सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व दिए जाने को लेकर है। पासी समाज से कृष्णा पासवान, वाल्मीकि समाज से सुरेंद्र दिलेर, ओबीसी चेहरे के रूप में हंसराज विश्वकर्मा और जाट समाज से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम तेजी से चर्चा में है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा हलचल कन्नौज से आने वाले लोधी चेहरे कैलाश राजपूत को लेकर देखी जा रही है। माना जा रहा है कि भाजपा लोधी वोट बैंक को साधने के लिए उन्हें बड़ा मौका दे सकती है।
वहीं समाजवादी पार्टी के बागी विधायक मनोज पांडेय और विधायक पूजा पाल को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। अगर इन दोनों चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलती है तो इसे भाजपा की बड़ी राजनीतिक सेंधमारी के रूप में देखा जाएगा। भाजपा संगठन विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं को साधकर आगामी चुनावी समीकरण मजबूत करने की रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार मौजूदा सरकार में राज्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल सिंह को प्रमोशन देकर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। भाजपा नेतृत्व पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और पूर्वांचल के जातीय समीकरणों को साधने के साथ-साथ दलित और गैर-यादव पिछड़े वोट बैंक को मजबूत करने की तैयारी में है।
इधर फर्रुखाबाद का नाम संभावित सूची से लगभग गायब रहने की चर्चाओं ने जिले की राजनीति को गर्मा दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिले से भाजपा के कई विधायक होने के बावजूद मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व न मिलना स्थानीय संगठन और जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े कर रहा है। अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य का नाम पहले चर्चाओं में जरूर आया, लेकिन अंतिम दौर में उनका नाम कमजोर पड़ता दिखाई दिया। वहीं जिले की राजनीतिक छवि और संगठनात्मक प्रभाव को लेकर भी भाजपा के अंदर चर्चाएं तेज बताई जा रही हैं।
भाजपा सूत्रों का मानना है कि इस बार पार्टी “विजयी सामाजिक समीकरण” के फार्मूले पर आगे बढ़ रही है, जिसमें पश्चिमी यूपी और बड़े वोट बैंक वाले वर्गों को प्राथमिकता दी जा रही है। यही वजह है कि कई पुराने दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
राजभवन और जन भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लगातार संभावित मंत्रियों से संपर्क में बने हुए हैं। अब सबकी निगाहें आज दोपहर 3 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं, जहां साफ हो जाएगा कि योगी सरकार 2027 की राजनीतिक लड़ाई के लिए किन चेहरों पर सबसे बड़ा दांव लगाने जा रही है।


