फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के फर्रुखाबाद डिपो में विभागीय कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक यात्री के साथ कथित मारपीट के गंभीर आरोपों में घिरे चालक और परिचालक को पहले रूट से हटाने का आदेश जारी किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद दोनों को दोबारा ड्यूटी पर भेज दिए जाने की चर्चा से परिवहन विभाग कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है।
मामला हरदोई जनपद के सवाजपुर निवासी धीरज दीक्षित से जुड़ा है। पीड़ित का आरोप है कि फर्रुखाबाद डिपो की बस संख्या UP 78 KT 1543 के चालक अनुज कुमार, परिचालक राजीव कुमार तथा उनके साथियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। विरोध करने पर कथित रूप से मारपीट की गई, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद पीड़ित ने परिवहन निगम के अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायत सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने चालक और परिचालक को रूट से हटाने की कार्रवाई की। उस समय यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और निष्पक्ष जांच होगी। लेकिन सूत्रों का दावा है कि यह कार्रवाई महज औपचारिकता साबित हुई। आरोप है कि बिना जांच पूरी हुए और बिना किसी अंतिम निष्कर्ष के दोनों कर्मचारियों को पुनः ड्यूटी पर भेज दिया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायत विभाग के पास लिखित रूप में मौजूद थी और जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तो आखिर किन परिस्थितियों में दोनों कर्मचारियों को फिर से यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी गई? क्या जांच रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी, या फिर मामला दबाने की कोशिश की गई?
परिवहन निगम के कर्मचारियों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि किसी सामान्य कर्मचारी पर ऐसे आरोप लगते तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती, लेकिन यहां मामला अलग दिखाई देता है। इससे विभागीय निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
यात्रियों का भी कहना है कि रोडवेज बसों में सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि मारपीट जैसे आरोपों में घिरे कर्मचारियों को बिना स्पष्ट जांच परिणाम के दोबारा ड्यूटी पर तैनात किया जाता है तो इससे यात्रियों का भरोसा कमजोर होता है।


