साढ़े 9 साल में कारागारों पर खर्च हुए 17 हजार करोड़ रुपये, बजट में 215 प्रतिशत की बढ़ोतरी का दावा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में कारागारों के आधुनिकीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार पिछले साढ़े 9 वर्षों में जेलों से जुड़े कार्यों पर करीब 17 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस दौरान कारागार विभाग के बजट में 215 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का दावा किया गया है।
सरकार का जोर जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ आधुनिक भवन, बेहतर चिकित्सा व्यवस्था, रसोईघरों का आधुनिकीकरण, सुरक्षित मुलाकात गृह, संचार व्यवस्था और बंदियों के प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं को विकसित करने पर रहा है। उत्तर प्रदेश कारागार विभाग की आधिकारिक जानकारी में भी इन क्षेत्रों में सुधार को प्रमुखता दी गई है।
नई जेलों से बढ़ाई जा रही बंदी क्षमता
बढ़ती बंदी संख्या को देखते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में नई जेलों का निर्माण कराया जा रहा है। महोबा और हाथरस समेत कई जिलों में नए कारागार तैयार किए जा रहे हैं।
हाथरस में करीब 185 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन नई जिला जेल का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी सामने आई है। जेल में करीब 1,020 बंदियों को रखने की क्षमता होगी।
कारागार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों की 71 कारागार संस्थाएं संचालित हैं, जिनमें केंद्रीय, जिला और उप कारागार के साथ अन्य विशेष कारागार संस्थाएं शामिल हैं।
आधुनिकीकरण पर फोकस
सरकार की ओर से जेलों में बंदियों के पुनर्वास और सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत साक्षरता अभियान, कंप्यूटर प्रशिक्षण, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पारिश्रमिक जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि नई जेलों के निर्माण और मौजूदा कारागारों के आधुनिकीकरण से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ बंदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


